--Advertisement--

1 परंपरा और... आग में कूद जाता है ये शख्स, ऐसे होती है 40 दिन की तैयारी

आज या कल नहीं, सतयुग से चली आ रही है यह परंपरा, धर्म की शक्ति दिखाने उठाते हैं ये खतरा।

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 08:41 PM IST
How panda babulal prepares for jumping in holika dehan fire

मथुरा. यहां छाता तहसील के गांव फालेन की होली वर्ल्ड फेमस है। होलिका दहन के मौके पर यहां बने प्रहल्लाद मंदिर के पंडित धधकती आग की लपटों के बीच नंगे पैर चलते हैं। उनका कहना है कि यह प्रथा सत् युग से चली आ रही है। कलयुग में धर्म की शक्ति दिखाने के लिए वे इस खतरनाक परंपरा को नियमपूर्वक निभा रहे हैं। DainikBhaskar.com ने बाबूलाल पंडा से बात कर उनकी तैयारियों के बारे में जाना।

क्यों कूदते हैं आग में?

- बाबूलाल फालेन गांव में बने प्रहल्लाद मंदिर के पंडा हैं। उन्होंने बताया, "मथुरा की नगरी श्रीकृष्ण की लीलाओं का साक्षी रहा है। यहीं भक्त प्रहल्लाद अपनी बुआ होलिका के साथ अग्नि में बैठे थे और ईश्वर की कृपा से जिंदा बाहर आए थे। लगभग 500 साल पहले यहां आकर बसे एक साधु को सपना आया था कि हमारे गांव में विष्णु भगवान के अवतार नरसिंह भगवान और उनके भक्त प्रहल्लाद की मूर्ति है। उन्होंने हमारे पूर्वज कौशिक परिवार को खुदाई कर मूर्ति निकालने का आदेश दिया था।"
- "कौशिक परिवार ने साधु के आदेश पर खुदाई की और वहां से नरसिंह भगवान और प्रहल्लाद की मूर्ति निकली। इस बात से खुश हुए साधु ने कौशिक परिवार को आशीर्वाद दिया था कि उन पर कभी आग का असर नहीं होगा। उस जमाने से ही हमारे पूर्वज इस मंदिर के सेवक रहे हैं। हमारे परिवार की हर पीढ़ी का कोई न कोई पंडा आग में कूदने की प्रथा को निभाता है। यह धर्म की शक्ति, भक्त प्रहल्लाद की शक्ति प्रदर्शित करने का एक तरीका है।"
- "हमारा 40 सदस्यों का परिवार है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर निर्णय लेते हैं कि इस साल कौन होलिका दहन वाली परंपरा निभाएगा। मैं 2016 से इसे निभा रहा हूं। यह मेरा तीसरा साल है।"

आगे जानें कैसे होती है नंगे पैर धधकती आग के बीच से चलने की तैयारी

X
How panda babulal prepares for jumping in holika dehan fire
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..