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बांके बिहारी मंदिर में ऐसे उड़ा गुलाल, 45 दिन चलेगी ये होली

बांके बिहारी मंदिर में गुलाल की होली शुरू हो गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 22, 2018, 12:46 PM IST

    • श्रीबांके बिहारी मंदिर में शुरू हुई होली।

      आगरा (यूपी). बसंत पंचमी से भारत के सबसे प्रसिद्ध उत्सव ब्रज की होली का आगाज हो गया। सोमवार को जगह-जगह होली के पेड़ लगना शुरू हो गए हैं और ब्रज के मंदिरों में गुलाल की होली शुरू हो गई है। वृन्दावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मन्दिर में जमकर गुलाल उड़ाया गया और लोगो ने होली का आनन्द लिया। इस बार बरसाना में स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विश्राम घाट पर हेमा मालिनी होली खेलने आने वाली हैं। अभी होली में 40 दिन बचें हैं।

      45 दिन चलती है ये होली...

      - वैसे तो दुनिया के कोने-कोने में हिन्दू समाज के लोग आज के दिन बसंत-पंचमी का त्यौहार मनाते है, लेकिन बृजभूमि में इस त्यौहार का अपना अलग ही महत्त्व है।
      - धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बृज में आज ही के दिन से 45 दिन के होली के पर्व की शुरुआत हो जाती है और इस दिन यहां के सभी प्रमुख मंदिरों में जमकर गुलाल उड़ाया जाता है। वृन्दावन के विश्वप्रसिद्ध बांकेबिहारी मंदिर में भी बसंत-पंचमी की इस होली का नजारा बेहद मनभावन होता है।

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      श्रद्धालुओं ने जमकर उड़ाया गुलाल।

      पहले दिन होती है खास आरती


      - होली शुरू होने में भले ही अभी 40 दिन का वक़्त हो, लेकिन बृज में अभी से ही होली की शुरुआत हो चुकी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बृज में बसंत ऋतू के आगमन के साथ ही बसंत-पंचमी के दिन से होली की शुरुआत हो जाती है।
      - परंपरा के अनुसार पहले दिन मंदिर में श्रृंगार आरती के बाद सबसे पहले मंदिर के सेवायत पुजारी भगवान बांकेबिहारी को गुलाल का टीका लगाकर होली के इस पर्व की विधिवत शुरुआत करते है। उसके बाद इस पल के साक्षी बने मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालुओं पर सेवायत पुजारियों द्वारा जमकर बसंती गुलाल उड़ाया जाता है।

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      ये होली 45 दिन तक चलेगी।

      पुजारी ने क्या कहा


      - श्रीबांकेबिहारी मंदिर सेवायत पुजारी आशीषकृष्ण गोस्वामी ने कहा, ''होली की विधिवत शुरुआत होने के कुछ देर बाद ही प्रांगण में माहौल बेहद खुशनुमा हो जाता है और यहां सिर्फ गुलाल ही गुलाल नजर आता है।''
      - ''प्रांगण में मौजूद श्रद्धालू भी भगवान बांकेबिहारी के साथ होली खेलने के इस पल का खूब आनंद उठाते है और एक-दूसरे पर भी जमकर गुलाल लगाते है। बसंत-पंचमी के दिन से ही मंदिरों में होली खेलने की शुरुआत होने के साथ ही बृज में होली का डांढ़ा गाढ़ने की भी परंपरा रही है।''
      - ''आज ही के दिन यहां जगह-जगह पूजा-अर्चना करने के साथ होलिका बनाने की भी शुरूआत हो जाती है।''

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