महिला दिवस / लावारिस शवों के अंतिम संस्कार को बनाया जीवन का लक्ष्य; 7 साल 100 से अधिक शवों को मुखाग्नि दे चुकीं वृंदावन की लक्ष्मी

शवों का अंतिम संस्कार करतीं समाजसेविका लक्ष्मी गौतम शवों का अंतिम संस्कार करतीं समाजसेविका लक्ष्मी गौतम
Last rites of destitute dead were the goal of life; In 7 years, more than 100 dead bodies have been cremated so far
Last rites of destitute dead were the goal of life; In 7 years, more than 100 dead bodies have been cremated so far
डॉ. लक्ष्मी गौतम। डॉ. लक्ष्मी गौतम।
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शवों का अंतिम संस्कार करतीं समाजसेविका लक्ष्मी गौतमशवों का अंतिम संस्कार करतीं समाजसेविका लक्ष्मी गौतम
Last rites of destitute dead were the goal of life; In 7 years, more than 100 dead bodies have been cremated so far
Last rites of destitute dead were the goal of life; In 7 years, more than 100 dead bodies have been cremated so far
डॉ. लक्ष्मी गौतम।डॉ. लक्ष्मी गौतम।

  • डॉ लक्ष्मी गौतम ने अपने संकल्प की शुरुआत 2012 में की थी, रुढियों को मिटाने खुद देती हैं चिता को आग
  • लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का पूरा खर्चा खुद उठाती हैं, डिग्री कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं लक्ष्मी

दैनिक भास्कर

Mar 08, 2020, 01:53 PM IST

मथुरा. श्मशान में महिलाएं अपनों के अंतिम संस्कार में नहीं जाती हैं, लेकिन वृंदावन में एक महिला ऐसी भी हैं जो पिछले सात सालों से अन्जान लोगों को सद्गति दिलाने के लिए लावारिस लाशों को खुद मुखाग्नि दे रही हैं। डिग्री कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लक्ष्मी गौतम 2012 से इस सेवा में जुटी हैं। वह अब तक सौ से अधिक अनजान लोगों को मुक्ति दिला चुकी हैं।

डॉ लक्ष्मी गौतम की अपनी एम्बुलेंस हैं। लावारिस शव मिलने पर वह उसकी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एंबुलेंस से शव ले जाकर उसे नहलाकर, चंदन लगाती हैं और कफन भी पहनाती हैं। कायदे से चिता सजाकर विधिविधान से अंतिम संस्कार करती हैं। डॉ गौतम बताती हैं- 2012 में उस समय हुई जब वह मथुरा से लौट रहीं थीं। तब उनको राधा नाम की महिला का शव मिलने की सूचना मिली। उस शव को उठाया और श्मशान स्थल लेकर पहुंच गईं। वहां पूरे विधि विधान से उसका अंतिम संस्कार किया, इसके बाद से यह सिलसिला शुरू हो गया। 

ओमप्रकाश कहते हैं- ऐसा कहा जाता है कि महिला को श्मशान घाट पर नहीं जाना चाहिए लेकिन डॉ लक्ष्मी गौतम इन बातों को दरकिनार कर न केवल घाट पर जाती हैं बल्कि उनका पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार करती हैं । शनिवार को भी लक्ष्मी गौतम ने नगर के अलग-अलग इलाके में मिले दो साधुओं का भी अंतिम संस्कार एक साथ किया।

कौन हैं डॉक्टर लक्ष्मी?

डॉक्टर लक्ष्मी गौतम इंस्टीट्यूट ऑफ ओरियंटल फिलॉसफी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उनके पति विजय गौतम एसबीआई बैंक में अकाउंटेंट थे। वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनकी बेटी अवनिका गौतम रांची में न्यायिक मैजिस्ट्रेट है। परिवार में दो बेटे भी हैं।

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