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गूंगे-बहरे हैं ये दोनों भाई, एेसे करते है लोगों से फोन पर बातें

दुकान पर आने वाले नए ग्राहक को यह पता तक नहीं चलता कि दोनों गूंगे-बहरे हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 23, 2017, 01:00 PM IST

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    वीडियो कॉल के द्वारा ये अपने परिजनों से फोन पर बात करते हैं।

    आगरा. ताजनगरी में दो भाई एेसे है जो जन्म से मूक बधिर हैं। लेकिन परिवार चलाने के लिए पिछले 25 सालों से पान की दुकान चलाते हैं। बता दे, ये लोगों के होठों को पढ़कर सामान दे देते हैं। दुकान पर आने वाले नए ग्राहक को यह पता तक नहीं चलता कि दोनों गूंगे-बहरे हैं। इन्होंने कहीं से लिप रीडिंग सीखी नहीं है, बल्कि दुकान पर बैठते-बैठते सब चीजें रट गई हैं। फोन पर एेसे करते है परिजनों से बातें...

    - जवाहर सैनी और ओम प्रकाश सैनी आगरा के विजय नगर के रहने वाले हैं। पालीवाल रॉड स्थित विश्वविद्यालय चौराहे पर इनके पिता बहुरीलाल की 50 साल पुरानी पान की दुकान है।
    - बहुरी लाल के दोनों बेटे जन्म से मूक बधिर थे। उन्होंने बच्चों को मूक बधिर विद्यालय में पढ़ाने के साथ-साथ दुकान पर बिठाना भी जारी रखा।
    - धीरे-धीरे जवाहर और ओमप्रकाश को लिप रीडिंग का ज्ञान हो गया और ग्राहक के बोलने के अंदाज से सामान देना शुरू कर दिया।
    - यही नहीं, मूक बधिर होने के बाद भी आज टेक्नोलॉजी बढ़ने के बाद यह दुकान से बैठ कर घर परिवार और रिश्तेदारों से फोन पर बात भी करते हैं।
    - इसके लिए यह फेसबुक-वाट्सएेप आदि से वीडियो कॉल का इस्तेमाल करते हैं और इनकमिंग पता करने के लिए फोन को वाइब्रेट मोड पर रखते हैं।

    पति-पिता का पूरा दायित्व

    - ओमप्रकाश ने अपनी इशारों की भाषा में बताया कि सब उनको रट गया है। ग्राहक के होंठ देख कर पता लगा लेते हैं, उसे क्या चाहिए।
    - यह दुकान 50 साल पुरानी है। पहले पिताजी बैठते थे और अब वो लोग बैठते हैं। जवाहर सैनी के 3 लड़के हैं और एक लड़की है, जिसकी शादी हो गई है। वहीं, ओमप्रकाश का एक बेटा है।
    - पड़ोसी दुकानदार राधेश्याम का कहना है कि हम लोग सालों से आते हैं। यह बस होठों का इशारा समझ कर समान दे देते हैं कभी कोई परेशानी नहीं होती है।
    - बता दें, इनके बच्चे पत्नी सभी सामान्य हैं और इन्होंने अपनी इच्छा शक्ति से खुद को सामान्य की श्रेणी में रखा हुआ है। यह अपने सारे काम स्वयं करते हैं और आजीविका चलाते हुए एक पति पिता का पूरा दायित्व निर्वाह करते हैं, जो आज के लोगों के लिए एक मिसाल है।

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    ये दोनों ग्राहक के होंठ देख कर पता लगा लेते हैं, उसे क्या सामान चाहिए।
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    ओम प्रकाश सैनी छोटे भाई हैं।
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    जवाहर सैनी बड़े भाई है।
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    परिवार चलाने के लिए पिछले 25 सालों से पान की दुकान चलाते हैं।
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Web Title: Motivational Story Of Two Deaf And Dumb Brothers
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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