उप्र / विदेशों में बढ़ी मथुरा में बनी कान्हा की ड्रेस की डिमांड; हिंदू-मुस्लिम एकता के धागों से बुनी होती है यह पोशाक



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  • अमेरिका, रूस, न्यूजीलैंड आदि देशों से मिले ऑर्डर
  • 24 अगस्त को मनाई जाएगी जन्माष्टमी

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2019, 03:02 PM IST

मथुरा. 24 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व देश ही नहीं विदेशों में मनाया जाएगा। खासकर कान्हा की नगरी मथुरा में अभी से भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। कान्हा के वस्त्रों, झूला व अन्य सामानों से मथुरा के बाजार व गलियां सराबोर हैं। मथुरा-वृंदावन में बनने वाली आकर्षक डिजायन वाली पोशाक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दुनियाभर में ठाकुरजी धारण करेंगे। इसके लिए सिर्फ भारतीय भक्त ही नहीं सात समंदर पार से भी बालकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए स्पेशल पोशाक तैयार कराने के ऑर्डर मिल चुके हैं। अलग-अलग साइज और वैरायटी की डिमांड को पूरा करने में कारीगर दिन-रात जुट गए हैं। 

 

मथुरा-वृंदावन में बनती हैं ड्रेस व श्रृंगार के सामान

राधा-कृष्ण के वस्त्र (पोशाक) और श्रृंगार का सामान विशेष तौर पर वृंदावन-मथुरा में ही तैयार होता है और जन्माष्टमी पर देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी स्थानीय दुकानदारों को ठाकुरजी की आकर्षक पोशाक और श्रृंगार का सामान तैयार करने के आर्डर हर साल मिलते हैं और जन्माष्टमी से कम से कम दो दिन पहले ही यह सामान तैयार कर खरीददार को देना होता है। 

 

यहां से मिले ऑर्डर

पोशाक विक्रेता आशीष ने बताया कि उनके यहां सौ रुपए से लेकर हजारों रुपये तक की पोशाक तैयार रहती है। व्यवसायी श्रीदास प्रजापति ने बताया कि वृंदावन में सालभर देश और दुनिया भर से कृष्ण भक्तों के आने का सिलसिला चलता रहता है। ऐसे में यहां के मंदिरों में ठाकुरजी के होने वाला विशेष श्रृंगार उन्हें इतना लुभाता है कि वो भी इसी तरह अपने आराध्य का श्रृंगार करना और उसे सजाना-संवारना चाहते हैं। उन्हौने बताया कि अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूके, रुस और मैक्सिको के अलावा कई देशों से आर्डर मिल चुके हैं, जिन्हे कारीगर पूरा करने में लगे है। पोशाक विक्रेता मिश्री लाल बतातें हैं कि पिछले कुछ सालों में विदेशों में भी अब वृंदावन में तैयार होने वाली पोशाक और मुकुट के अलावा श्रृंगार सामग्री की डिमांड बढ़ी है। ये सभी काम हर हाल में जन्माष्टमी से कम से कम दो दिन पूर्व पूरा कर उन्हें सौंपने हैं। 

 

मुस्लिम करते हैं जरदोजी का काम, फइनल टच देते हैं हिन्दू कारीगर

  • भगवान श्रीकृष्ण की जन्म एवं क्रीड़ास्थली के रुप में विख्यात मथुरा-वृंदावन अब भगवान राधा-कृष्ण के पोशाक एवं श्रृंगार सामग्री के निर्माण का भी एक महत्वपूर्ण केन्द्र बन चुका है। पूरी दुनिया में यहीं से पोशाक और श्रृंगार का सामान तैयार होकर सप्लाई होता है।
  • ठाकुरजी के पोशाक एवं मुकुट पर किए जाने वाले जरदोजी या हैंड एम्ब्रोडिंग के काम में मुस्लिम कारीगर महारत हासिल किए हुए हैं। सितारे व रत्नजड़ित पोशाकें और मुकुट आदि तैयार करने के लिए वृंदावन के बजाय मथुरा में भेजी जाती है। शहर के विभिन्न हिस्सों में सैंकड़ों कारखाने घरों में ही संचालित हैं। जहां कारीगर इन पोशाकों और मुकुटों को आकर्षक लुक देते है। कपड़े पर एम्ब्रोडिंग करने के बाद सिलाई के लिए भेजा जाता है। 
  • मथुरा-वृंदावन में छोटे-बड़े करीब हजारों कारखाने संचालित हैं, जहां पोशाक सिलाई का काम होता है। बड़ी संख्या में हिन्दू के अलावा मुस्लिम परिवार भी इस व्यवसाय से जुड़े हैं। घरों में महिलाएं भी अपने बचे समय में पोशाक सिलाई कर अतिरिक्त आमदनी कर रही हैं।
  • हुनरबंद कारीगर रत्नजड़ित और एम्ब्रोडिंग किए हुए कपड़ों की सिलाई करने के बाद पोशाक को फाइनल टच देते हैं। जरदोजी का काम करने वाले कारीगर मोहम्मद वकार ने बताया उनके यहां तैयार की गई पोशाक की विदेशों में भी खूब डिमांड है। उनका कहना है कि पिछले करीब 20 साल से वे इस काम को कर रहे हैं जिसमें उन्हें बड़ा आनंद आता है।

 

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