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UP: पुलिस ने दलित की बरात को बताया शांति के लिए खतरा, दूल्हा बोला-संविधान ने हमें दिया है बराबरी का अधिकार

कासगंज. यहां पुलिस ने एक दलित की बरात को शांति के लिए खतरा बताया है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 25, 2018, 04:05 PM IST

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    संजय ने कहा मैं पढ़ा-लिखा हूँ। आज के दौर में ऐसी परंपराओं के लिए कोई जगह नहीं है। संजय और शीतल की फाइल फोटो

    कासगंज. यहां पुलिस ने एक दलित की बरात को शांति के लिए खतरा बताया है। हाथरस निवासी संजय जाटव की बरात 20 अप्रैल को कासगंज के निजामपुर गांव में जानी है। ठाकुर बाहुल्य इस गांव में दलित बिरादरी की बरात पूरे गांव में चढ़ाने (गांव घूमकर जाने) का रिवाज नहीं है। संजय ने जब इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी और सीएम ऑफिस से की तो पुलिस ने जांच कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बरात चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

    क्या है मामला ?

    -कासगंज के निजामपुर गांव में जाटव परिवार की शीतल की शादी 6 महीने पहले हाथरस के संजय जाटव से तय हुई है 20 अप्रैल, 2018 को होनी है।
    - संजय एलएलबी कर रहे हैं। वह अपनी बरात धूमधाम से ससुराल में लाना चाह रहे हैं लेकिन जब उन्होंने शीतल के घरवालों से इस सम्बन्ध में बात की तो पता चला कि ठाकुर बाहुल्य गांव में दलित बिरादरी को पूरे गांव में बरात चढ़ाने की अनुमति नहीं है।
    - वधू शीतल के चाचा हरि सिंह ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया कि 20 साल पहले एक जाटव परिवार की बरात को इसी वजह से वापस लौटना पड़ा था। हमने यह बात दामाद संजय को समझाई लेकिन वह अपनी बरात धूमधाम से निकालना चाहते हैं।

    दूल्हा बोला संविधान ने हमें बराबरी का हक़ दिया है

    -हाथरस से संजय जाटव ने dainikbhaskar.com से बातचीत में बताया कि जब बरात को लेकर ऐसी बातें मुझे पता चली तो मैंने जिलाधिकारी कासगंज और सीएम के जनसुनवाई पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।
    -चूंकि निजामपुर गांव में ठाकुरों की संख्या 250 से 300 के आसपास है। जबकि जाटव सिर्फ 40 से 50 लोग हैं। इसलिए यहां दलित बिरादरी की बरात निकलने को गलत माना जाता है। जिसे लेकर हमने शिकायत की है। लेकिन पुलिस ने हमें सुरक्षा देने की बजाय बरात को शांति के लिए खतरा बता दिया है। संजय ने कहा ऐसा तब है जब संविधान ने हमें बराबरी का हक दिया है। संजय कहते हैं जब ठाकुर बिरादरी के लोग पूरे गांव में बरात निकाल सकते हैं तो दलित बिरादरी के लोग क्यों नहीं पूरे गांव में बरात निकाल सकते हैं। आज के दौर में ऐसी परंपराओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इसी मामले की वजह से हमने शादी की तैयारी भी अभी नहीं की है। हम पुलिस से सिर्फ सुरक्षा चाहते हैं।

    पुलिस ने अपनी जांच में क्या लिखा

    -कासगंज कोतवाली के पुलिस उपनिरीक्षक राजकुमार सिंह ने जांच के बाद एसपी कासगंज को लिखे पत्र में कहा है कि "गांव में गोपनीय रूप से जांच की गई तो पता चला कि आवेदक (संजय जाटव) के पक्ष के लोगों की बारात गांव में कभी नहीं चढ़ी है और आवेदक के द्वारा गांव में बारात चढ़ाए जाने से शांति व्यवस्था भंग होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता और गांव में अप्रिय घटना भी हो सकती है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली के निर्देशों का पालन करते हुए बारात चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।"


    क्या कहते हैं डीएम ?


    -डीएम कासगंज आरपी सिंह ने बताया, मामला हमारे संज्ञान में आया है। किसी को भी बरात निकालने के लिए कोई भी परमिशन की जरूरत नहीं है आवेदन करने वाले युवक संजय ने बरात को पूरे गाँव में घुमने को लेकर परमिशन मांगी है। इस मामले की जांच पुलिस से कराई गई है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार परमिशन देने से इलाके में तनाव हो सकता है।

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    पुलिस ने जांच कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बरात चढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
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