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भास्कर विशेष / ताजमहल का ताज मटमैला

दुनिया के सात आश्चर्यों में से भारत में एक ही है- ताजमहल। इसकी सफाई, सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है। लेकिन ताज की हालत बेहद खराब है। दैनिक भास्कर प्लस ऐप की रिपोर्ट...

  • दो साल में फैसला नहीं हो पाया- गुंबद की सफाई के लिए बांस का जाल लगाएं या लोहे का
  • आसपास की गलियां इतनी संकरी कि एक ऑटो रिक्शा के अलावा कुछ न आए
  • पीछे यमुना के हाल बेहाल, उसके कीड़े ताज को पहुंचा रहे हैं नुकसान
Danik Bhaskar | Sep 16, 2018, 05:33 PM IST

आगरा. जिन संकरी और खुली नालियों वाली गलियों से होकर आप ताजमहल तक पहुंचते हैं, वह सचमुच यह अहसास नहीं होने देतीं कि आप दुनिया के 7 अजूबों में से एक को देखने जा रहे हैं। आंखें ताज को ढूंढेंगी और दूर तक सिर्फ गलियां नजर आएंगी। गलियों में एक ही ऑटो घुस पाएगा और दुकानें छूने के लिए ऑटो से बस हाथ बाहर निकालने की जरूरत है। खुली नालियां हमेशा ओवरफ्लो रहती हैं और हर दूसरे चौराहे पर कूड़ा-कचरा।

 

ताज की बाहरी दीवारों के करीब-करीब हर पत्थर पर लोग अपना नाम गुदवा चुके हैं। केंद्र हो या उत्तर प्रदेश सरकार, कोई कुछ देखता-सुनता नहीं। पूरा ताज साफ है और इसका गुंबद मैला। दो साल से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) यह फैसला नहीं कर पाया कि ताज का गुंबद साफ करने के लिए बांस का जाल लगाएं या लोहे का?

 

ताजगंज खाली करवाना होगा -एएसआई

एएसआई का मानना है कि ताज के आसपास का इलाका तब तक साफ और सुंदर नहीं बनाया जा सकता, जब तक ताजगंज को खाली न करवा लिया जाए। यहां जो लोग रहते हैं, उनका कहना है कि जमीन पुरखों की है। जिन कारीगरों ने ताज बनाया, हम उनकी 16वीं पीढ़ी से हैं तो अपनी जमीन क्यों छोड़ें?

 

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ढांचे की सफाई 95 फीसदी पूरी, गुंबद बाकी

ताजमहल के रख-रखाव और सुंदरता के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसे साफ करने के लिए 93 लाख रुपए खर्च कर मुलतानी मिट्टी का लेप किया गया। एएसआई का साइंस डिपार्टमेंट भी कई तरीकों से इसकी सफाई कर रहा है। बाकी ढांचे की सफाई करीब 95 फीसदी पूरी हो गई है, लेकिन धुली-पुछी मीनारों के बीच गुंबद अभी भी अपनी सफाई का इंतजार कर रहा है। यह फैसला अभी नहीं हो पाया कि इसकी सफाई के लिए लोहे के जाल लगाए जाएं, या बांस के। दरअसल, बांस रंग छोड़ता है जो पत्थरों को खराब कर सकता है। उधर, लोहे के जाल का वजन गुंबद झेल पाएगा या नहीं, इसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है।

 

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प्रस्तावों में अटका यमुना बैराज

ताज की सफाई के लिए सबसे बड़ी चुनौती इसके पीछे बहती यमुना नदी है। साल में सिर्फ दो महीने यहां पानी रहता है। बाकी दिनों में यह कीचड़ और काई से भरी रहती है। इसके पानी में पैदा होने वाले गिओल्डीकिरोनोमस नाम के हरे रंग के एक कीड़े से ताज के रंग को नुकसान पहुंच रहा है। जब अखिलेश सरकार मुख्यमंत्री थे, तब केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने यमुना का जलस्तर बढ़ाने के लिए बैराज बनाने का प्रस्ताव भेजा था। प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद भी उस पर कोई काम नहीं हुआ था। 

 

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नुकसान से बचाने के लिए लगाईं कई पाबंदियां

ताज को नुकसान से बचाने के लिए यहां जाने वालों पर कई तरह की पाबंदिया हैं। 15 सफाईकर्मियों के हवाले इसकी सफाई का जिम्मा है। खाने का सामान, कोल्डड्रिंक, दूसरे पेय पदार्थ ले जाने पर पाबंदी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, खाना या पेयपदार्थ जमीन पर गिरने से यहां कीड़े और चींटियां लगेंगी। इससे ताज को नुकसान पहुंच सकता है। पेय पदार्थ मार्बल के लिए नुकसानदायक है। पत्थरों के ढांचे से ठीक पहले जूतों पर कवर चढ़ाने के लिए ऑटोमैटिक मशीन लगी है। 

 

2 साल में दो बार बढ़े दाम, सुविधाएं जस की तस

ताजमहल के टिकट के दाम इसी महीने बढ़ाए गए हैं। देसी पर्यटकों को 10 रुपए और विदेशी पर्यटकों को 100 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। अब विदेशी पर्यटकों के लिए ताज का टिकट 1110 रु., सार्क देशों के पर्यटकों के लिए 540 रु और देशी पर्यटकों के लिए 50 रुपए का होगा। पिछली बार 2016 में टिकट के दाम बढ़ाए गए थे। दो साल में दो बार टिकट के दाम बढ़ने के बावजूद रख-रखाव के इंतजाम और सुविधाएं पहले जैसी ही हैं।

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