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Myth: 100 मील दूर तक जाती थी इस मंदिर के दीपक की रोशनी, अब भूत करते हैं रखवाली

यूपी के वृंदावन में एक मंदिर ऐसा भी है, जिसकी रखवाली भूत करते हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 10, 2018, 08:06 PM IST

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    लोगों का मानना है कि इस मंदिर की रखवाली भूत करते हैं

    मथुरा.यूपी के वृंदावन में एक ऐसा मंदिर है, जिसकी रखवाली भूत करते हैं। मंदिर में एक विशालकाय दीपक था, जिसकी लौ 100 मील दूर से दिखाई देती थी। आगरा से मुगल शासक औरंगजेब की नजर इस मंदिर पर पड़ गई। उसने इसके 4 फ्लोर गिरवा दिए। लंबे अर्से तक यहां किसी मूर्ति की स्थापना न हो सकी। लोगों का मानना है कि उसके बाद से मंदिर को भूतों ने अपना अड्डा बना लिया। DainikBhaskar.com ने मंदिर के पास रहने वाले पवन शर्मा व मंदिर परिसर में रहने वाले संत कमल किशोर गिरी से बात करके भूत वाले रहस्य के बारे में जाना।


    वृंदावन के सबसे प्राचीन मंदिरों में शुमार है ये...
    पवन शर्मा ने बताया " गोविंद देव का यह मंदिर वृंदावन के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। मेरे पूर्वजों से ये बात चली आ रही है कि इस मंदिर का निर्माण जयपुर के राजा मान सिंह ने 1590 में कराया था। मंदिर में 7 फ्लोर थे और इसी फ्लोर पर एक बड़ा सा दीपक बनवाया गया था। यह इतना बड़ा था कि इसे जलाने में कई लोगों की आवश्यकता होती थी।"

    रोजाना 50 किलो देशी घी से जलता था दीपक
    ''रोजाना 50 किलो देशी घी से यह दिया जलाया जाता था। इसकी लौ आगरा से दिखाई पड़ती थी। एक बार मुगल शासक औरंगजेब की नजर इस पर पड़ गई। औरंगजेब ने कहा- जब इतनी बड़ी मस्जिद पूरे भारतवर्ष में नहीं है, तो यह मंदिर कैसे रह सकता है। उसने मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया।''

    सपने में पुजारी को पता चल गया औरंगजेब का प्लान
    पवन के मुताबिक- पूर्वज बताते थे ''रात में भगवान श्री कृष्ण ने सपने में मंदिर के पुजारी से कहा- कल औरंगजेब यह मंदिर तोड़ने आएगा। इसके पहले ही तुम मेरी मूर्ति कहीं और स्थापित करा दो। इसके बाद वो मूर्ति राजस्थान के जयपुर जिले में दूसरे मंदिर में स्थापित करा दी गई। जो आज गोविंद वल्लभ मंदिर के नाम से मशहूर है।''

    जहां दीपक नही जलता, वहां हो जाता है प्रेतवास
    मंदिर में रहने वाले संत कमल किशोर गिरी ने बताया, ''काफी समय तक यह मंदिर बंद पड़ा था, क्योंकि यहां मूर्तियां नहीं थी। यहां सैकड़ों साल से दीपक नहीं जला। इसके बाद यह कहा जाने लगा कि मंदिर में भूत हैं, जो इसकी रखवाली करते हैं। लेकिन ये बातें गलत हैं। मुगल शासन काल के बाद इस मंदिर में मूर्तियां स्थापित कराई गई हैं। उसके बाद से पूजा-पाठ शुरू हो सका। अब यहां श्रद्धालुओं आते रहते हैं ।''

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    औरंगजेब ने मंदिर के चार फ्लोर गिरवा दिए थे
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    वृन्दावन के सबसे पुराने मंदिरों में शुमार है ये मंदिर
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Web Title: Mysterious Story Of Govind Dev Temple Vrindavan
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