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साफ हृदय वाला ही न्याय मांगने आ सकता है, मन में खोट रखने वाले न्याय की उम्मीद न करें: HC

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धोखा और न्याय एक साथ नहीं रह सकते। साफ हृदय वाला ही न्याय मांगने आ सकता है।

Dainik Bhaskar

Dec 26, 2017, 06:49 PM IST
इलाहाबाद  हाईकोर्ट। फाइल। इलाहाबाद हाईकोर्ट। फाइल।

इलाहाबाद. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि धोखा और न्याय एक साथ नहीं रह सकते। साफ हृदय वाला ही न्याय मांगने आ सकता है। मन में खोट के साथ न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। फर्जी दस्तावेज या प्रमाण-पत्र के आधार पर नियुक्ति पा लेना नियोक्ता के साथ कपट करना है। ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति निरस्त होने पर उसे सहानुभूति पाने का अधिकार नहीं है। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...


-कोर्ट ने इंदिरा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जसवल बाजार गोरखपुर के सहायक अध्यापक विष्णु शंकर सिंह की बर्खास्तगी को सही करार दिया है और यूपी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा प्रबंध समिति के प्रताव का अनुमोदन न करने के आदेश को रद्द कर दिया है।

-प्रबन्ध समिति ने शिक्षा शास्त्री और एमए डिग्री फर्जी होने के आधार पर अध्यापक को बर्खास्त करने का प्रस्ताव भेजा था। कोर्ट ने अध्यापक को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के आदेश को कुलाधिपति के समक्ष चनौती देने की छूट दी है।

-यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी ने कॉलेज की प्रबंध समिति की याचिका को स्वीकार और फर्जी डिग्री से नियुक्त अध्यापक की याचिका खारिज करते हुए दिया है।
-मालूम हो कि वीएस सिंह की 5 जुलाई 1991 को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हुई। 29 जनवरी 2010 को उन्हें निलंबित कर दिया गया।

-विभागीय जांच में अध्यापक के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए। जांच कमेटी ने रिपोर्ट पेश की और अनियमितता व फर्जी प्रमाण-पत्र से नियुक्ति की निरस्त करने का प्रस्ताव पारित कर प्रबंध समिति ने अनुमोदन के लिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भेजा। जिसने अनुमोदन करने से इनकार कर दिया।

आगे की स्लाइड्स में पढ़‍िए रेलवे करेगा कैंट बोर्ड को लगभग 26 करोड़ का भुगतान...

फाइल। फाइल।

रेलवे करेगा कैंट बोर्ड को लगभग 26 करोड़ का भुगतान
         
इलाहाबाद. केंटोनमेंट बोर्ड कानपुर ने उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे से सेवा प्रभार पाने की लंबी लड़ाई जीत ली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से निराश बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट में राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रक्षा मंत्रालय के अपर सचिव वरुण मित्रा की अध्यक्षता में गठित हुई मध्यस्थता समिति में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रेलवे, कैंट बोर्ड को सेवा प्रभार देगा। यह भी तय हुआ कि रेलवे 1982-83 से 2011-12 तक के बकाये सेवा प्रभार 25 करोड़ 50 लाख 30 हजार 232 रुपए का भुगतान एक महीने में करेगा। साथ ही भवन निर्माण के अतिरिक्त खर्चे का भी भुगतान किया जाएगा। 2012 के बाद की बिलों का भी भुगतान रेलवे द्वारा किया जाएगा।

 


दोनों विभागों में इस संबंध में करार करने पर भी सहमति बनी है, जिसमें अन्य मुद्दे भी शामिल होंगे। रेलवे का कहना था कि केंट बोर्ड को सेवा प्रभार रेलवे से प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में कैंट बोर्ड को जीत हास‍िल हुई और रेलवे को अंततः करोड़ों रुपए बोर्ड को देने पड़े।जिसको लेकर बोर्ड वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। कैंट बोर्ड की सीमा में आने वाली रेलवे की सम्पत्ति पर बोर्ड सेवा प्रभार मांग रहा था।

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इलाहाबाद  हाईकोर्ट। फाइल।इलाहाबाद हाईकोर्ट। फाइल।
फाइल।फाइल।
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