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फूलपुर सीट आखिर क्यूं हार गई BJP, ये हैं 6 सबसे बड़े कारण

यूपी उपचुनाव में बीजेपी फूलपुर चुनाव हार गई है।

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 05:07 PM IST
तीसरे नंबर पर निर्दलीय अतीक अह तीसरे नंबर पर निर्दलीय अतीक अह

लखनऊः यूपी उपचुनाव में बीजेपी फूलपुर चुनाव हार गई है। सपा के नागेंद्र सिंह पटेल ने 59,613 वोटों से जीत दर्ज की। नागेन्द्र को 3,42,796 वोट, बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 2,83,183 वोट मिले। बता दें, योगी ने 1 से 10 मार्च तक 5 जनसभाएं की, प्रचार में 10 मंत्री, 7 विधायक और 4 सांसदों ने चुनाव प्रचार किया। इतना ही नहीं, उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या ने भी डेरा डाल रखा था। dainikbhaskar.com ने पॉलिटिकल एक्सपर्ट सीनियर जर्नलिस्ट रतन मणि लाल, प्रदीप कपूर और श्रीधर अग्निहोत्री से समझा हार के कारण।

बीजेपी की हार के 6 सबसे बड़े कारण

कारण नं. 1- फूलपुर में वोटिंग परसेंटेज 2014 में 50.19% था, जबकि इस बार 38% वोटिंग हुई, मतलब 12.19% कम। इसका मतलब वोट बंट गया। शुरूआती राउंड में ही सपा कैंडिडेट आगे हो गया। सपा को 2647 वोट मिले जबकि बीजेपी को 2257 वोट। इसके बाद लगातार सपा ने बढ़त बनाए रखी।

कारण नं. 2- उपचुनाव में विधानसभावार आंकड़े देखें तो रिजल्ट साफ हो जाएगा। फाफामऊ विधानसभा में 43%, सोरांव में 45%, फूलपुर में 46.32%, शहर उत्तरी में 21.65%, शहर पश्चिमी में 31% वोटिंग हुई। इसमें 3 विधानसभा ग्रामीण क्षेत्र की है, जहां ज्यादा वोटिंग हुई। जबकि शहर की 2 सीटों पर कम वोटिंग हुई। बीजेपी शहर की पार्टी मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी को शहर से वोट तो मिले लेकिन गठबंधन को ग्रामीण क्षेत्र से ज्यादा फायदा हुआ।

कारण नं. 3- फूलपुर चुनाव में दलित, पटेल और मुस्लिम निर्णायक कास्ट फैक्टर हैं। दलित 22% तो मुस्लिम 17% और पटेल 17% हैं। ऐसे में इन तीनों के वोट पाने वाला ही विनर हुआ। बीएसपी समर्थित सपा कैंडिडेट को दलित, मुस्लिम के वोट के साथ पटेल वोट भी अच्छी तादाद में मिले। जबकि निर्दलीय कैंडिडेट अतीक अहमद भी मुस्लिम वोटों पर कुछ खास असर नहीं डाल पाए। उन्हें अपने परंपरागत वोट मिले, जिसका फायदा बीजेपी को नहीं मिला। वहीं बीजेपी के कैंडिडेट पटेल होने के बावजूद पटेल वोटों में ज्यादा सेंध नहीं लगा पाए। इसलिए सपा-बसपा समर्थित कैंडिडेट की जीत हुई। आपको बता दें- फूलपुर लोकसभा में ब्राह्मण ​7%, ​वैश्य ​7%, ​​कायस्थ ​6%, ​​​यादव ​6%, ठाकुर 4% और अन्य 15% हैं।

कारण नं. 4- फूलपुर सीट कभी भी बीजेपी का गढ़ नहीं रही। 1996 से 2004 तक यह सपा के खाते में रही। जबकि 2009 का चुनाव यहां से बीएसपी जीती थी। 2009 में भी लगभग 38% वोटिंग हुई थी। कम वोटिंग का फायदा बीएसपी को हुआ था, तब सपा कैंडिडेट अतीक अहमद हार गए थे। 2014 में मोदी लहर में बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य ने यह सीट निकाली। 2014 में केशव का जीतना पार्टी की जीत से ज्यादा उनकी सेल्फ जीत थी क्योंकि उनकी खुद की लोकल लेवल पर पकड़ थी।

कारण नं. 5- फूलपुर में बीजेपी संगठन सीरियस नहीं दिखाई दिया। बीजेपी ने जो कैंडिडेट उतारा उस पर बाहरी होने का ठप्पा लगा। कौशलेन्द्र पटेल वाराणसी के मेयर रह चुके हैं। पटेल होने के नाते उन्हें कैंडिडेट बनाया गया क्योंकि इस लोकसभा क्षेत्र में 17% पटेल हैं, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ता इससे निराश थे। जिससे जनसंपर्क में कमी आई और चुनाव बीजेपी हार गई। जब केशव मौर्य जीते थे, तब वह बीजेपी अध्यक्ष थे तो उन्होंने पार्टी का पूरा सिस्टम भी यूज किया होगा।

कारण नं. 6- आखिरी समय में कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने मुलायम को रावण और मायावती को शूर्पनखा बताया था। इतना ही नहीं, योगी ने सपा-बसपा गठबंधन को सांप-छछुंदर बताया था। इस बयान के बाद दलित और ओबीसी एक जुट हो गए।

क्यों हुए गोरखपुर-फूलपुर सीट पर चुनाव ?

गोरखपुर: योगी आदित्यनाथ यहां से लगातार 5 बार सांसद चुने गए। यूपी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने 21 सितंबर, 2017 को सीट छोड़ दी।
फूलपुर: केशव प्रसाद मौर्य यहां से सांसद थे। उनके यूपी के डिप्टी सीएम बनने के बाद यह सीट खाली हुई।

फूलपुर में किनके बीच हुआ मुकाबला?

बीजेपी उम्मीदवार - कौशलेंद्र सिंह पटेल, वाराणसी के मेयर रह चुके हैं।
सपा+बसपा का उम्मीदवार - नागेंद्र सिंह पटेल, सपा के मंडल अध्यक्ष हैं।
निर्दलीय- अतीक अहमद, सपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद रह चुके हैं। इस बार जेल से चुनाव लड़ रहे हैं।

Note- पिछली बार इस सीट पर बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य जीते थे।

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