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हिंदू महासभा का विवादित कैलेंडर, ताज महल से लेकर कुतुब मीनर को बताया मंदिर

हिंदू महासभा के अलीगढ़ यूनिट ने ये कैलेंडर जारी किया है।

Dainik Bhaskar

Mar 19, 2018, 05:14 PM IST
ताज महल को बताया तेजो महालय मंदिर ताज महल को बताया तेजो महालय मंदिर

आगरा. हिंदू महासभा ने ऐसा कैलेंडर जारी किया है, जिस पर बवाल मचा हुआ है। दरअसल, कैलेंडर में मस्जिदों और मुगलकाल के स्मारकों के नाम बदलकर लिखे गए हैं। बता दें कि महासभा की अलीगढ़ यूनिट ने रविवार को ये कैलेंडर जारी किया है। महासभा के राष्ट्रीय सचिव पूजा शकुन पांडे का कहना है कि सभा ने देश को एक हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। क्या है कैलेंडर में?

- इस कॉन्ट्रोवर्सियल कैलेंडर में ताज महल सहित 7 मस्जिद और मुगलकाल के स्मारकों की तस्वीरें लगाई गई हैं।

- इतना ही नहीं, इन सभी स्मारकों को मंदिर बताया गया है। कैलेंडर में जौनपुर के अटला मस्जिद को 'अटाला देवी' मंदिर और बाबरी मस्जिद को राम जन्मभूमि बताया गया है।
- शकुन पांडे के मुताबिक, विदेशी आक्रमणकारियों ने देश के हिंदू धर्म स्थलों को लूटा और हिंदुओं के धार्मिक स्थलों के नाम बदलकर उन्हें मस्जिद बना दिया।
- 'अब उन्हें चाहिए कि हिंदुओं के धार्मिक स्थल उन्हें वापस कर दिए जाएं।'
- 'अगर मुसलमान दरियादिली दिखाते हैं, तो हमलोग वापस मिले धार्मिक स्थलों के नाम फिर से वास्तविक नामों पर कर देंगे।'

'माहौल बिगाड़ने की कोशिश'
- उधर, इमाम-ए-ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हिंदू महासभा के इस दावे को तथ्यहीन बताया है।
- उन्होंने कहा- 'ये लोग बेवजह बयानों से सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं।'
- साथ ही इस तरह के लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

कार्रवाई की उठी मांग

- पूरे मामले पर यूपी कांग्रेस प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल का कहना है कि मौजूदा सरकार की मंशा ही ठीक नहीं है।

- 'हम केंद्र और राज्य सरकार से मांग करते हैं कि ऐसे असामाजिक तत्वों वाले संगठन के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें।'

- 'इस तरह के कैलेंडर जारी करने से समाज में उन्माद फैल सकता है, इसलिए कार्रवाई जरूरी है।'

-वहीं, सपा के वरिष्ठ नेता एसपी पांडेय का कहना है कि यूपी सरकार पहले ही ताज को लेकर इरादे साफ कर चुकी है। इसके अलावा भाजपा के नेता भी ताज को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं।

ताज महल
कैलेंडर में नाम: तेजो महालय
ये दिया लॉजिक: आगरा को प्राचीनकाल में अंगिरा कहते थे, क्योंकि यह ऋषि अंगिरा की तपोभूमि थी। अंगिरा ऋषि भगवान शिव के उपासक थे। प्राचीन काल से ही आगरा में 5 शिव मंदिर बने थे। यहां के निवासी सदियों से इनमें जाकर दर्शन-पूजन करते थे। लेकिन कुछ सदियों से 'बालकेश्वर', 'पृथ्वीनाथ', 'मनकामेश्वर' और 'राजराजेश्वर' नाम के केवल 4 ही शिव मंदिर बचे हैं। 5वें को कब्र में बदल दिया गया। पांचवां शिव मंदिर आगरा के इष्टदेव 'नागराज अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर' ही हैं, जो 'तेजो महालय' मंदिर उर्फ ताज महल में प्रतिष्ठित थे।

ये दिया लॉजिक- प्रोफेसर एमएस भटनागर के हवाले से इसे हिंदू टावर बताया गया, जो कुतुबुद्दीन से भी सैकड़ों वर्ष पहले मौजूद था। इसका नाम कुतुबुद्दीन से जोड़ना इसलिए भी गलत है, क्योंकि इसके   आस-पास जो बस्ती है, उसे महरैली कहा जाता है। यह एक संस्कृत शब्द है, जिसे मिहिर अवेली कहते हैं। यह भी कहा गया है कि यहां प्रसिद्ध खगोल शास्त्री बारहमिहिर का निवास था, जो सम्राठ   विक्रमादित्य के दरबार में थे। इस टावर के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को समर्पित 27 नक्षत्रों के लिए मंडप था। ये दिया लॉजिक- प्रोफेसर एमएस भटनागर के हवाले से इसे हिंदू टावर बताया गया, जो कुतुबुद्दीन से भी सैकड़ों वर्ष पहले मौजूद था। इसका नाम कुतुबुद्दीन से जोड़ना इसलिए भी गलत है, क्योंकि इसके आस-पास जो बस्ती है, उसे महरैली कहा जाता है। यह एक संस्कृत शब्द है, जिसे मिहिर अवेली कहते हैं। यह भी कहा गया है कि यहां प्रसिद्ध खगोल शास्त्री बारहमिहिर का निवास था, जो सम्राठ विक्रमादित्य के दरबार में थे। इस टावर के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को समर्पित 27 नक्षत्रों के लिए मंडप था।
ये दिया लॉजिक- मुगल शासक बाबर के आदेश पर 1527 में पुजारियों को मारकर मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया गया। उसके बाद मीर बॉवाकी ने उसका नाम बाबरी मस्जिद रखा। इस्लाम को मानने वाले उसे 'मस्जिद-ए-जन्म' स्थान कहते थे। लेकिन वहां मुसलमान का आना-जाना कम ही रहता था। 1992 में ढांचे को ध्वस्त कर वहां भगवान श्रीराम की स्थापना की गई। मस्जिद के मलवे में मिले अवशेष प्रमाणित करते हैं वहां भव्य मंदिर था। ये दिया लॉजिक- मुगल शासक बाबर के आदेश पर 1527 में पुजारियों को मारकर मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया गया। उसके बाद मीर बॉवाकी ने उसका नाम बाबरी मस्जिद रखा। इस्लाम को मानने वाले उसे 'मस्जिद-ए-जन्म' स्थान कहते थे। लेकिन वहां मुसलमान का आना-जाना कम ही रहता था। 1992 में ढांचे को ध्वस्त कर वहां भगवान श्रीराम की स्थापना की गई। मस्जिद के मलवे में मिले अवशेष प्रमाणित करते हैं वहां भव्य मंदिर था।
ये दिया लॉजिक- कन्नौज के राजा विजयचंद्र ने अटलादेवी मंदिर बनवाया था। अटलादेवी यानी भाग्य को बदलने वाली देवी माना जाता है। कठोर से कठोरतम भाग्य भी देवी के शरण में आते ही बदल जाते थे। इब्राहीम ने इस मंदिर की जगह पर मंदिर के पिलर के ऊपर ही गुम्बद बनवाकर अजमती नामक संत के सम्मान में अजमली मस्जिद बना दी। मंदिर के स्तम्भों पर कई तिथियां लिखी हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था। ये दिया लॉजिक- कन्नौज के राजा विजयचंद्र ने अटलादेवी मंदिर बनवाया था। अटलादेवी यानी भाग्य को बदलने वाली देवी माना जाता है। कठोर से कठोरतम भाग्य भी देवी के शरण में आते ही बदल जाते थे। इब्राहीम ने इस मंदिर की जगह पर मंदिर के पिलर के ऊपर ही गुम्बद बनवाकर अजमती नामक संत के सम्मान में अजमली मस्जिद बना दी। मंदिर के स्तम्भों पर कई तिथियां लिखी हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था।
ये दिया लॉजिक- मुसलमानों का सबसे बड़े तीर्थ मक्का, मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था, जो खंडित अवस्था में आज भी है। हज के वक्त संगे अस्वद कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके लिए लेखक पीएन ओक की किताब 'वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास' का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि गहन रिसर्च से पता चला कि वहां भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है। ऐसे में दोनों ही इलाकों में बहुत से विद्वान मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं। ये दिया लॉजिक- मुसलमानों का सबसे बड़े तीर्थ मक्का, मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था, जो खंडित अवस्था में आज भी है। हज के वक्त संगे अस्वद कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके लिए लेखक पीएन ओक की किताब 'वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास' का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि गहन रिसर्च से पता चला कि वहां भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है। ऐसे में दोनों ही इलाकों में बहुत से विद्वान मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं।
ये दिया लॉजिक- राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृति अध्ययन का केंद्र एवं सरस्वती का विशाल मंदिर था। 20वीं सदी के शुरुआती दिनों में भोजशाला को कामिल मौला मस्जिद माना जाने लगा। इसके पहले के इतिहास में यहां मंदिर होने का प्रमाण मिलता है। भोजशाला मध्यप्रदेश के धार में है। ये दिया लॉजिक- राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृति अध्ययन का केंद्र एवं सरस्वती का विशाल मंदिर था। 20वीं सदी के शुरुआती दिनों में भोजशाला को कामिल मौला मस्जिद माना जाने लगा। इसके पहले के इतिहास में यहां मंदिर होने का प्रमाण मिलता है। भोजशाला मध्यप्रदेश के धार में है।
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ताज महल को बताया तेजो महालय मंदिरताज महल को बताया तेजो महालय मंदिर
ये दिया लॉजिक- प्रोफेसर एमएस भटनागर के हवाले से इसे हिंदू टावर बताया गया, जो कुतुबुद्दीन से भी सैकड़ों वर्ष पहले मौजूद था। इसका नाम कुतुबुद्दीन से जोड़ना इसलिए भी गलत है, क्योंकि इसके   आस-पास जो बस्ती है, उसे महरैली कहा जाता है। यह एक संस्कृत शब्द है, जिसे मिहिर अवेली कहते हैं। यह भी कहा गया है कि यहां प्रसिद्ध खगोल शास्त्री बारहमिहिर का निवास था, जो सम्राठ   विक्रमादित्य के दरबार में थे। इस टावर के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को समर्पित 27 नक्षत्रों के लिए मंडप था।ये दिया लॉजिक- प्रोफेसर एमएस भटनागर के हवाले से इसे हिंदू टावर बताया गया, जो कुतुबुद्दीन से भी सैकड़ों वर्ष पहले मौजूद था। इसका नाम कुतुबुद्दीन से जोड़ना इसलिए भी गलत है, क्योंकि इसके आस-पास जो बस्ती है, उसे महरैली कहा जाता है। यह एक संस्कृत शब्द है, जिसे मिहिर अवेली कहते हैं। यह भी कहा गया है कि यहां प्रसिद्ध खगोल शास्त्री बारहमिहिर का निवास था, जो सम्राठ विक्रमादित्य के दरबार में थे। इस टावर के चारों ओर हिंदू राशि चक्र को समर्पित 27 नक्षत्रों के लिए मंडप था।
ये दिया लॉजिक- मुगल शासक बाबर के आदेश पर 1527 में पुजारियों को मारकर मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया गया। उसके बाद मीर बॉवाकी ने उसका नाम बाबरी मस्जिद रखा। इस्लाम को मानने वाले उसे 'मस्जिद-ए-जन्म' स्थान कहते थे। लेकिन वहां मुसलमान का आना-जाना कम ही रहता था। 1992 में ढांचे को ध्वस्त कर वहां भगवान श्रीराम की स्थापना की गई। मस्जिद के मलवे में मिले अवशेष प्रमाणित करते हैं वहां भव्य मंदिर था।ये दिया लॉजिक- मुगल शासक बाबर के आदेश पर 1527 में पुजारियों को मारकर मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया गया। उसके बाद मीर बॉवाकी ने उसका नाम बाबरी मस्जिद रखा। इस्लाम को मानने वाले उसे 'मस्जिद-ए-जन्म' स्थान कहते थे। लेकिन वहां मुसलमान का आना-जाना कम ही रहता था। 1992 में ढांचे को ध्वस्त कर वहां भगवान श्रीराम की स्थापना की गई। मस्जिद के मलवे में मिले अवशेष प्रमाणित करते हैं वहां भव्य मंदिर था।
ये दिया लॉजिक- कन्नौज के राजा विजयचंद्र ने अटलादेवी मंदिर बनवाया था। अटलादेवी यानी भाग्य को बदलने वाली देवी माना जाता है। कठोर से कठोरतम भाग्य भी देवी के शरण में आते ही बदल जाते थे। इब्राहीम ने इस मंदिर की जगह पर मंदिर के पिलर के ऊपर ही गुम्बद बनवाकर अजमती नामक संत के सम्मान में अजमली मस्जिद बना दी। मंदिर के स्तम्भों पर कई तिथियां लिखी हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था।ये दिया लॉजिक- कन्नौज के राजा विजयचंद्र ने अटलादेवी मंदिर बनवाया था। अटलादेवी यानी भाग्य को बदलने वाली देवी माना जाता है। कठोर से कठोरतम भाग्य भी देवी के शरण में आते ही बदल जाते थे। इब्राहीम ने इस मंदिर की जगह पर मंदिर के पिलर के ऊपर ही गुम्बद बनवाकर अजमती नामक संत के सम्मान में अजमली मस्जिद बना दी। मंदिर के स्तम्भों पर कई तिथियां लिखी हुई हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाया गया था।
ये दिया लॉजिक- मुसलमानों का सबसे बड़े तीर्थ मक्का, मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था, जो खंडित अवस्था में आज भी है। हज के वक्त संगे अस्वद कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके लिए लेखक पीएन ओक की किताब 'वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास' का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि गहन रिसर्च से पता चला कि वहां भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है। ऐसे में दोनों ही इलाकों में बहुत से विद्वान मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं।ये दिया लॉजिक- मुसलमानों का सबसे बड़े तीर्थ मक्का, मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था, जो खंडित अवस्था में आज भी है। हज के वक्त संगे अस्वद कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके लिए लेखक पीएन ओक की किताब 'वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास' का हवाला दिया गया है। कहा गया है कि गहन रिसर्च से पता चला कि वहां भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है। ऐसे में दोनों ही इलाकों में बहुत से विद्वान मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं।
ये दिया लॉजिक- राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृति अध्ययन का केंद्र एवं सरस्वती का विशाल मंदिर था। 20वीं सदी के शुरुआती दिनों में भोजशाला को कामिल मौला मस्जिद माना जाने लगा। इसके पहले के इतिहास में यहां मंदिर होने का प्रमाण मिलता है। भोजशाला मध्यप्रदेश के धार में है।ये दिया लॉजिक- राजा भोज द्वारा निर्मित संस्कृति अध्ययन का केंद्र एवं सरस्वती का विशाल मंदिर था। 20वीं सदी के शुरुआती दिनों में भोजशाला को कामिल मौला मस्जिद माना जाने लगा। इसके पहले के इतिहास में यहां मंदिर होने का प्रमाण मिलता है। भोजशाला मध्यप्रदेश के धार में है।
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