आगरा

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आप भी मानते हैं पुलिस को रिश्तखोर? इस कॉन्सटेबल की बात बदल देगी सोच

फेसबुक पर फेमस हो रहा है यूपी पुलिस के इस कॉन्सटेबल का पेज, जानें क्यों है खास।

Dainik Bhaskar

Feb 12, 2018, 03:16 PM IST
Constable trying to change negative image of police with facebook page

आगरा. यूपी पुलिस में तैनात कॉन्सटेबल सचिन कौशिक सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इन्होंने कोई हीरोगिरी का काम नहीं किया है, बल्कि पुलिस की पॉजिटिव इमेज बनाने के लिए एक मिशन चला रहे हैं। इनकी मुहिम को पब्लिक से जमकर वाहवाही मिल रही है। मूलतः अलीगढ़ से ताल्लुक रखने वाले सचिन कौशिक ने अपनी इस खास मुहिम DainikBhaskar.com के साथ शेयर की।

पुलिस की छवि सुधारना चाहते हैं सचिन

- मूलतः जनपद अलीगढ़ के क़स्बा गोरई के रहने वाले सचिन कौशिक फेसबुक के जरिए लोगों की नजरों में पुलिस की छवि सुधारने में लगे हैं। इसके लिए इन्होंने एक पूरा पेज डिजाइन किया है, जिस पर पुलिसवालों द्वारा किए अच्छे कामों को हाइलाइट किया जाता है।
- इनका मानना है कि, "पुलिसवाले भी उसी समाज से आते हैं, जिसमें सभी रहते हैं। तो फिर लोग पुलिस से इतनी नफरत क्यों करते हैं? यह बात सब जानते हैं कि पुलिसवाले हफ्ते के सातों दिन और 24 घंटे सेवा में तत्पर रहते हैं। रोड पर किसी को कोई भी प्रॉब्लम आए तो वो सबसे पहले 100 नंबर पर पुलिस से हेल्प मांगता है। फिर उन्हें विलेन क्यों माना जाता है। पब्लिक को पुलिस के प्रति ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत है।"
- सचिन कौशिक के फेसबुक पेज 'पुलिस छवि सुधार : एक मुहिम' के एक साल में 53 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स बने। इन्हें फेसबुक पर @upcopsachin से सर्च किया जा सकता है। ट्विटर पर भी ये एक्टिव हैं।

खुद मानते थे पुलिस को बेईमान

- 2010 में इनका सिलेक्शन यूपी पुलिस में हुआ। सचिन बताते हैं, "पुलिस में भर्ती से पहले मैं भी यही सोचता था कि पुलिस में सिर्फ भ्रष्टाचार भरा है और सारे पुलिसवाले घूसखोर हैं। नवंबर 2014 में मुझे आगरा के टूरिज्म पुलिस स्टेशन में पोस्टिंग मिली। यहां आने के बाद मेरा नजरिया बदल गया। यहां विदेशी टूरिस्ट्स को हेल्प करना होता था। मैंने महसूस किया कि अब मैं इंटरनेशनल लेवल पर काम कर रहा हूं। मैं पूरे देश को रिप्रेजेंट कर रहा था। ऐसे में मुझे लगा कि यदि विदेशी टूरिस्ट का एक्सपीरिएंस खराब रहा तो इससे पूरे देश की छवि खराब होगी।"
- "एक दिन हमारे पास रूस का टूरिस्ट कंप्लेंट लेकर आया। उसका सामान और पर्स चोरी हो गया था। मेरे साथी पुलिसवालों ने मिलकर अपनी जेब से पैसे इकट्ठा किए और उसे दे दिए। जब मैंने सभी से इसका कारण पूछा तो एक ही जवाब मिला- यार इनकी हेल्प नहीं करेंगे तो ये घर जाकर अपने इंडिया को खराब कहेंगे। देश के लिए इतना तो कर ही सकते हैं।"
- "वहीं से मेरा एटीट्यूड पुलिस सर्विस को लेकर बदल गया। मैंने महसूस किया कि सिर्फ टूरिस्ट पुलिस स्टेशन में ही नहीं, बल्कि देशभर में कई ऐसे पुलिसवाले हैं जो ईमानदारी से लोगों की सेवा कर रहे हैं। तभी मैंने फेसबुक पर पुलिस के गुडवर्क को हाइलाइट करने वाले पोस्ट डालने शुरू किए। उन पोस्ट्स पर मुझे बेहतरीन रिस्पॉन्स मिला और मैंने इसे एक मुहिम का रूप दे दिया।"

Constable trying to change negative image of police with facebook page

#आगरा के ब्लड डोनेटिंग कॉप्स


आगरा में पिछले काफ़ी समय से पुलिस जवानों ने whatsapp पर ग्रूप बनाकर ख़ून के अभाव में ज़िंदगी गँवाने वालों के लिए एक मुहिम छेड़ रखी है जो अब तक समय पर ब्लड उपलब्ध कराकर कई जिंदगियाँ भी बचा चुके हैं।

 

एक मामला तो इतना गम्भीर था,एक मानवेन्द्र नाम के बच्चे (शिकोहाबाद का रहने वाला)को डेंगू हुआ और हालत बहुत नाज़ुक थी,उसको आगरा रेफ़र कर दिया था जो पुष्पांजलि हॉस्पिटल में एडमिट था,जंबो पैक की एहतियातन आवश्यकता थी,जैसे ही पता चला,सदस्य सक्रिय हुए और Sundar Singh पहुँच गए जंबो पैक देने..😊

 

समय से पहुँचकर न सिर्फ़ बच्चे की जान बचाई बल्कि पुलिस के आलोचकों को आइना भी दिखा दिया।परिवारीजन तो उनका महिमा मण्डन करते नहीं थके।

 

मैं सचिन कौशिक आप सभी साथियों चौधरी देवेश Shyam Solanki चौधरी कोमल सिंह धर्मेंद्र सिंह,सुनील कुमार,विकास,अंकुर,Virendra Singh और अन्य बाक़ी के जज़्बे को नमन करता हूँ और आशा करता हूँ कि आप इसी जज़्बे और जुनून के साथ भविष्य में अपने समाज के काम आने के साथ पुलिस शब्द की गरिमा में चार चाँद लगाते रहेंगे।

Constable trying to change negative image of police with facebook page

#मुरादाबाद का लविंग फादर कॉप


कोई बताएगा कि इस बच्ची का क़सूर क्या था

 

कल ग्राम NH 93 पर ग्राम भीखनपुर कुलवाडा के निकट कूड़े के ढेर में पड़ी रो रही इस 6 माह की मासूम को जब पुलिसकर्मी ने देखा तो रहा न गया,उठाकर अपनी छाती से लगा लिया।

 

बात करने पर बताया कि जब देखा था तो कलेजा फटने को आ रहा था...आख़िर कोई कैसे इतना निर्दयी हो सकता है।इस बच्ची के परिवार वाले ने किसी ने तो उसे फेंका होगा.. फेंकते वक़्त बिलकुल भी हाथ नहीं काँपे थे क्या??

 

कहाँ जा रहे हैं हम और कहाँ जा रहा है हमारा समाज??
तुरंत इस फूल सी गुड़िया को हॉस्पिटल लेकर गए और भर्ती कराया जो अब ठीक है।
जिसका कोई नहीं उसकी पुलिस है यारों...

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#Rae Bareli सच्चा हमदर्द पुलिसवाला

 

ये दिव्यांग बच्चा सड़क पार करने के लिए किनारे बैठा इंतज़ार कर रहा था।तभी UP100 पीआरवी भ्रमण पर थी,पुलिसकर्मियों की नज़र बच्चे पर पड़ी तो कुछ संदेह हुआ,गाड़ी रोकी और बच्चे को पूछा बेटा क्यूँ बेठे हो??

 

जवाब मिला साहब हमको सड़क पार करनी है लेकिन वाहन रुक नहीं रहे और हमें सड़क पार करने में समय लगता है।इतना सुन कॉन्सटेबल देवेन्द्र ने बच्चे को गोद में उठाया और सड़क पार करवा दी।

 

फिर बच्चे से पूछा बेटा आपकी ट्राई साइकिल कहाँ है तो बोला साहब हमारे पापा बहुत ग़रीब हैं,साइकिल नहीं ख़रीद सकते......सुनकर भावुक😢हो गए...और वहाँ से चुप-चाप चले आए।

 

Prv कर्मियों ने आपस में सलाह मशविरा किया और उसके तीसरे दिन बच्चे के लिए एक ट्राई साइकिल का इंतज़ाम कर दिया।और जब उसको लेकर बच्चे के पास पहुँचे तो वो बच्चा बहुत ख़ुश हुआ,मानो ज़माने की सारी ख़ुशी उसे मिल गयी हो।


मानो या ना मानो आपकी पुलिस बदल रही है लेकिन ज़रूरत है आपको साथ देने की।एक हाथ से ताली नहीं बज सकती,आप साथ दें तो सब कुछ सम्भव है।

 

ख़ैर साधुवाद सभी पीआरवी 1776 के साथियों को
शुक्रिया Raebareli Police

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#Ambedkarnagar क्राइम कंट्रोल से मानवता तक

 

 

एक ऐसे ips officer जो अलग-2 अवतारों में नज़र आते हैं।कभी शिक्षक,कभी ग़रीब,असहाय लोगों के मसीहा के रूप में,तो कभी मित्र अवतार तो कभी अभिभावक,और इससे भी ऊपर क्राइम कंट्रोल वाला सिंघम जिन्होंने अमरोहा में चार ख़ूँख़ार बदमाशों को एनकाउंटर में पकड़ा जिसके लिए उनको पुलिस के मुखिया के हाथों सम्मानित भी किया गया।
और हो भी क्यूँ नाऽऽ....US से 50 लाख का पकेज छोड़ भारतीय पुलिस सेवा को जिसने चुना हो तो स्वयं अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उनके जीवन का उद्देश्य क्या होगा??जनपद अमरोहा में वतौर SP अपनी तैनाती के दौरान कई बार स्कूलों में समय निकाल कर जाना और बच्चों से रूबरू होना,शिक्षा के साथ-२ उनको पुलिस के बारे में भी जागरूक करना,साथ ही उनको आश्वस्त करनाकि पुलिस हमेशा आपकी मदद के लिए है।
उनके इस क़दम से आम जनमानस में पुलिस के लिए न सिर्फ़ सम्मान बढ़ा बल्कि दौनो के मध्य बेहतर तालमेल स्थापित हुआ जिसकी जमकर तारीफ़ भी हुयी।
वर्तमान में श्री santosh mishra साहब Ambedkarnagar जिले के कप्तान हैं और वहाँ की जनता को अपनी कार्यशैली से प्रभावित कर रहे है

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#Agra दिलदार पुलिसवाला


यह युवक सड़क किनारे खड़ा-खड़ा रो रहा था कि उस पर वहीं duty पर तैनात का० राजीव कुमार की नज़र पड़ती है।उसके पास गए और उसे रोने का कारण पूछा,बताया कि में ट्रक लदान करता हूँ,प. बंगाल का रहने वाला हूँ। ट्रक ड्राइवर मुझे छोड़ के चला गया है।मुझे भूख लगी है और मेरे पास एक भी रुपया नहीं है,मुझे घर भी जाना है,में कैसे जाऊँगा और फिर रोने लगा।

 

तुरंत जवान ने उसे सांत्वना दी और पहले उसे खाना खिलाने ले गए और खाना खिलवाया।इतना करता देख वो युवक फिर से भावुक हुआ और बोला साहब आप बहुत अच्छे हैं।
खाना खाने के बाद उस युवक को किराए हेतु कुछ पैसे भी दिए और वो युवक हँसता हुआ घर के लिए रवाना हो गया।

 

शुक्रिया राजीव कुमार पुलिस शब्द में चार-चाँद लगाने के लिए।

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