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अलीगढ़: राजकीय सम्मान के साथ हुआ गोपालदास 'नीरज' का अंतिम संस्कार, पारिवारिक विवाद के कारण नहीं हुआ देहदान

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कवि कुमार विश्वास अंतिम दर्शन के लिए आगरा पहुंचे थे।

Danik Bhaskar | Jul 21, 2018, 06:24 PM IST

अलीगढ़. कवि गोपाल दास नीरज का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ नुमाइश मैदान में किया गया। परिजनों के विवाद के कारण उनका देहदान नहीं हो सका। उनकी पहली पत्नी के बेटे मिलन प्रभात और आगरा में रहने वाली उनकी दूसरी पत्नी मनोरमा शर्मा के बेटे से संपत्ति को लेकर विवाद के बाद अंतिम संस्कार किया गया। अलीगढ़ से पहले उनके पार्थिव शरीर को आगरा लाया गया था जहां सपा अध्यक्ष अखिलेष यादव और कवि कुमार विश्वास ने उन्होंने श्रद्धांजलि दी।

राजकीय सम्मान के साथ हुई अंतिम विदाई: आगरा के बाद उनके शव को अलीगढ़ ले जाया गया। जहां राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंतिम विदाई दी गई। पहले बताया जा रहा था कि उनके शव को मेडिकल कॉलेज को दान किया जाएगा। देहदान कर्तव्य संस्था के अध्यक्ष डॉ एस के गौड़ ने बताया, 'मैं 10 दिसंबर, 2015 को नीरजजी से पहुंचा था वहां पहुंच कर मैंने उन्हें देहदान के बारे में बताया। तब उन्होंने कहा था मैं मरने के बाद भी जीना चाहता हूं और यह सबसे अच्छा माध्यम है। बिना समय गवाएं फॉर्म पर दस्तखत कर दिए थे।' लेकिन परिवारिक विवाद के कारण उनका अंतिम संस्कार किया गया।

एम्स में हुआ था निधन: पद्मभूषण से सम्मानित गीतकार गोपालदास नीरज का गुरुवार शाम निधन हो गया था। वे 93 वर्ष के थे। उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया था। परिजनों ने बताया था कि उन्हें बार-बार सीने में संक्रमण की शिकायत हो रही थी।

-नीरज को 1991 में पद्मश्री और 2007 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें यश भारती सम्मान से भी सम्मानित किया। फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए उन्हें लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। 1970 में फिल्म चन्दा और बिजली के गीत ‘काल का पहिया घूमे रे भइया!’, 1971 में फिल्म पहचान के गीत ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ और 1972 में फिल्म मेरा नाम जोकर के गीत ‘ए भाई! जरा देख के चलो’ के लिए उन्हें पुरस्कार मिला।