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'फूल-पत्ती की नक्काशी से साबित नहीं होता ताज महल शिवालय है'

ताज महल को तेजो महालय बताने वाले दावे पर ASI और केंद्र सरकार ने दिया जवाब।

Dainik Bhaskar

Feb 21, 2018, 12:17 PM IST
Taj Mahal is not a shiv temple says central govt and ASI

आगरा. ताज महल को शिवालय बताने वाले हिंदूवादी नेताओं को सरकार ने करारा झटका दिया है। सरकार ने कोर्ट में कहा है कि ताज महल सिर्फ एक मकबरा है, कोई मंदिर नहीं। सरकारी वकील के साथ ही पुरातत्व विभाग ने अपना जवाब सिविल कोर्ट में दाखिल कराया है।

तेजो महालय नहीं है ताज महल

- 8 अप्रैल 2015 में वकील राजेश कुलश्रेष्ठ ने सिविल कोर्ट में परिवाद दाखिल किया था। उन्होंने हिंदू नेताओं के रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर दावा किया था कि ताज महल असल में तेजो महालय मंदिर था, जिसे मुगल सम्राट ने अपना बता दिया। केस में भारत सरकार, होम मिनिस्ट्री, पुरातत्व विभाग और केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को पार्टी बनाया था।
- हिंदूवादी नेताओं द्वारा किए दावे के जवाब में केंद्र सरकार की तरफ से सरकारी वकील विवेक शर्मा ने जवाब में कहा है, "ताज महल शिवालय है, इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल पाया है। यह इमारत शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज की याद में बनाए एक मकबरे से ज्यादा कुछ और नहीं है। शाहजहां ने ताज महल बनवाया था, इस पक्ष में शासनादेश के साथ कई पुख्ता सबूत भी हैं। यह एक संरक्षित स्मारक और भारत सरकार की संपत्ति है।"
- "हिंदूवादी नेताओं ने ताज महल में बनी फूल-पत्ती और कलश आदि की नक्काशी का आधार देते हुए इसके मंदिर होने का दावा किया है। यह दावा काल्पनिक है। इसका कोई सबूत और दस्तावेज दाखिल नहीं किए गए हैं।"

क्या था हिंदूवादी नेताओं का दावा

- ताज महल को शिवालय बताने वाले वकील राजेश कुलश्रेष्ठ ने कोर्ट में कहा था, "ताज महल को 12 वीं सदी में राजा परमार जी देव ने बनवाया था। इसे शाहजहां के द्वारा छीना गया और नाम यह तेजोमहल से ताज महल कर दिया गया।"
- "जवाब में यह माना गया है कि यह राजा जय सिंह से लिया गया था। डॉक्यूमेंट्स में साफ है कि यह तेजो महालय था। एएसआई ने यह माना है कि यह एक मकबरा है, लेकिन साथ में यह भी कहा है कि यह राजा से लिया गया है।"

Taj Mahal is not a shiv temple says central govt and ASI

इंदौर के इतिहासकार की बुक में था दावा

 

 

- ताज महल के शिवालय होने का मुद्दा सबसे पहले इंदौर के दिवंगत इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक की किताब Taj Mahal, the True Story: The Tale of a Temple Vandalized पब्लिश होने के बाद उठा था। ओक एकमात्र ऐसे इतिहासकार थे जिन्होंने ताज महल के मकबरा होने की बात को नकारा था।
- ओक ने अपनी किताब में ताज महल में की गई नक्काशियों आदि की फोटो भी छापी थीं। उन्होंने लिखा था, "ताज महल की दीवारों पर बने फूलों में ओम की आकृति बनी है। यहां के कॉरिडोर वेदिक स्टाइल में डिजाइन किए गए हैं। एंटरेंस पर लाल रंग का कमल बनाया गया है, जो कि मंदिर होने की निशानी है। इसके अलावा महल के गुम्बद पर कलश बना है। जिन कमरों को आम जनता के लिए बंद किया गया है, उनकी छतों पर वेदिक डिजाइन उकेरी हुई हैं।"
- ओक ने सबसे पहले नाम पर ही सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा है, "अफगानिस्तान से अल्जीरिया तक, मुस्लिम देशों में किसी भी बिल्डिंग के लिए महल शब्द यूज नहीं किया गया है। ताज महल के लिए कहा जाता है कि यह मुमताज महल से लिया गया है। यह पूरी तरह इललॉजिकल है। पहला यह कि मुमताज का नाम मुमताज उल जमानी था, महल नहीं। दूसरा यह कि एक महिला के नाम के शुरुआती अक्षरों 'मुम' को हटाकर कोई कैसे 'ताज महल' रख सकता है।"

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कार्बन डेटिंग को बताया आधार

 

- ओक ने किताब में दावा किया था कि ताज महल एक शिव मंदिर था, जहां आगरा के राजपूत पूजा करते थे। उन्होंने अपने दावे के सपोर्ट में अमेरिका के एक प्रोफेसर मारविन मिलर और इंग्लिश विजिटर पीटर मन्डी का रेफ्रेंस दिया है।
- ओक के मुताबिक न्यूयॉर्क निवासी प्रोफेसर मारविन मिलर ताज महल की मिट्टी कार्बन डेटिंग टेस्ट के लिए ले गए थे। वहां टेस्ट में साबित हुआ था कि ताज महल का दरवाजा शाह जहां के कार्यकाल से 300 साल ज्यादा पुराना था।
- ओक के मुताबिक मुमताज की मौत के एक साल बाद इंग्लैंड से पीटर मन्डी आगरा आए थे। उनके लिखे लेटर्स में ताज महल के होने का वर्णन है, जिससे साबित होता है कि मुमताज की मौत से पहले आगरा में ताज महल मौजूद था।
- इसके अलावा ओक ने यूरोपियन ट्रैवलर जोहान अल्बर्ट मैनडेलस्लो का भी जिक्र किया। किताब के मुताबिक जोहान 1638 में आगरा आए थे, मुमताज की मौत के सात साल बाद। उन्होंने अपने मेमॉयर्स में ताज महल का जिक्र किया है।

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