आगरा

--Advertisement--

ऐसा था मौत का मंजर, राख में बिखरी मिलीं लाल चूड़ियां और बच्चों की किताबें

दो साल पहले आज ही के दिन हिंसा की आग में झुलसा था मथुरा का जवाहर बाग।

Danik Bhaskar

Jun 02, 2018, 11:08 AM IST

मथुरा. दो साल पहले 2 जून को मथुरा के जवाहर बाग में खूनी संघर्ष हुआ था। आध्यात्म गुरु राम वृक्ष यादव के अनुयायियों ने मिलकर मौत का तांडव मचाया था। उस हिंसा में यूपी पुलिस ने एसपी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार यादव के रूप में दो बेहतरीन अफसर खो दिए थे। हिंसा करने वाले रामवृक्ष यादव भी नहीं बचे थे। आग ठंडी होने के बाद राख में लाल चूड़‍ियां और बच्‍चों की कुछ बची हुई किताबें मिली थीं।

कौन था रामवृक्ष यादव?

- गाजीपुर के रायपुर बागपुर गांव का रहनेवाला रामवृक्ष बाबा जय गुरुदेव का अनुयायी था। वो उनकी दूरदर्शी पार्टी से जुड़ा हुआ था।
- 90 के दशक में उसने दूरदर्शी पार्टी की तरफ से लोकसभा और विधानसभा चुनाव भी लड़ा था।
- हालांकि, धीरे-धीरे उसके बाबा जय गुरुदेव से रिश्ते बिगड़ने लगे। 2014 में रामवृक्ष अपना गांव छोड़कर मथुरा के जवाहरबाग में आकर बस गया था।
- गांव में उसकी पत्नी, दो बेटे और दो बेटियां थीं।

खुद को धर्म गुरु बनाना चाहता था रामवृक्ष

- गांव छोड़ने के बाद रामवृक्ष ने अपने खुद के चेलों के साथ मिलकर मथुरा के जवाहरबाग में डेरा डाल दिया था।
- लगभग 260 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा जमा रखा था। वो अपने फॉलोअर्स को सरकारी जमीन पर घर बनवाकर देने का वादा किया करता था।
- एक रुपए लीटर में पेट्रोल-डीजल देने, 12 रुपए तोला सोना और गोल्ड करंसी चलाने जैसी अजीब मांगें रखते हुए मध्य प्रदेश के सागर से 2014 में अभियान शुरू किया।
- अपने फॉलोवर्स को उसने पुलिस से लड़ने के लिए गोरिल्ला ट्रेनिंग दी थी। ग्रुप में ट्रेन्ड तलवारबाज, शार्पशूटर आदि मौजूद थे।

ऐसी थी लग्जरी लाइफ

- मामूली किसान रहे रामवृक्ष की लाइफ भी लग्जरी से भरी थी। उसने अपने लिए प्राइवेट स्वीमिंगपूल और फिट रहने के लिए जिम बनवा रखा था, जिसमें ट्रेडमिल से लेकर स्टेशनरी बाइक और डंबल आदि सब उपकरण मौजूद थे।
- रामवृक्ष पजेरो कार से चलता था। उसके कैम्प से डॉमिनोज पिज्जा से लेकर ब्रांडेड डियो-हेयर आइल तक बरामद हुए थे।

ऐसे हुआ था नरसंहार

- 2 जून 2016। शाम के लगभग 5 बजे पुलिस टीम जवाहर बाग पहुंची थी। लगभग एक महीने पहले से रामवृक्ष द्वारा कब्जा किए क्षेत्र का बिजली-पानी कट कर दिया गया था, जिससे वह कमजोर पड़ जाए।
- जैसे ही पुलिस अंदर घुसी, रामवृक्ष के लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। उन्हें कंट्रोल करने के लिए आंसूगैस और रबर बुलेट्स फायर किए गए, लेकिन अनुयायियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।
- रामवृक्ष के अनुयायियों ने एसपी मुकुल द्विवेदी और एसएचओ संतोष कुमार यादव को डंडों से पीटकर मार डाला। अपने अफसरों पर हुए अटैक से गुस्साई पुलिस फोर्स ने हमले तेज कर दिए।
- हिंसक अनुयायियों ने अपने ही गैस सिलेंडरों और गोला-बारूद में आग लगा दी, जिससे जवाहर बाग लपटों से घिर गया। एक-एक कर सिलेंडर ब्लास्ट होने लगे।
- उस खूनी झड़प ने दो पुलिस अफसरों समेत 24 लोगों की मौत हुई थी।

मौत से पहले खाना भी नहीं हुआ नसीब


- हिंसा के पीछे मुख्‍य आरोपी रामवृक्ष ने करीब 3 हजार लोगों को बरगलाकर जवाहरबाग में रोके रखा था।
- मिली जानकारी के अनुसार, रामवृक्ष उन लोगों ने नौकरी और पक्‍का घर दिलवाने का वादा करता था।
- इसी चलते कई लोग पिछले 2 साल से बाग में रुके हुए थे।
- बाग में बनी मेन रसोई घर में कुछ बर्तन में खाने का समान का सामान मिला है।
- इन बर्तनों को देखकर ऐसा लगता है कि जिस समय हिंसा भड़की, उस समय बाग में मौजूद लोग खाना बना रहे थे।
- इसके अलावा आग के राख में लाल चूड़‍ियां और बच्‍चों की कुछ बची हुई किताबें मिली थीं।
- यह इस बात की ओर इशारा करती है कि हिंसा के समय यहां बड़ी संख्‍या में महिलाएं-बच्‍चे मौजूद थे। लेकिन हिंसा के बाद उनका पता नहीं चला।

Click to listen..