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अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंचा होगा ये मंदिर, कुतुब मीनार जितनी गहरी है नींव

वृंदावन में बन रहे चंद्रोदय मंदिर में सेलिब्रेट की गई होली और गौरा पूर्णिमा।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 02, 2018, 07:00 PM IST

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    वृंदावन. यहां बन रहे वर्ल्ड के सबसे ऊंचे मंदिर चंद्रोदय पर होली और श्रीगौरा पूर्णिमा के मौके पर भव्य आयोजन हुआ। इस दिन को चैतन्य महाप्रभु के अपीयरेंस डे के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है। इस मौके पर DainikBhaskar.com अपने आप में अनोखे चंद्रोदय मंदिर से जुड़ी खास बातें अपने रीडर्स को बता रहा है।

    70 मंजिला होगा यह मंदिर

    - यह मंदिर सहिष्‍णुता, धार्मिक सद्भाव, आधुनिकता, कला, इतिहास और संस्‍कृति को समेटे है। चंद्रोदय मंदिर मुकेश अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंचा और सुविधाओं वाला बन रहा है।
    - हालांकि यह मंदिर अभी अंडर-कंस्ट्रक्शन है, लेकिन होली पर हर साल यहां सत्‍संग होता है। चंद्रोदय मंदिर के प्रोजेक्‍ट डायरेक्‍टर सुबयक्‍ता नरसिंम्‍हा दास ने मंदिर से जुड़े रोचक फैक्‍ट्स शेयर किए।
    - मंदिर की ऊंचाई 210 मीटर (70 मंजिल) होगी। जबकि मुकेश अंबानी का एंटीलिया 27 मंजिल का है।
    - चंद्रोदय मंदिर परिसर में 50 एकड़ जमीन पर कई हेलीपैड बनेंगे। (मुकेश अंबानी की बिल्डिंग एटीलिया में तीन हेलीपैड हैं)
    - पूरे मंदिर परिसर की क्षमता व्‍यस्‍त समय में पांच लाख लोगों की होगी।
    - पूरी बिल्डिंग में 511 पिलर होंगे। इन पर पूरी बिल्डिंग का वजन 5 लाख टन होगा। जबकि ये पिलर नौ लाख टन वजन सह सकता है।
    - टॉप फ्लोर पर व्‍यूइंग गैलरी होगी, यहां पर टेलिस्‍कोप लगा होगा, इससे जन्‍मस्‍थान, गोवर्धन पर्वत आदि ब्रज के धार्मिक स्‍थल देख सकेंगे।
    - पिरामिड का विकसिक रूप होगा चंद्रोदय मंदिर।
    - निर्माण कार्य में सभी धर्म के लोगों की बराबर भागिदारी है। इसके लीड आर्किटेक्‍ट सिख धर्म से जुड़े जेजे सिंह हैं। जबकि अमेरिकन कंपनी के स्‍ट्रक्‍चलर आर्किटेक्‍ट मुस्लिम हैं। लिफ्ट डिजाइन करने वाले ईसाई हैं।
    - 200 साल में पहली बार मंदिर का आर्किटेक बदला हुआ दिखेगा। इतनी अवधि में अभी तक मंदिर आधुनिक तरीके से नहीं बनाया गया है।

    आगे जानें इस वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले मंदिर के प्रॉजेक्ट डीटेल्स...

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    700 करोड़ से ज्‍यादा होंगे खर्च

    - चंद्रोदय मंदिर के मुख्‍य भवन के निर्माण में पांच सौ करोड़ रुपए खर्च होंगे। 150 करोड़ रुपए के अंडरग्राउंड पार्किंग बनेंगे। सड़क निर्माण में 50 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
    - इसके अलावा 12 तरह के वन व कृत्र‍िम यमुना का खर्च अलग है।

    कुतुब मीनार के लगभग बराबर होगी नींव

    - मंदिर 55 मीटर जमीन में गहरी होगी और इसका बेस 12 मीटर ऊंचा होगा। इसके बाद इमारत शुरू होगी। जबकि कुतंब मीनार की लंबाई 73 मीटर है।
    - दुबई के बुर्ज खलीफा इमारत की गहराई मात्र 25 मीटर है। वहां पर इतनी ही गहराई पर पत्‍थर मिल जाते हैं।
    - लेकिन मथुरा में 75 मीटर गहराई के बाद भी पत्‍थर नहीं मिले। यहां पर रेत और मिट्टी के लेयर मिले। इस वजह से चंद्रोदय मंदिर की नींव को 55 मीटर गहरा बनाने का फैसला किया गया।

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    500 साल तक कुछ नहीं बिगड़ेगा मंदिर में

    - मंदिर के लिए प्रो. एमए शेट्टी की निगरानी में स्‍पेशल कांक्रीट तैयार किया गया है। इसमें मात्र 25 प्रतिशत सीमेंट और 65 प्रतिशत ग्राउंड ग्रैनिलेटर ब्‍लास्‍ट का इस्‍तेमाल किया जाएगा।
    - बिल्डिंग की उम्र 500 साल तय की गई है। इसके कांक्रीट व सरिया को इतने साल तक नुकसान नहीं होगा।
    - सरिया को अहमदाबाद में हॉट डिप जिंक कोटिंग करवाई जा रही है। ताकि मिट्टी व भूजल में मौजूद क्‍लोरीन इसे नुकसान न पहुंचा सके।

    एक सेकंड में दो फ्लोर स्‍पीड से चलेगा लिफ्ट

    - लिफ्ट हाई स्‍पीड तैयार की जा रही है। यह एक सेकेंड में 8 मीटर (दो मंजिल) की रफ्तार से चलेगा।
    - 170 किलोमीटर की रफ्तार का तूफान झेलने के दौरान बिल्डिंग एक मीटर झुक जाने पर भी लिफ्ट सीधी चलती रहेगी। गति और दिशा में परिवर्तन नहीं होगा।

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    12 वन व कृत्रिम यमुना बहेगी

    - 18 एकड़ में 12 वनों के प्रतिरूप होंगे और कृत्रि‍म यमुना बनेगी। इसमें लोग वोटिंग और कृष्‍ण की लीलाओं के बारे में जानकारी ले सकेंगे। लोगों को वास्‍तविक वनों की अनुभूति होगी।
    - 12 वनों में तालवन (खजूर के वन), भांदिवन (वट वृक्ष वन), वृंदावन (तुलसी का वन), निधिवन आदि।
    - मुख्‍य चंद्रोदय मंदिर के अंदर तीन मंदिर होंगे। पहला मंदिर चैतन्‍य महाप्रभु का होगा। दूसरा मंदिर राधाकृष्‍ण और तीसरा मंदिर कृष्‍ण व बलराम का होगा।
    - ये मंदिर जमीन से 12 मीटर ऊंचाई (चार तल के बराबर की ऊंचाई) होंगे।
    - सामान्‍य दिनों में इन तीन मंदिर में की कैपेसिटी 15 हजार लोगों की होगी। जबकि शनिवार व रविवार को ज्‍यादा 35 हजार लोग भी यहां पर एक साथ रह सकते हैं।

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    पार्किंग में खड़े हो सकेंगे 35 सौ वाहन

    - 35 सौ वाहनों की पार्किंग कैपेसिटी होगी। जबकि मुकेश अंबानी के एंटीलिया में मात्र 168 कार पार्क हो सकती हैं।
    - मंदिर परिसर में 10 एकड़ में अंडरग्राउंड दो तल की पार्किंग बिल्डिंग होगी। जबकि मुकेश अंबानी के एंटीलिया में छह मंजिल तक सिर्फ पार्किंग है।
    - मंदिर परिसर में भविष्‍य की जरूरत को ध्‍यान में रखते हुए एनर्जी सेविंग बैटरी कार के लिए अलग पार्किंग होगी। जिसमें पार्क होने वाली कार को चार्ज किया जा सकेगा।
    - पहली बार धार्मिक रूप से ग्रीन बिल्डिंग होगी।

    पिरामिड का विकसित रूप होगा चंद्रोदय मंदिर

    - बिल्डिंग का स्‍ट्रक्‍चरल डिजाइन अमेरिकी कंपनी थ्रॉमटन टोमैसिटी ने किया। इस कंपनी ने पेट्रोनेट टावर, क्रिस्‍लर टावर सहित कई गगनचुंबी इमारतों का डिजाइन किया है। इसी कंपनी अरब देश जेद्दा में बन रहे एक किलोमीटर ऊंची बिल्डिंग का भी स्‍ट्रक्‍चरल डिजाइन कियाहै।

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    कालिया नाग के निवास स्‍थान (सुनरक क्षेत्र) पर बन रहा मंदिर

    - जिस जगह मंदिर बन रहा है वह सुनरक क्षेत्र के पास है, पांच हजार साल पहले यहां पर कालिया नाग का वास था। उसके विष की वजह से मीलों दूर तक मिट्टी बंजर हो गई थी। आज भी सरसो के अलावा कोई फसल नहीं होती है। जल प्रदूषित है। पेड़ कम हैं।
    - इसके बावजूद यहां पर वैज्ञानिक तरीके से वन लगाए जाएंगे।
    - मंदिर के नीचे इंडोर कृष्‍ण लीला पार्क होगा। यहां पर ब्रज का सांस्‍कृतिक कार्यक्रम, इंडियन फिलॉसफी पर रिसर्च, लाइब्रेरी आदि होंगे।
    - इस कृष्‍ण लीला पार्क में 4डी तरीके से भगवान कृष्‍ण के लीलाओं के बारे में बताया जाएगा, इससे यहां मौजूद लोगों को महसूस होगा कि कृष्‍ण की लीलाएं उनके आस-पास ही हो रही है।
    - इसी पार्क में सारे लोकों के दर्शन होंगे। इनमें भूलोक, स्‍वर्गलोक, वैकुंठ लोक, गोलोक धाम का काल्‍पनिक स्‍वरूप देखने को मिलेगा।
    - चंद्रोदय मंदिर बिल्डिंग में एक हजार लोगों की कैपेसिटी का ऑडिटोरियम होगा।

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    पिलर, छत और शीशे होंगे

    - किसी भी मंदिर में अब तक ग्‍लास का इस्‍तेमाल नहीं हुआ है। चं‍द्रोदय ऐसा पहला मंदिर होगा, जिसमें बड़े पैमाने पर ग्‍लास का प्रयोग किया जाएगा।
    - ये ग्‍लास गर्मी को मंदिर के अंदर नहीं आने देंगे।
    - भूकंप या तूफान के दौरान ग्‍लास नहीं टूटेंगे। ग्‍लास के बीच में बेहद छोटी लेयर होगी। यहां से बिल्डिंग का मामूली झुकाव तो होगा, लेकिन ग्‍लास नहीं झुकेगा।

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    170 किलोमीटर प्रतिघंटा का तूफान झेल सकेगा मंदिर

    - चंद्रोदय मंदिर का विंड प्रेशर का विश्‍लेषण आरडब्‍ल्‍यूएडीए कंपनी ने किया है। इसी कंपनी ने दुबई के बुर्ज खलीफा प्रोजेक्‍ट पर भी काम किया है।
    - पिछले 500 साल का हवा के दबाव के आंकड़े से यह एनालेसिस किया गया है।
    - आंध्र प्रदेश में 110 किलोमीटर की रफ्तार के तूफान ने तबाही मचा दी थी। चंद्रोदय मंदिर 170 किलोमीटर की रफ्तार का तूफान झेल सकेगा। इतनी रफ्तार पर पूरी बिल्डिंग अधिकतम एक मीटर झुकेगी।

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    आठ रिक्‍टर स्‍केल से ज्‍यादा का भूकंप सह सकता है मंदिर

    - आईआईटी रुड़की ने मंदिर की जगह पर अधिकतम भूकंप आने की संभावना का रिसर्च किया है। भूकंप के लिहाज से यह क्षेत्र जोन 4 में आता है।
    - इस मंदिर को आठ रिक्‍टर स्‍केल से ज्‍यादा भूकंप सहने की क्षमता का बनाया गया है।

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