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MYTH: 7 पीढ़ियों से यहां किसी ने नहीं बेचा दूध, जिसने किया वो हुआ बर्बाद

सात पीढ़ियों से इस गांव में दूध नहीं बेचा जाता है। जो भी करता है ऐसा करता है वो बर्बाद हो जाता है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 12, 2018, 08:37 PM IST

    • इस गांव में कोई नहीं चाहता दूध बेचना।

      आगरा. ताजमहल से 2 किमी दूर एक ऐसा गांव है, जहां एक तिहाई आबादी के पास ढेरों मवेशी हैं। गांव बसने के बाद से यहां का कोई भी व्यक्ति कभी भी दूध नहीं बेचता है। लोगों का मानना है कि गांव को श्राप मिला है, जो भी व्यक्ति दूध बेचेगा वो बर्बाद हो जाएगा। ग्रामीणों के अनुसार, अगर यहां का रहने वाला कहीं और जाकर दूध बेचता है तो भी वो बर्बाद हो जाता है। सात पीढ़ियों ने नहीं बेचा जाता दूध..


      - यहां फतेहाबाद रोड से सटा हुआ कुआं खेड़ा गांव ताजमहल से भी पुराना है।
      - 1200 के लगभग आबादी वाले इस गांव में अधिकतर यदुवंशी रहते हैं। गांव में 600 के लगभग परिवारों में से 400 से अधिक परिवारों के पास अपने मवेशी हैं।
      - बुजुर्ग रामवती (90) का कहना है कि यहां सात पीढ़ी से किसी के यहां दूध नहीं बेचा जाता है, क्योंकि गांव को श्राप है। जो भी दूध बेचता है उसके यहां बच्चों की मौत हो जाती या जानवर मर जाते हैं और वो बर्बाद हो जाता है।
      - क्लब सिंह (70) का कहना है कि दूध बेचने की परंपरा यहां नहीं है। उन्होंने बताया कि उनका भाई यहां से दूर रहने चला गया था और उसने दूध का काम किया तो बर्बाद हो गया और जब दूध बेचने का काम बंद किया तब ठीक हुआ।

      - गांव में दूध का बना सामान भी नहीं बेचा जाता है। इस कारण यहां कोई चाय की दुकान भी नहीं है। यहां इकलौती मिठाई की दुकान भी दूसरे गांव के व्यक्ति ने खोल रखी है।

      इस वजह से नहीं बेचे जाते दूध

      - ग्रामीणों ने बताया कि बहुत साल पहले गांव के पास एक संत रहते थे जो गऊ भक्त थे। उन्होंने ग्रामीणों को दूध ना बेचने की सलाह दी थी।

      - सैकड़ों साल पहले संत ने जो सलाह इन गांववालों को दी थी उसका पालन लोग आजतक करते आ रहे हैं।

      - आज भी गांव के युवा इस परंपरा को कायम रखे हुए हैं। यहीं वजह है कि दूध यहां रिश्तों को मजबूती दे रहा है।

      गांव में नहीं है एक भी चाय की दुकान

      - गांव के प्रधान राजेन्द्र के अनुसार, "हमारे यहां पुरानी परंपरा है कि हम दूध नहीं बेचते हैं। गांव में अगर किसी के यहां विवाह, मुंडन, त्रयोदशी आदि कोई भी कार्यक्रम होता है ,तो उसकी आवश्यकता के अनुसार दूध ग्रामीण खुद ही पहुंचा देते हैं।"

      - वहीं, ग्रामीणों की माने तो यहां बाहर का कोई व्यक्ति आता है और दूध का भाव आदि पूछता है तो हम लोग उसे फ्री का बताते हैं। जिससे कई बार सामने वाला मजाक समझता है और गुस्सा होकर लड़ने की बात कहता है। यहां लोग पहलवानी करते रहे हैं और दूध से स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। शायद इसीलिए हमारे पूर्वजों ने यह परंपरा बनाई होगी।


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      जो भी दूध बेचता है वो बर्बाद हो जाता है।
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      सात पीढ़ी से किसी के यहां दूध नहीं बेचा जाता है, क्योंकि गांव को श्राप है।
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    Web Title: Special Story Of Agra Village On Milk Myth
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