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कभी यहां सुहागरात मनाने आते थे अंग्रेज, जानें यहां के 8 Unknown Facts

शनिवार सुबह ताजमहल के ‘नो फ्लाइ जोन’ में ड्रोन उड़ने का मामला सामने आया है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Feb 11, 2018, 07:13 PM IST

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    आगरा. शनिवार सुबह ताजमहल के ‘नो फ्लाइ जोन’ में ड्रोन उड़ने का मामला सामने आया है। तीन बार ड्रोन उड़ने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्‍टिन ट्रूडो के यहां आने का कार्यक्रम है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन उड़ाने वाले की तलाश में जुट गई हैं। इसे लेकर ताज फिर से चर्चा में आ गया है। इस मौके पर DainikBhaskar.comअपने रिडर्स को ताज महल से जुड़े ऐसे Unknown Facts बताने जा रहे है, जिसे ज्यादातर लोग यहां घूमने के बाद भी नहीं जान पाते। झुकी हुई हैं ताज महल की मीनारें...

    यहां आने वाले ज्यादातर सैलनी गौर नहीं करते कि ताज महल की मीनारे मामूली रूप से बाहर की ओर झुकी हुई हैं। वहीं, परिसर में जाने पर रॉयल गेट के गुंबद के ठीक नीचे से ताज की पहली झलक मिलती है। इस जगह कदम बढ़ाने पर ताज बड़ा होता दिखता है, जबकि कदम पीछे करने पर ताज छोटो होता दिखता है। ब्रिटिश शासन के दौरान मुख्‍य स्‍मारक के बगल का मेहमानखाना किराए पर दिया जाता था।

    आगे स्लाइड्स में जानें ताज से जुड़े कई Unknown फैक्ट्स...

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    एक तरफ झुकी हैं ताज महल की मीनारें


    ताज महल की मीनारे मामूली रूप से बाहर की ओर झुकी हुई हैं। ताकि भूकंप का काफी तेज झटका आने पर मीनार बाहर की ओर गिरेंगी। इससे ताज के गुंबद को नुकसान नहीं होगा।

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    ताज के मेहमान खाने में सुहागरात मनाते थे अंग्रेज जोड़े

    ब्रिटिश शासन के दौरान मुख्‍य स्‍मारक के बगल का मेहमानखाना किराए पर दिया जाता था। इसमें नव विवाहित अंग्रेज जोड़े सुहागरात मनाते थे। उस समय इसका किराया अच्‍छा-खासा था। सुहागरात मनाने वालों के लिए मेहमानखाने में काफी बदलाव किया गया था। इसका जिक्र इतिहासकार राजकिशोर राजे ने अपनी पुस्‍तक ‘तवारीख ए आगरा’ में किया है। उसके अनुसार, साल 1857 के बहादुरशाह जफर के विद्रोह के बाद यहां की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। ताज में तोप भी लगाए गए थे। इसमें अंग्रेजों को खर्च करना पड़ रहा था। इस खर्च की थोड़ी-बहुत भरपाई मेहमानखाने को किराए पर देकर होती थी।

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    छोटा-बड़ा होता दिखता है ताज

    ताज को खूबसूरत बनाने में बड़ी भूमिका रॉयल गेट की भी है। परिसर में जाने पर रॉयल गेट के गुंबद के ठीक नीचे से ताज की पहली झलक मिलती है। इस जगह कदम बढ़ाने पर ताज बड़ा होता दिखता है, जबकि कदम पीछे करने पर ताज छोटो होता दिखता है। यहां से लगता है कि फिल्‍म देख रहे हों और ताज को जूम किया जा रहा हो।

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    ताजमहल बनाने में हुई सिर्फ एक चूक


    दुनियाभर के आर्किटेक्‍ट ने ताज की जांच की है। इसका हर हिस्‍सा दूसरे हिस्‍से के ठीक बराबर है। लेकिन सिर्फ एक गलती मिली। मुख्य इमारत में यमुना की ओर संगमरमर की दीवारो में बने नक्काशीदार पिलरों में से एक पिलर का डिजाइन अलग है। 11 पिलर में से सिर्फ एक का डिजाइन सपाट गोल है। बाकी पिलर तिकोनी कटिंग के डिजाइन में हैं। विश्व के कोने-कोने से 20 हजार मंझे हुए कारीगरों की 20 साल की मेहनत में सिर्फ यही गलती मानी जाती है।

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    यूरोपीय था ताज का पहला पर्यटक

    इतिहासकारों के मुताबिक, ताज का भ्रमण करने वाला पहला यूरोपीय पर्यटक जीन बैप्टिस्ट टैवर्नियर था। वह आगरा 1665 में घूमने आया था। उसने लिखा है- शाहजहां काला ताजमहल बनवा पाता, इससे पहले उसे औरंगजेब ने कैद कर लिया था।

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    ताज बनने तक मुमताज को ममी के रूप रखा गया था


    मुमताज की मौत 14वें बच्‍चे के प्रसव के दौरान बुहारनपुर में हुई थी। शाहजहां ने ताजमहल बनने तक मुमताज के शव को संरक्षित रखने के लिए यूनान के हकीमों की मदद ली थी। शाही हकीमों ने शव को अगले 6 महीने तक खराब नहीं होने दिया। इसका जिक्र अबुस्सलाम ने अपनी किताब में किया है। लाश को ममी की तरह लेप लगाकर कपड़े की पट्टियों से लपेट दिया गया। हालांकि, इतिहासकार यह नहीं मानते हैं कि मुमताज की लाश को ममी के रूप में दफनाया गया था।

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    ताज में दफन है मुमताज सहित शाहजहां की 5 बेगम


    ताज महल के पूरे परिसर में 6 कब्रें हैं। संगमरमर के मुख्‍य स्‍मारक में शाहजहां और मुमताज की कब्र हैं। जबकि इसी परिसर के 4 तरफ शाहजहां की पत्‍नी अकबरी बेगम उर्फ इजून्निसा, फतेहपुरी बेगम सरहंदी बेगम और मुमताज की प्रधान सेविका सतिउन्‍नीसा की कब्र है। इन कब्रों को सहेली बुर्ज का नाम दिया गया था। यह बुर्ज लाल पत्‍थर का बना हुआ है और गुंबद संगमरमर का है।

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    नकली हैं ताजमहल में पर्यटकों को दिखने वाली कब्रें


    ताज में जाने पर पर्यटकों को संगमरमर की जाली से घिरी हुई शाहजहां और मुमताज की कब्रें दिखती हैं। असल में ये कब्रें नकली हैं। इसके ठीक नीचे तहखाने में असली कब्रें बनी हुई हैं। यहां जाने का रास्‍ता साल में सिर्फ 3 दिन शाहजहां के उर्स के दौरान खुलता है। इस बार 3 से 5 मई तक तहखाना आम पर्यटकों के लिए खुला रहा।

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