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500 साल पहले एक साधु ने दिया था वरदान, इसलिए आग में कूदता है ये परिवार

फालेन गांव में हर साल होलिका की दहकती आग के बीच से पंडा नंगे पैर निकलता है

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 01, 2018, 06:57 PM IST

  • 500 साल पहले एक साधु ने दिया था वरदान, इसलिए आग में कूदता है ये परिवार

    वृंदावन.फालेन गांव में हर साल होलिका की दहकती आग के बीच से जब पंडा नंगे पैर निकलता है, तो इस नजारे को देखने वाला कोई शख्स अचंभित हुए बिना नहीं रहा सकता। देखने वाले भक्त प्रहल्लाद के जयकारे लगाते हैं। क्या कभी सोचा है कि इस अंधभक्ति से भरी परम्परा में क्या खास है? DainikBhaskar.com सीधे फालेन गांव से खंगालकर इस परंपरा के बारे में बता रहा है।

    500 साल पहले साधु ने दिया था आशीष


    - आग में कूदने के लिए 40 दिन व्रत रखने वाले बाबूलाल पंडा बताते हैं, "हमारा परिवार कौशिक का वंशज है। यह वही परिवार है जिसे 500 साल गांव आए साधु ने आग से सुरक्षित रहने का वरदान दिया था। यही वजह है कि सिर्फ हमारे परिवार के पंडे ही इस परंपरा को निभाते हैं।"
    - "यह गांव भक्त प्रहल्लाद से भी जुड़ा है। 500 साल पहले यहीं उनकी मूर्ति नरसिंह भगवान की प्रतिमा के साथ मिली थी। तभी से यहां होलिका दहन अन्य जगहों के मुकाबले ज्यादा जोर-शोर से किया जाता है। इस परंपरा में सिर्फ हमारे गांव के आसपास बसे 6 गांव भी हिस्सा लेते हैं।"

    क्या खास होता है आग में कूदने की परंपरा से पहले

    - गांव के प्रधान जुगन चौधरी बताते हैं, "यहां होली पर हर घर में रंगाई-पुताई होती है। 40 दिन तक हर घर को सजाया जाता है, मेला लगता है। खासकर मंदिर के आसपास सबसे ज्यादा रौनक रहती है।"
    - "पंडा का परिवार होलिका दहन के दौरान आग से निकलने का कारनामा करता है। उनकी सुरक्षा के लिए पूरा गांव प्रार्थना करता है, पूजा-भजन करता है। महिलाएं भगवान प्रहल्लाद को मनाने के लिए भजन गाती हैं।"
    - "इस होली के लिए गांव के सभी घरों से एक-एक गोबर उपला आता है। होलिका उपले और घास-पूस लगाकर बनाई जाती है। इसकी चौड़ाई 15 मीटर और ऊंचाई 15 फीट होती है। इस अनोखी होली को देखने

    हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। इसी साल अमेरिका से कई श्रद्धालु आए हैं।"

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