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Pics: रंग-गुलाल से सराबोर हुआ बरसाना, ऐसे खेली गई लठमार होली

बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लठमार होली का रंग यहां आम लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

Dainik Bhaskar

Feb 25, 2018, 09:19 AM IST
Pictures of barsana holi 2018

बरसाना... मथुरा से कोई 45 किमी दूर। राधारानी का गांव। यहां करीब ढाई सौ मीटर ऊंची पहाड़ी पर राधारानी का मंदिर है। राधारानी को यहां सब लाडलीजी कहते हैं। इस गांव में होली तो वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाती है, पर शनिवार को पहली लट्ठमार होली हुई। दुनियाभर के लोग देखने आए। ऐसे मनाई गई लट्ठमार होली...

बरसाना से करीब पांच किमी दूर कृष्ण के गांव नंदगांव से सुबह से ही हुरियारे आने लगे। जत्था करीब 1500 लोगों का था। सबके हाथों में खाल और कपड़ों से बनी ढाल थी। सभी पहले पीली पोखर पंहुचे। खुद को सजाया। वहीं बरसाना के लोगों ने उन्हें स्वागत स्वरूप नारियल और रुपए भेंट किए। हुरियारों ने ठंडाई छानी, फिर सबसे पहले लाडलीजी के मंदिर पंहुचे।

मंदिर का सफेद फर्श रंगों से पट गया

यहां, हां गीत-संगीत के साथ होली खेली गई। इतना गुलाल उड़ा कि मंदिर का सफेद फर्श रंगों से पट गया। लोग उसमें लोटने लगे। अब सब हुरियारे गाते-बजाते बरसाना की 50 से ज्यादा गलियों से होते हुए गांव के चौक में पंहुचने लगे। गलियों में घर के बाहर हुरियारन लट्ठ लिए खड़ी थीं। हुरियारे ठिठोली करते और हुरियारन लट्ठ लगातीं। बचाव का एक ही साधन है-ढाल।

बरसाना की हर गली रंगीन हो गई

शाम होते-होते बरसाना की हर गली रंगीन हो गई। शाम को हेलिकॉप्टर से बरसाना के ऊपर फूल बरसाए गए। अब रविवार को नंदगांव में ठीक ऐसी ही होली खेली जाएगी। तब बरसाना के लोग जाएंगे।

भगवान कृष्ण के समय से ही चली आ रही है परंपरा

बरसाना के सत्यनारायण क्षोत्रिय बताते हैं कि होली की यह परंपरा भगवान कृष्ण के समय से ही चली आ रही है। सबसे पहले कृष्ण ने अपने सखाओं के साथ नंदगांव से बरसाना आकर राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेली थी। उसी दिन से यह परंपरा चली आ रही है।

27 को विधवा होली

आज से शुरू हुई लट्‌ठमार होली अब नंदगांव के साथ-साथ मथुरा में भी खेली जाएगी। 27 फरवरी को वृंदावन के गोपीनाथ मंदिर में विधवा होली का आयोजन होगा। इसमें महिलाएं रंग और फूलों के साथ होली खेलेंगी। अगले दिन दाउजी का हुडंगा में होली होगी।

5000 साल से दोनों गांवों के बीच वैवाहिक संबंध नहीं

मान्यता है कि बरसाना और नंदगांव में पांच हजार साल से विवाह संबंध नहीं हुआ है। नंदगांव के लड़कों को कृष्ण के सखा और बरसाना की लड़कियां राधा का रूप मानी जाती हैं। इसलिए रिश्ता नहीं होता है। बरसाना के बुजुर्ग तो नंदगांव का पानी भी नहीं पीते हैं।

आगे की स्लाइड्स में देखें कैसे बरसाना में मनाई गई लठमार होली....

Pictures of barsana holi 2018
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