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AMU स्टूडेंट्स अपनी मांगों को लेकर धरने पर, डीएम ने 34 घंटे के लिए अलीगढ़ में इंटरनेट सेवा बंद करने का दिया आदेश

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अभी भी जिन्ना पर जंग जारी है।

Danik Bhaskar | May 04, 2018, 03:55 PM IST

अलीगढ़. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में अभी भी जिन्ना पर जंग जारी है। एएमयू छात्रसंघ का बाब-ए-सैयद गेट पर अपनी मांगों को लेकर धरना दिए हुए हैं। छात्रसंघ के समर्थन में यूनिवर्सिटी के छात्र 4 से 5 हजार की संख्या में अभी भी धरने पर बैठे हुए हैं। वहीँ डीएम ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी सहित पूरे शहर में इंटरनेट बंद करने के आदेश दे दिए हैं। इंटरनेट सेवायें 4 मई को 2 बजे से 5 मई रात 12 बजे तक बंद रहेंगी।

क्या हैं छात्रों की मांगे ?

-छात्रों की मांग है कि हिन्दू संगठन और स्थानीय सांसद सतीश गौतम के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा लिखा जाए। साथ ही जिन पुलिस अधिकारीयों के कहने पर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ उन पर भी मुकदमा लिख कार्यवाई होनी चाहिए।
-हालांकि प्रशासन ने अभी छात्रों की कोई भी मांग नहीं मानी है। जिसकी वजह से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र सड़क पर धरना दे रहे हैं।

15 दिन में सौंपनी है मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट

-गुरुवार को डीएम चन्द्र भूषण सिंह ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश देते हुए एडीएम फायनेंस बच्चू को जांच अधिकारी नामित किया है। डीएम ने कहा कि एएमयू में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर एएमयू में चल रहा विवाद 02 मई को हिंसक हो गया।
-बेकाबू छात्रों पर लाठीचार्ज कर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस विवाद में हुए पथराव और लाठीचार्ज में एसपी, एसडीएम समेत 13 पुलिसकर्मी और संघ अध्यक्ष समेत 15 छात्र घायल हो गए। डीएम ने कहा कि उक्त घटना की पारदर्शिता के लिए मजिस्ट्रियल जांच जरूरी है। उन्होंने जांच अधिकारी एडीएम फायनेंस बच्चू सिंह को निर्देशित किया कि वह जांच कर तीन प्रतियों में 15 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपे।

बुधवार को हुआ था हिंसक प्रदर्शन

-बुधवार को हिन्दू संगठनों ने जिन्ना की तस्वीर हटाने के लिए यूनिवर्सिटी के गेट पर प्रदर्शन किया। इसका एएमयू के सैकड़ों छात्रों ने विरोध किया। आक्रोशित छात्रों को जब पुलिस ने रोकने की कोशिश की, तो वे धक्का-मुक्की करने लगे। इसके बाद हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और फायरिंग करनी पड़ी। हालात के मद्देनजर पुलिस फोर्स तैनात की गई है। बता दें कि एएमयू के यूनियन हॉल में जिन्ना की तस्वीर लगाए जाने पर अलीगढ़ के भाजपा सांसद ने कुलपति को खत लिखकर जवाब मांगा था। उधर, योगी कैबिनेट में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने जिन्ना को महापुरुष बताया था। हालांकि देर रात एएमयू स्टूडेंट्स का धरना ख़त्म हो गया लेकिन यूनिवर्सिटी में जगह जगह फोर्स तैनात रही। यही नहीं सुबह पुलिस के आला अधिकारीयों ने यूनिवर्सिटी का दौरा भी किया।


एएमयू के गेट पर फूंका जिन्ना का पुतला

- बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), हिंदू जागरण मंच और हिंदू युवा वाहिनी ने यूनिवर्सिटी के गेट पर जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर प्रदर्शन किया। संगठनों ने जिन्ना का पुतला भी फूंका। एएमयू के छात्रों ने इस प्रदर्शन का विरोध किया। दोनों गुटों में मारपीट भी हुई। पुलिस ने यहां पर मामला शांत करा दिया।

- पुलिस के मुताबिक, एएमयू छात्रों ने हिंदू संगठनों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की और थाने का घेराव करने के लिए आगे बढ़े। जब समझाने की कोशिश की गई तो छात्रों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। हालात नहीं संभले तो हवाई फायरिंग की गई और आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

नहीं हो पाया उप-राष्ट्रपति का कार्यक्रम

- डीएम चन्द्र भूषण सिंह ने कहा, "एएमयू में उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी को आजीवन सदस्यता देने का कार्यक्रम था। लेकिन, रुकावटों के चलते ये कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।"

सांसद ने पूछा था - यूनिवर्सिटी में क्यों लगी जिन्ना की तस्वीर

- अलीगढ सांसद सतीश गौतम ने कुलपति से लेटर लिख पूछा था कि, "मुझे कहीं से जानकारी मिली है कि जिन्ना की तस्वीर विश्वविद्यालय में लगी हुई है। मुझे जानकारी नहीं है कि यह तस्वीर एएमयू के किस विभाग में किन वजहों से लगी हुई है। इस संबंध में मुझे संपूर्ण जानकारी दी जाए। साथ ही उन वजहों को भी बताया जाए, जिनके चलते जिन्ना की तस्वीर लगाना एएमयू की मजबूरी बन गई।"
- "पूरी दुनिया जानती है कि जिन्ना भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के मुख्य सूत्रधार थे और वर्तमान में भी पाकिस्तान द्वारा देश के खिलाफ गैर जरूरी हरकतें जारी हैं। ऐसे में जिन्ना की तस्वीर विश्वविद्यालय में लगाना कितना सही है।"

एएमयू प्रशासन ने कहा- हमारा छात्र संघ पर सीधा नियंत्रण नहीं
- अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन के प्रवक्ता शाफे किदवई ने कहा, "एएमयू छात्र संघ एक स्वतंत्र संस्था है। उस पर एएमयू प्रशासन का सीधा नियंत्रण नहीं होता। 1920 से जब यूनिवर्सिटी बनी तब से छात्रसंघ के लोग कई शख्सीयतों को आजीवन सदस्यता देते हैं। पहली सदस्यता गांधी जी को दी गई। बंटवारे से पहले जब जिन्ना आये थे, तब उनको सदस्यता दी गई थी। ये छात्रसंघ फैसला करता है। इस मसले पर हम बात करेंगे। सदस्यता पहले दी जा चुकी है, उसको बदला नहीं जा सकता।'
- जानकारी के मुताबिक यूनियन हॉल में उन लोगों की तस्वीर लगाई जाती है, जिन्हें छात्र संघ आजीवन सदस्यता देता है।