उप्र / आगरा में सुलहकुल का गांव; चाचा हिंदू तो भतीजा मुसलमान, एक अलमारी में सजी हैं गीता-कुरान



एक अलमारी में रखी कुरान-ए-मजीद व श्रीमद् भागवत गीता। एक अलमारी में रखी कुरान-ए-मजीद व श्रीमद् भागवत गीता।
विजेंद्र। विजेंद्र।
परिवार के साथ राजन। परिवार के साथ राजन।
राजन (चाचा) और असरार (भतीजा)। दोनों एक साथ रहते हैं। राजन (चाचा) और असरार (भतीजा)। दोनों एक साथ रहते हैं।
up news great communal harmony fathers brother is hindu and he is muslim stay together
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एक अलमारी में रखी कुरान-ए-मजीद व श्रीमद् भागवत गीता।एक अलमारी में रखी कुरान-ए-मजीद व श्रीमद् भागवत गीता।
विजेंद्र।विजेंद्र।
परिवार के साथ राजन।परिवार के साथ राजन।
राजन (चाचा) और असरार (भतीजा)। दोनों एक साथ रहते हैं।राजन (चाचा) और असरार (भतीजा)। दोनों एक साथ रहते हैं।
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  • औरंगजेब के समय में हुआ था यहां बड़े पैमाने पर धर्मांतरण
    मुगल शासन खत्म होने पर कई लोग दोबारा हिन्दू बने तो कई मुस्लिम ही रहे
  • एक परिवार में भी अलग-अलग धर्म को मानने वाले, लेकिन सौहार्द में कमी नहीं

Dainik Bhaskar

Jul 05, 2019, 07:07 AM IST

आगरा. तुम्हारे शहर में मय्यत को सब कांधा नहीं देते, हमारे गांव में छप्पर भी सब मिल कर उठाते हैं। शायर मुनव्वर राणा ने ये पंक्तियां भले ही किसी अन्य मसले के लिए लिखी हों, लेकिन यह आगरा के खेड़ा साधन गांव पर सटीक बैठती हैं। यह ऐसा गांव हैं, जहां कई घरों की एक ही अलमारी में आपको गीता और कुरान एक साथ दिख जाएंगी। जहां दादी कुरान की आयतों की तिलावत करतीं हैं तो पोती रामचरित मानस के चौपाइयों को गाती है। औरंगजेब के डर से यहां कई लोगों ने इस्लाम कुबूल किया था, लेकिन मुगल साम्राज्य खत्म होते ही कई लोग वापस हिन्दू बन गए तो कई मुस्लिम ही रहे। स्थिति यह है कि एक ही घर में हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्म को मानने वाले रहते हैं। दैनिक भास्कर प्लस ऐप के रिपोर्टर रवि श्रीवास्तव की रिपोर्ट-

 

दिल्ली-आगरा हाइवे पर कीठम गांव से पश्चिम की ओर करीब 14 किलोमीटर दूर अछनेरा ब्लाक के गांव खेड़ा साधन का नजारा यूपी के अन्य गांवों जैसा ही है। लेकिन, यहां का मिजाज दुनिया से निराला है। इस मिजाज को जानने के लिए हम राजन के घर पहुंचे। राजन पेशे से मैकेनिक हैं और हिन्दू धर्म के अनुयायी हैं। दोपहर में जब वह घर पर आराम करने पहुंचे तो वहां उनका भतीजा उनके पास आया। भतीजे से परिचय लिया तो उसने अपना नाम असरार बताया। हिन्दू चाचा का मुस्लिम भतीजा? यह चौंकाने वाला था। इस पर राजन ने बताया कि मेरे दादा दो भाई थे, जिसमें से एक मुस्लिम हो गए और मेरे दादा हिंदू ही रहे। ऐसे में दूसरे दादा से जो परिवार आगे बढ़ा, वह मुस्लिम ही बना रहा। लेकिन, हमारा रिश्ता खत्म नहीं हुआ। रिश्तेदारियां अभी भी चल रही हैं।

 

कर्मवीर सिंह के पिता आशिक अली
सफेद दाढ़ी, कंधे पर नमाजी गमछा और बदन पर सफेद कुर्ता पायजामा पहने एक व्यक्ति से बात की तो उसने अपना नाम विजेंद्र सिंह बताया। देखने में मुस्लिम लग रहे इस हिन्दू नाम वाले व्यक्ति ने बताया कि उसके दादा का नाम आशिक अली था। पिता का नाम कर्मवीर सिंह है। विजेंद्र ने बताया कि हमारे पूर्वज राजपूत थे, जिन्होंने इस्लाम स्वीकार किया था। हमारी यहां अभी भी राजपूत परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। हम लोगों को राजपूत मुस्लिम कहा जाता है।

 

कुनबा एक, यहां निकाह भी होता है विवाह भी
राजन और असरार के कुनबे की तरह यहां कई परिवार हैं, जहां हिन्दू और मुस्लिम दोनों परंपराओं का अदब के साथ निर्वहन होता है। जिस उत्साह के साथ दीपावली मनाई जाती है, वही रौनक ईद पर भी होती है। परिवार के लोग एक-दूसरे के खुशी और गम में भी एक साथ खड़े रहते हैं। बस धर्म के नाम पर अंतर इतना रहता है कि चाचा के यहां शादी पंडित कराते हैं तो भतीजे के यहां निकाह मौलवी पढ़ाते हैं।

 

गांव का इतिहास
गांव खेड़ा साधन के प्रधान जमील जादौन बताते हैं कि मुगल शासक औरंगजेब के कार्यकाल 1658 और 1707 के बीच बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन कराया गया था। तब लोगों से कहा गया था या तो इस्लाम अपना लो या गांव छोड़ दो। डर की वजह से गांव वालों ने इस्लाम अपना लिया। मुगलकाल खत्म होने पर तमाम लोगों ने फिर से धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म अपना लिया तो कुछ मुस्लिम ही रह गए। गांव की आबादी करीब 17 हजार है। यहां 25 फीसदी परिवार मुस्लिमों के हैं।

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