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डाउनलोड करेंआगरा. महिला टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत को हार का मुंह देखना पड़ा। इस मैच में भारत की ओर से सबसे ज्यादा 2 विकेट लेने और सबसे ज्यादा 33 रन बनाने वालीं टीम की ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा आगरा की अवधपुरी कॉलोनी में रहती हैं। वह लेफ्ट हेंड से बैटिंग करती हैं और राइट आर्म ऑफ स्पिनर हैं। उनका 5 भाई 2 बहनों में सबसे छोटी दीप्ति अपने भाई सुमित के साथ उसका मैच देखने जिद करके स्टेडियम जाती थीं। सुमित स्टेट लेबल तक क्रिकेट खेल चुके हैं। दीप्ति को टीम इंडिया की ब्लू जर्सी दिलाने के लिए सुमित ने अपनी जॉब छोड़ी और पूरा फोकस उसी पर किया।
भाई के साथ जाती थी मैच देखने
दीप्ति के पिता रघुवंश शर्मा बताते हैं- दीप्ति बचपन से ही लड़कों जैसी है। मेरे 5 बेटे और 2 बेटियां हैं। दीप्ति सबसे छोटी है। मेरा चौथे नंबर का बेटा सुमित क्रिकेट खेला करता था। वह स्टेट लेवल तक खेल चुका है। दीप्ति हमेशा उसके साथ स्टेडियम जाने की जिद करती थी, जबकि सुमित मना करता था। एक दिन हम लोगों के कहने पर वह ले गया। जहां लड़कियां खेल रही थी और दीप्ति बैठ कर देख रही थी. तभी उसके पास गेंद आई और उसने वहीं से थ्रो किया, जिससे बॉल सीधा स्टंप पर लगी। वहां इंडियन टीम से खेल चुकी हेमलता काला थीं। उन्होंने सुमित से कहा देख मैं तेरी गारंटी नहीं ले सकती कि तू इंडियन टीम में खेलेगा लेकिन अगर यह लड़की खेली तो जरूर इंडियन टीम तक जाएगी। उसके बाद से ही दीप्ति का स्टेडियम जाना शुरू हो गया।

लोग ताना मारते थे लेकिन हमने अपनी बेटी की सुनी
प्रधानाध्यापिका के पद से रिटायर हुई दीप्ति की मां सुशीला शर्मा कहती है कि घर में पढ़ाई के साथ साथ खेल का माहौल भी हैं। मेरे दो बेटे इंजीनियर हैं, जिसमें से एक आईआईटी रुडकी से पासआउट है। सुमित क्रिकेट खेलना चाहता था। उसे देखकर दीप्ति ने भी खेलना शुरू कर दिया। दीप्ति लड़कों के साथ खेलती कहीं भी उसे मौका मिलता तो वह जरूर खेलती। नाते रिश्तेदार पड़ोसी ताना मारते लेकिन, अब वही दीप्ति की तारीफ करते हैं। सुशीला बताती हैं- पिछली बार जब टीम वर्ल्ड कप में पहुंची तो हमने पूजा रखवाई थी। इस बार बड़े से हॉल में पूरी कॉलोनी मैच देखेगी। मुझे उम्मीद है कि इस बार टीम इंडिया जीत कर ही वापस आएगी।
भाई ही मेंटर और कोच है
सुमित बताते हैं- 2010-11 में एमबीए करके मैं जॉब करने नोएडा चला गया था। उस समय तक दीप्ति स्टेट लेबल पर खेलने लगी थी। छोटा भाई था उसके साथ वह स्टेडियम जाती थी। मेरी लाइफ सेटल थी। एक बार मैं घर आया तो देखा पिछले 2-3 दिनों से दीप्ति स्टेडियम नहीं जा रही है, साथ ही उसका वेट भी बढ़ गया था। मुझे फिर वही टीम इंडिया की ब्लू जर्सी दिखने लगी मैंने सोचा जो मैं नहीं कर पाया था, वह मेरी बहन करेगी. मैंने अपने परिवार में बात की और दीप्ति को खिलाने के लिए दो साल मांगे। मुझे अपनी जॉब भी छोड़नी पड़ी और मेहनत रंग लाई। अभी उसकी उम्र लगभग 22 साल है और उसे अभी बहुत लंबा खेलना है। मैंने आगरा में ही अपनी क्रिकेट एकेडेमी खोल ली है, जहां काफी लड़कियां क्रिकेट सीखने आती हैं।
घर पर पोहा बनाना है पसंद
सुमित बताते हैं- दीप्ति जब भी घर आती है वह नाश्ते में सबके लिए पोहा बनाती है। उसे पोहा पसंद भी है बाकी ऐसा कुछ ख़ास नहीं है जो उसे बहुत पसंद हो। वह वेजिटेरियन है। बाहर मुश्किल होती है लेकिन वह मैनेज करती है। दुःख तकलीफ जो भी हो मम्मी-पापा से ज्यादा मुझे बताती है। हम लोग मैच ख़त्म होने के बाद बात भी करते हैं, कहां दिक्कत हुई और उसे कैसे दूर कर सकते हैं।
सजना संवरना नहीं है पसंद
दीप्ति की बहन प्रगति कहती हैं- दीप्ति को बचपन से ही सजना संवरना पसंद नहीं है। साथ ही वह हमेशा लड़कों की तरह ही रिएक्ट करती है। छोटी-मोटी चोट या दुःख तकलीफ को वह बिलकुल उसी तरह इग्नोर करती है, जैसे लड़के किया करते हैं। बाहर से लौट कर भी वह हमेशा प्रैक्टिस पर ही ध्यान देती है। शादियों में उसे जाना बिलकुल पसंद नहीं है। मैं उसे समझाती हूं कि और खिलाड़ियों को भी देखो वह लड़कियों की ही तरह रहती हैं तो वह बुरा सा मुंह बनाती है, बोलती है मैं जैसी हूं, अच्छी हूं।
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