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बुजुर्ग दंपति की दर्दभरी दास्तां, अफसरों से घूम-घूम कर कह रहा-साहब हम दोनों जिंदा हैं

भूमाफिया और राजस्व कर्मचारियों ने मिलकर राजस्व विभाग के अभिलेखों में हमें मृत दिखा दिया।

Dainik Bhaskar

Dec 29, 2017, 01:50 PM IST
दोनों पिछले 5 सालों से खुद के जिंदा होने का दावा करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। दोनों पिछले 5 सालों से खुद के जिंदा होने का दावा करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

प्रतापगढ़. यूपी के प्रतापगढ़ में एक दंपत्ति को दस्तावेजों में मार देने का मामला सामने आया है। वहीं, बुजुर्ग दंपती पिछले 5 सालों से अपने जिंदा होने का सबूत देने के लिए अधिकारियों की चौखट पर दस्तक देते फिर रहे हैं। दंपत्ति का आरोप है कि भूमाफियाओं ने अधिकारियों की मिली भगत से उसकी जमीन को हड़पने के लिए उन्हें अभिलेखों में मृत दिखा दिया है। आगे पढ़िए क्या हा पूरा मामला...

- मामला रानीगंज तहसील के खाखापुर का है। यहां रहने वाले दंपत्ति बंशीलाल और उसकी पत्नी लखपत्ती दलित बिरादरी के है।
- ये दोनों जीवन के अंतिम पड़ाव पर है और पिछले 5 सालों से खुद के जिंदा होने का दावा करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
- इनके हाथों में तख्ती है जिसपर लिखा है "साहब हम दोनों जिंदा है"। हर तहसील दिवस और हर संभावित जगह दस्तक दे चुके इस दम्पत्ति की सुनने वाला कोई नहीं है।

- पीड़ित बंशीलाल ने बताया कि उसकी पत्नी लखपत्ती को गांव में 28 फरवरी 1976 में गाटा संख्या 1262 में जमीन का एक टुकड़ा सरकार नीतियों के तहत पट्टा दिया गया था। जिसके बल पर इनके जीवन की गाड़ी चल रही थी। इनकी जमीन का टुकड़ा मुख्यमार्ग पर था, जिससे भूमाफियों की नजर इसपर पड़ गई। फिर भूमाफिया और राजस्व कर्मचारियों ने मिलकर राजस्व विभाग के अभिलेखों में हमें मृत दिखा दिया।
- 5 साल पहले जब वह तहसील से जमीन की खतौनी लेने लेखपाल के पास गया था। इस दौरान उसे बताया गया कि तुम दोनों तो मर चुके हो, ऐसा अभिलेखों में दर्ज है और ये जमीन दूसरे को पट्टे पर दी जा चुकी है।"

क्या कहते हैं अधिकारी?
- सीआरओ शिव पूजन का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और शीघ्र ही जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

भूमाफिया और राजस्व कर्मचारी ने मिलकर राजस्व विभाग के अभिलेखों में दोनों को मृत दिखा दिया। भूमाफिया और राजस्व कर्मचारी ने मिलकर राजस्व विभाग के अभिलेखों में दोनों को मृत दिखा दिया।
लखपत्ती को गांव में 28 फरवरी 1976 में गाटा संख्या 1262 में जमीन का एक टुकड़ा सरकार नीतियों के तहत पट्टा दिया गया था। लखपत्ती को गांव में 28 फरवरी 1976 में गाटा संख्या 1262 में जमीन का एक टुकड़ा सरकार नीतियों के तहत पट्टा दिया गया था।
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दोनों पिछले 5 सालों से खुद के जिंदा होने का दावा करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।दोनों पिछले 5 सालों से खुद के जिंदा होने का दावा करने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
भूमाफिया और राजस्व कर्मचारी ने मिलकर राजस्व विभाग के अभिलेखों में दोनों को मृत दिखा दिया।भूमाफिया और राजस्व कर्मचारी ने मिलकर राजस्व विभाग के अभिलेखों में दोनों को मृत दिखा दिया।
लखपत्ती को गांव में 28 फरवरी 1976 में गाटा संख्या 1262 में जमीन का एक टुकड़ा सरकार नीतियों के तहत पट्टा दिया गया था।लखपत्ती को गांव में 28 फरवरी 1976 में गाटा संख्या 1262 में जमीन का एक टुकड़ा सरकार नीतियों के तहत पट्टा दिया गया था।
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