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45 लाख का पैकेज छोड़ बने थे IPS, स्कूल को गोद लेकर बनें मिसाल

पूर्व एसएसपी आईपीएस अजय कुमार ने माध्यमिक विद्यालय को गोद लिया था।

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2018, 03:08 PM IST
IPS ajay kumar special story in agra

फिरोजाबाद (यूपी). यहां के पूर्व एसएसपी आईपीएस अजय कुमार ने डीएम नेहा शर्मा के आग्रह पर एक माध्यमिक विद्यालय को गोद लिया था। गोद लेने से पहले स्कूल की छत भी नहीं थी। आज इस विद्यालय को शहर के आदर्श विद्यालयों में गिना जाता है। बता दें कि अजय कुमार दुबई में 45 लाख का पैकेज छोड़कर आईपीएस बनने है।

कन्या विद्यालय को लिया गोद...

- आईपीएस अजय कुमार ने कक्षा 5 तक की पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय में की है। उन्हें कुछ करने की प्रेरणा आईएएस नेहा शर्मा से मिली, जो फिरोजाबाद की जिलाधिकारी हैं।
- इनके आग्रह पर अजय कुमार ने विद्यालय को गोद लिया और 3 महीनों में विद्यालय की सूरत बदल दी। यहां की टीचर समय-समय पर शहर के सबसे अच्छे कान्वेंट स्कूलों में शुमार डीपीएस में ट्रेनिंग करने जाती है। कांवेंट स्कूल के बच्चे सरकारी स्कूल के बच्चों के साथ ज्वाइंट स्टडी की क्लासेज भी लेते रहते हैं।
- बीतें 15 जून को जब आईपीएस ने विद्यालय को गोद लिया था, तब वहां की छत से पानी टपकता था, फर्श में गड्ढे थे, छात्राएं जमीन पर बैठकर पढ़ती थी, रसोईघर बिल्कुल डैमेज था।

बढ़ने लगी स्टूडेंट्स की संख्या
- पहले स्कूल में छात्राओं की संख्या 55 थी, लेकिन 3 महीने से कम समय में स्टूडेंट्स की संख्या बढ़कर 85 हो गई है। इन तीन महिनों एसएसपी फिरोजाबाद ने सबसे पहले स्कूल की छत डलवाया।
- दीवालों पर पुट्टी करवाई, उसके बाद जमीन पर टाइल्स लगवाई। पूरे विद्यालय में पुताई करवाई और फिर पौधरोपण करवाया गया। स्कुलों की दीवारों पर चित्रकारी की गई, टॉयलेट बनवाया गया।
- एसएसपी अजय कुमार ने 5 सितंबर 2017 को शिक्षक दिवस के दिन विद्यालय का उद्घाटन कर विद्यालय को समाज के प्रति समर्पित कर दिया। विद्यालय के छात्राओं ने भी एक एक वीडियो संदेश देकर अजय कुमार को धन्यवाद कहा।

दुबई में कर रहे थे जॉब
- अजय कुमार ने 2011 के आईपीएस बैच के हैं। इनका जन्म बस्ती जिले की सदर तहसील के देऊआ पूरा गांव में हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुई।
- इन्होंने कानपुर के आईआईटी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और दुबई में 3 लाख 80 हजार के पैकेज पर काम कर रहे थे। इनका मन बचपन से देश और समाज के लिए कुछ करने का था।
- इन्होंने आईपीएस बनने का फैसला किया और उम्र के हिसाब से आखिरी मौका था। कड़ी मेहनत से इन्होंने फर्स्ट एटेम्प्ट में ही सिविल सर्विस क्वालीफाई कर लिया।

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