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20 गार्डों के साथ बाथरूम जाते हैं इस देश के PM

इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (बीबी) ताजमहल का दीदार करने के लिए मंगलवार को आगरा पहुंचें हैं।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 01:44 PM IST
इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा के साथ। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा के साथ।

आगरा. इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (बीबी) ताज महल का दीदार करने के लिए मंगलवार को आगरा पहुंचे। सीएम योगी ने उनका वेलकम किया। नेतन्याहू के दौरे को लेकर आगरा की सुरक्षा एजेंसियां एक्टिव हैं। dainikbhaskar.com आपको पीएम बेंजामिन की सिक्युरिटी के बारे में बताने जा रहा है। ये बाथरूम भी 20 गार्ड के साथ जाते हैं।

जब 20 गार्डों के साथ बाथरूम गए थे 'बीबी'
- इजरायल के एक न्यूज वेबसाइट के अनुसार, सितंबर, 2016 में नेतन्याहू (बीबी) अपनी पत्नी सारा के साथ स्वेनकीस्ट सिटी के हैरी किपरानी रेस्टोरेंट में डिनर करने गए थे।
- उनके पहुंचने से पहले 20 सिक्युरिटी गार्ड रेस्टोरेंट में तैनात हो गए थे। जबकि बीबी जब पहुंचे तो उनके साथ 20 एजेंट मौजूद थे।
- खाने के बीच पीएम ने बाथरूम ब्रेक लिया। सिक्युरिटी को देखते हुए 20 गार्ड उनके साथ बाथरूम तक गए, जिसमें कुछ बीबी के साथ अंदर गए। बाकी बाहर तैनात थे।
- इस दौरान किसी को भी बाथरूम के अंदर एंट्री नहीं दी गई।

कैसा है इजरायल का डि‍फेंस
- इजरायल का डिफेंस बजट 1.15 लाख करोड़ है। यहां की एयरफोर्स अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथे नंबर पर है। यह दुनिया को इकलौता देश है जो एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम से लैस है।
- इजरायल उन 9 देशों के क्लब में हैं, जिनका अपना सैटेलाइट सिस्टम है। वो इसे किसी के साथ शेयर नहीं करता।

क्या है साइन बेट
- साइन बेट इजरायल के पीएम की सुरक्षा में तैनात रहने वाली एजेंसी है।
- यह इजरायल की तीन इंटेलिजेंस आर्गेनाइजेशन- मिलिट्री इंटेलिजेंस (अमन) और मोसाद में से एक है।
- पूर्व मोसाद एजेंट गेड शिमरॉन का मानना है कि शिन बेट और यूएस सेक्रेट सर्विस में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। बता दें, यूएस सेक्रेट सर्विस के गार्ड राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें इजरायल के उन खतरनाक हथियारों के बारे में, जिनसे खौफ खाते हैं देश...

इजरायल ने अमेरिकी की मदद से एरो-3 सिस्टम बनाया है। इसकी मदद से देश की तरफ आने वाली दुश्मनों की मिसाइलों और रॉकेटों को स्पेस से ही निशाना बनाकर नष्ट किया सकता है। एरो-3 बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड का अपग्रेडेड वर्जन है। इजरायल का ये डिफेंस सिस्टम पूरी दुनिया में सबसे ताकतवार माना जाता है। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और अमेरिकी फर्म बोइंग को-ऑपरेशन द्वारा बनाए गए इस डिफेंस सिस्टम इजरायली एयरफोर्स को 2004 को सौंपा गया था। इससे निकलने वाली मिसाइल की रफ्तार प्रति एक मिनट में ढाई किमी है। इससे निकलने वाली मिसाइलें हवा में 50 किमी की दूरी तक किसी भी उड़ती चीज को गिरा सकती हैं। इजरायल के रक्षा मंत्रालय के के मुताबिक ‘एरो-3’ दरअसल ‘एरो-2’ का अपग्रेडेड वर्जन है। एरो-2 साल 2000 से ऑपरेशन में है। एरो-3 के जरिए इजरायल पर मिसाइल हमले की आशंका को कम हो गई है।

बराक-8 मिसाइल जमीन से हवा में मार करने वाली अचूक मिसाइल है। इसका पहला टेस्ट 1996 में किया गया और 1998 में इसे एयरफोर्स में शामिल कर लिया गया। करीब 4 हजार किमी की रेंज वाली इस मिसाइल की दुनिया भर में डिमांड है। इजरायल ने इसे अपने कुछ ही भरोसेमंद देशों के बेचा है। इसमें भारत का नाम भी शामिल है। 2014 में इजरायल और भारत के बीच इस मिसाइल को लेकर 1000 करोड़ रुपए का सौदा हुआ था।

इस मिसाइल का पहला टेस्ट 1980 में किया गया। कई सफल टेस्ट के बाद 1985 में इसे एयरफोर्स को सौंपा गया। यह देखने में पतली लगती है, लेकिन इसका निशाना अचूक है। इसी के चलते इजरायल में लड़ाकू विमानों में इस मिसाइल का इस्तेमाल बहुत किया जाता है। हवा में विरोधियों को मुश्किल में डालने का काम डर्बी मिसाइल ही करती है। हवा से हवा में तकरीबन 100 किमी तक मार करने वाली यह दुनिया की सबसे बेहतरीन मिसाइलों में से एक है।

ईएलएम-2238 स्टार को दुनिया का सबसे आधुनिक राडार माना जाता है। इसकी खासियत है यह आसमान और जमीन पर दुश्मनों के हथियार को 250 किमी दूर से पकड़ सकता है। इसकी पकड़ में तुरंत आ जाते हैं। दुनिया में सबसे तेज राडारों में से एक माना जाता है। इजरायल अपने कई भरोसेमंद देशों को ये राडार बेच चुका है।

अपनी हवाई क्षमता को मजबूत करने के लिए इजरायल ने सबसे आधुनिक फाइटर जेट ‘एफ-15ए/सी फॉल्कन’ 1976 में एयरफोर्स को सौंपा था। साल 1982 के लेबनान वॉर में इजरायल ने इसी जेट की मदद से लेबनान के 78 फाइटर प्लेन्स आसमान में उड़ा दिए थे, जबकि इसमें एक भी इजरायली जेट को नुकसान नहीं पहुंंचा था। तकरीबन डेढ़ हजार किमी की स्पीड से उड़ान भरने वाले इस जेट की रेंज 3450 किमी तक थी। अब इसके कई नए वर्जन लॉन्च किए जा चुके हैं। 

इजरायल का यह ड्रोन दुनिया का सबसे खतरनाक ड्रोन है। इसे सबसे पहले 1962 में डिजाइन किया गया था, लेकिन इजरायली आर्मी ने अब इस इतना आधुनिक बना लिया है कि यह ड्रोन न होकर फाइटर प्लेन की शक्ल ले चुका है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अमेरिका जैसे देश ने भी इजरायल से ये ड्रोन खरीदे हैं। इस ड्रोन का इस्तेमाल मिसाइल लॉन्चर के रूप में भी किया जाता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये रडार की पकड़ में नहीं आता। इजरायल का दावा है कि यह इजरायल से उड़ान भरकर ईरान में हमला कर वापस आ सकता है। इसका सबसे पहले इस्तेमाल 1969 में इजिप्ट के खिलाफ और 1982 में लेबनॉन के खिलाफ किया गया था। यह ड्रोन इन दोनों देशों की मिलिट्री लोकेशन ट्रैक पर सकुशल वापस भी लौट आया था। इससे मिली जानकारी के बाद ही इजरायली एयरफोर्स ने इजिप्त और लेबनान में तबाही मचा दी थी।

इजिप्ट और सीरिया के साथ 1960 और 1970 में युद्ध लड़ने के बाद इजरायल की सेना ने यह आधुनिक टैंक बनाया था। इन 1980 में इसे आर्मी को सौंप दिया गया था। इजरायल ने इन टैंक की तादात का खुलासा नहीं किया है। लेकिन, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनकी संख्या हजारों में है। इजरायल अब भी इसमें लगातार बदलाव कर रहा है। हर तरह के रास्तों पर 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकने वाले यह टैंक इजरायल का प्रमुख हथियार है। मेरकावा रेगिस्तानी और मैदानी इलाकों के अलावा ऊबड़-खाबड़ वाले इलाकों में भी आसानी से दौड़ सकता है। यह टैंक चारों दिशाओं में हमला कर सकता है। लगभग 65 टन वजनी इस टैंक की खास ताकत 120 एमएम की तोप है, जो किसी भी लक्ष्य को भेद सकती है। इस टैंक पर एक साथ 6 लोग लड़ाई के मैदान में जा सकते हैं। टैंक में 1500 हॉर्सपॉवर का टबरेजेट डीजल इंजन हैं, जो टैंक को स्पीड देता है। इंजन इसके अगले हिस्से में लगा है, जो क्रू मेंबर्स को अतिरिक्त सुरक्षा देता है। इन टैंकों में बाद में लगाए गया एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम विरोधी की मिसाइलों को खत्म करने में सक्षम है। मेरकावा-1 से लेकर इजरायल अब तक इसके चार वर्जन यानी की ‘मेरकावा-4’ बना चुका है। टैंकों की संख्या 2000 के करीब है।

छोटी सी दिखने वाली यह बोट किसी आम बोट की तरह ही नजर आती है, जबकि यह आर्मी की सबसे खतरनाक बोट है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह आर्मी बोट नजर नहीं आती। इससे इजरायली नैवी समुद्र में पॅट्रोलिंग करती है। इसके अंदर 11 क्रू मेंबर्स होते हैं, जो अलग-अलग दिशाओं में लैंस से दुश्मनों पर नजर रखते हैं। यह मशीनगन के अलावा मिसाइल व रॉकेट लॉन्चर से भी लैस है। जरूरत पड़ने पर इससे दुश्मनों के वॉरशिप को भी निशाना बनाया जा सकता है। इसकी स्पीड 50 नॉटस (तकरीबन 92 किमी) है। स्पीड के अलावा तेजी से टर्न लेने के चलते इस पर आसानी से निशाना नहीं साधा जा सकता। यह सेंसर और राडार से भी लैस है।

भले ही आज दुनिया भर में रोबोट टैंक और रोबोट आर्मी की फौज तैयार करने की होड़ मची हुई है, लेकिन इजरायल ने इस दिशा में सबसे पहले ही कदम बढ़ा दिए थे। इसमें इजरायल का ‘यूजीवीएस रोबोट टैंक’ का नाम सबसे ऊपर आता है। इजरायल की एयरोस्पेस कंपनी ने इसका जुलाई 2014 में सफल टेस्ट किया। इसके बाद इसे आर्मी को सौंप दिया गया। हालांकि, इनकी तादात का खुलासा अभी तक नहीं किया गया है और न ही इस बात का कि इनकी तैनाती कहां की गई है। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनकी तैनानी गाजा, इजिप्त, जॉर्डन, सीरिया और लेबनॉन की बॉर्डर पर की गई है। आकार में ये इतने छोटे हैं कि ऊंचाई से दिखाई नहीं देते। लैंस और खतरनाक मशीनगन से लेकर यह छोटी-छोटी मिसाइलों से लैस है, जिससे दुश्मनों के टैंक भी उड़ाए जा सकते हैं। इजरायल ने इसकी कैपिसिटी का खुलासा कभी नहीं किया।