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इस फैमिली की देशभक्ति में रंगी हैं घर की दीवारें, बच्चों को मानता है GOD गिफ्ट

DainikBhaskar.com एक ऐसे शख्स के बारे में बता रहा है, जिसकी समाज से बहिष्कार के बाद भी देशभक्ति कम नहीं हुई है।

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2018, 11:51 AM IST
समाज से बहिष्कार के बाद भी शख्स गुलचमन ने देशभक्ति का जज्बा कम होने नहीं दिया। समाज से बहिष्कार के बाद भी शख्स गुलचमन ने देशभक्ति का जज्बा कम होने नहीं दिया।

आगरा(यूपी). इंडिया में बड़े ही धूम-धाम से 69वां रिपब्लिक डे मनाया जा रहा है। DainikBhaskar.com आपको एक ऐसे मुस्लिम देशभक्त के बारे में बता रहा है, जिसने समाज के बहिष्कार के बाद भी अपना जज्बा कम नहीं होने दिया। प्रेम कुछ ऐसा है कि घर की दीवारें भी तिरंगें के रंग में रंगी हैं। 11 साल से शख्स ने अन्न नहीं खाया है। निकाह भी वन्दे मातरम की धुंन पर तिरंगे को हाथ में लेकर किया था। पत्नी, बच्चे और खुद भी वो तिरंगे की ही ड्रेस पहनते हैं। ईद बकरीद से ज्यादा 15 अगस्त और 26 जनवरी को मनाते हैं। वन्दे मातरम गाने पर पिता ने निकाल दिया था घर से ...

- मामला थाना शाहगंज क्षेत्र के आजमपाड़ा का है। यहां गुलचमन शेरवानी (36) पत्नी और बेटी गुलसनम(8साल) और छोटे बेटे गुलवतन (6साल) के साथ रहते हैं।

- गुलचमन का बेटा कैंसर से पीड़ित है और इनके पास इलाज के पैसे नही हैं। पति-पत्नी दोनों मिलकर जूते का कारखाना चलाते हैं।

- समाज से बहिष्कार करने की वजह से बच्चों को किसी स्कूल में एडमिशन नहीं मिला है। वो मस्जिद भी नहीं जा सकते हैं।

- इसलिए 6 सितंबर वन्दे मातरम के राष्ट्रगीत घोषित होने के दिन दीवानी भारत माता की प्रतिमा पर नमाज पढ़ते हैं।

- गुलचमन बताते हैं, ''9 साल की उम्र में स्कूल में वन्दे मातरम गाने पर एक मौलवी के कहने पर पिता गुलबहार शेरवानी ने घर से निकाल दिया था। फिर इधर-उधर रहकर अपनी जिंदगी काटी।''

- ''पढ़ाई छूट गई तो फेरी लगाकर अपना पेट भरा। दर-दर भटकता देख रिश्तेदार सलमा उस्मानी ने अपना मुंहबोला बेटा बना लिया और अपने ही घर रख लिया था।''

आगे की स्लाइड में पढ़िए, नहीं खाया 11 साल से अन्न...

घर की दीवारें भी तिरंगें के रंग में रंगी हैं। पत्नी बच्चे और खुद वो तिरंगे की ही ड्रेस पहनते हैं। घर की दीवारें भी तिरंगें के रंग में रंगी हैं। पत्नी बच्चे और खुद वो तिरंगे की ही ड्रेस पहनते हैं।

 समाज से बहिष्कार के बाद भी नहीं कम हुआ देश प्रेम

 

- यह बताते हैं, ''6 सितंबर साल 2006 में भारत सरकार ने वन्दे मातरम की सौवीं वर्षगांठ पर सभी स्कूलों और सरकारी संस्थानों में वन्दे मातरम गीत गाने का आदेश दिया था।''

- ''जिस पर AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के भाई सुन्नी उलेमा बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शाह बदरुद्दीन कादरी ने फतवा जारी करते हुए स्कूलों में ऐसे बच्चो को हटाने की बात कही, जहां वन्दे मातरम गाया जाए।''

- ''दिल्ली शाही मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी ने वन्दे मातरम पर मुस्लिमों को एतराज की बात कही। तब 14 अगस्त 2006 को मैने अकेले ही इस फतवे का विरोध किया।''

- ''दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी समेत पूरे भारत के 10 मौलानाओं पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग रखी।''

- ''साथ ही भूख हड़ताल पर बैठ गया। शुरुआत में कुछ हिंदूवादी संसथाएं भी साथ आईं, लेकिन एक-दो दिन में ही गायब हो गए।''

- ''22 सितंबर को प्रशासन ने मामला सीबीआई में जाने की बात कहकर वहां से मुझे हटाया। इस दौरान मैंने कसम खाई की चाहे कुछ हो जाए, जब तक मुकदमा दर्ज नहीं होगा तब तक अन्न नही खाऊंगा।''

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें, बिरादरी ने कर दिया अलग... 

 

गुलचमन बताते हैं- 9 साल की उम्र में स्कूल में वन्दे मातरम गाने पर एक मौलवी के कहने पर पिता गुलबहार शेरवानी ने घर से निकाल दिया था। गुलचमन बताते हैं- 9 साल की उम्र में स्कूल में वन्दे मातरम गाने पर एक मौलवी के कहने पर पिता गुलबहार शेरवानी ने घर से निकाल दिया था।

 

11 साल से नहीं खाया अन्न-बिरादरी ने कर दिया अलग 

 

- सीबीआई ने यह कहकर मुकदमा खारिज किया कि फतवा कहा से जारी हुआ, यह पता नहीं चल पाया है।

- इसके बाद से युवक गुलचमन ने अन्न नहीं खाया है। सिर्फ दूध-जूस और सब्जियां खा रहे हैं। फिर दिल्ली के इमाम ने इन्हें काफिर करार दिया।

- आगरा के तमाम मुस्लिम समाज ने इन्हें बिरादरी से अलग कर दिया है। इस वजह से बचपन की मोहब्बत, जिससे इनकी मंगनी हो चुकी थी, वो भी कैंसिल हो गई।

- इसी दौरान पिता ने इन्हें लिखित में जायदाद से बेदखल कर दिया। इसके बाद रिश्तेदार सलमा उस्मानी ने अपनी बेटी हिना की शादी इनसे कराने का फैसला लिया।

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें, स्वॉट टीम की सुरक्षा में किया निकाह... 

21 अप्रैल 2007 को निकाह करने स्वाट टीम सुरक्षा के साथ गए थे। हाथ में तिरंगा लेकर वन्दे मातरम की धुंन बजाते हुए निकाह किया। 21 अप्रैल 2007 को निकाह करने स्वाट टीम सुरक्षा के साथ गए थे। हाथ में तिरंगा लेकर वन्दे मातरम की धुंन बजाते हुए निकाह किया।

स्वॉट टीम की निगरानी में निकाह करने पहुंचे गुलचमन

 

- निकाह की तारीख 21 अप्रैल 2007 की तय हुई। हाथ में तिरंगा लेकर वन्दे मातरम की धुंन बजाते हुए बारात लेकर पहुंचने की तैयारी की। 

- प्रशासन को आरएएफ समेत 3 जिलों का फोर्स लगानीं पड़ी। उस समय पथराव भी हुआ और कर्फ्यू जैसे हालात बन गए।

- गुलचमन के मुताबिक, ''पहले इन्हें स्वाट टीम सुरक्षा के लिए दी गई। फिर निकाह पर जाते समय कई बार हमले भी हुए थे। निकाह के 2 साल बाद बड़ी बेटी गुलसनम 15 अगस्त 2009 हुई, फिर 26 जनवरी 2012 को बेटा गुलवतन पैदा हुआ।''

- बता दें, गुलचमन बीजेपी शासन आने पर न्याय की उम्मीद लगाकर इन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को कई बार लेटर लिखा। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

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समाज से बहिष्कार के बाद भी शख्स गुलचमन ने देशभक्ति का जज्बा कम होने नहीं दिया।समाज से बहिष्कार के बाद भी शख्स गुलचमन ने देशभक्ति का जज्बा कम होने नहीं दिया।
घर की दीवारें भी तिरंगें के रंग में रंगी हैं। पत्नी बच्चे और खुद वो तिरंगे की ही ड्रेस पहनते हैं।घर की दीवारें भी तिरंगें के रंग में रंगी हैं। पत्नी बच्चे और खुद वो तिरंगे की ही ड्रेस पहनते हैं।
गुलचमन बताते हैं- 9 साल की उम्र में स्कूल में वन्दे मातरम गाने पर एक मौलवी के कहने पर पिता गुलबहार शेरवानी ने घर से निकाल दिया था।गुलचमन बताते हैं- 9 साल की उम्र में स्कूल में वन्दे मातरम गाने पर एक मौलवी के कहने पर पिता गुलबहार शेरवानी ने घर से निकाल दिया था।
21 अप्रैल 2007 को निकाह करने स्वाट टीम सुरक्षा के साथ गए थे। हाथ में तिरंगा लेकर वन्दे मातरम की धुंन बजाते हुए निकाह किया।21 अप्रैल 2007 को निकाह करने स्वाट टीम सुरक्षा के साथ गए थे। हाथ में तिरंगा लेकर वन्दे मातरम की धुंन बजाते हुए निकाह किया।
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