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माघ मेला: ठंड पर भारी पड़ी आस्था, 12℃ में भी 32 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

इलाहाबाद. माघ मेले की शुरुआत मंगलवार को पौष पूर्णिमा के साथ हुई। स्नान की शुरुआत मंगलवार से हो गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 09:03 PM IST

    • कल्पवासी सिर्फ एक समय भोजन और दिन में तीन बार स्नान करते हैं।

      इलाहाबाद.माघ मेले की शुरुआत मंगलवार को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान के साथ हुई। 12℃ की कड़ाके की ठंड में भी 18 घाटों पर 32 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। प्रशासन द्वारा इस बार मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 12 थाने, 34 पुलिस चौकी, 4 हजार पुलिस, खुफिया एजेंसियां, आरएएफ, बीडीएस, डॉग स्क्वॉड, 12 फायर स्टेशन की टीम लगीं हैं। संगम तट पर श्रद्धालुओं ने देर रात से ही डुबकी लगाना शुरु कर दिया था। ठंड के बाद भी देशभर के श्रद्धालु स्नान करने के लिए सगंम तट पर पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही आज से एक महीने का कल्पवास भी शुरू हो गया है। 12℃ ठंड में भी 8 लाख लोगों ने किया स्नान...

      - एक दशक में संगमनगरी का दिन तापमान इतना ज्यादा कभी नहीं गिरा। 31 दिसंबर से ही कोहरे की चादर तनी रही, जो मंगलवार तक जारी है।

      - इसके बाद पौष पूर्णिमा यानी आज के दिन 12℃ रिकॉर्ड हुआ। इसके बावजूद श्रद्धालु दूर-दूर से संगम तट पर पहुंचे। डीएम सुहास एलवाई ने बताया- शाम 5 बजे तक संगम समेत 18 घाटों में करीब 32 लाख लोगों ने स्नान किया है।

      - मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएस ओझा का कहना है, ''उत्तराखंड व कश्मीर में हो रही बर्फबारी की वजह से ठंड अभी और बढ़ेगी। पहाड़ी इलाकों से आ रही पछुआ हवाओं ने ठंड बढ़ा दी है।

      - दूसरी वजह यह भी है सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध की तरफ चला गया है। इसलिए सूर्य की किरणें 23 ℃ का कोण बनाते हुए गंगा के मैदानी इलाकों में आ रही हैं।''

      - बता दें, पिछले 11 सालों में दिन का सबसे कम तापमान 28 जनवरी 2014 को 25℃ रिकॉर्ड हुआ था।

      ये हैं मान्यताएं

      -ऐसी मान्यता है कि कल्पवास करने के लिए 33 करोड़ देवी-देवता भी आते हैं और कल्पवास करने वालों किसी न किसी रूप में दर्कोशन देते हैं।

      -महानिर्वाणी अखाड़े के महंत स्वामी नित्यानन्द गिरी के मुताबिक, कल्पवास करने वाले मानव को जीते जी मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति को फिर किसी तीर्थ जाने की जरूरत नहीं होती।

      पौष पूर्णिमा स्नान की समयावधि

      - ज्योतिषाचार्य राम नरेश त्रिपाठी के मुताबिक, ''पौष पूर्णिमा 1 जनवरी सोमवार को दिन में 11:04 मिनट पर लग गई, जो कि 2 जनवरी की सुबह 8:43 बजे तक रही।''

      - ''कल्पवासी सिर्फ एक समय भोजन और दिन में तीन बार स्नान करते हैं। दान का क्रम भी चलता है। ऐसा इसलिए क्योंकि प्रयाग में दान का काफी महत्व है।''

      - भारतीय विद्या भवन ज्योतिष संकाय के प्राचार्य ज्योतिषाचार्य पंडित त्रिवेणी प्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक, ''पौष पूर्णिमा व अन्य स्नान पर्वो के बाद यथासंभव दान करना चाहिए। इसमें अन्न, काला तिल, ऊन, वस्त्र व बर्तन का दान काफी पुण्यकारी रहता है।''

      माघ मेला क्षेत्र की ये है ताना-बाना

      - 5 लाख कल्पवासी मेला क्षेत्र में एक महीने रहेंगे।

      - 18 घाट स्नान के लिए बनाए गए हैं।

      - मेला के 6 प्रमुख स्नान पर्व हैं।

      - 5 पांटून पुलों की कुल संख्या है।

      ये हैं प्रमुख स्नान पर्व

      पौष पूर्णिमा02 जनवरी 201850 लाख
      मकर संक्रांति14 जनवरी75 लाख
      मौनी अमावस्या16 जनवरी1.5 करोड़ से 2 करोड़
      बसंत पंचमी22 जनवरी60 लाख
      माघी पूर्णिमा31 जनवरी45 लाख
      महाशिवरात्रि13 फरवरी15 लाख

      ​13 अखाड़ों संग किन्नर अखाड़ा भी करेगा संगम स्नान

      -इस बार माघ मेले में मौनी अमावस्या पर दूसरी बार 13 मान्य अखाड़ों के साथ किन्नर अखाड़े के सारे सदस्य भी संगम में स्नान करेंगे।

      -किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी पौष पूर्णिमा के बाद माघ मेला क्षेत्र में पदार्पण करेंगे।

      -माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगदगुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, देवतीर्थ स्वामी अधोक्षजानंद सरस्वती सहित सैकड़ों साधु संत मौजूद रहेंगे। इस बार माघ मास के हर प्रमुख स्नान को अगले साल 2019 में लगने वाले कुम्भ मेले के रिहर्सल के रूप में देखा जा रहा है।

      प्रयागराज में होते हैं 2 प्रकार के कल्पवास

      - पहला चंद्रमास और दूसरा शौर्य मास का कल्पवास होता है। पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक चंद्रमास का कल्पवास होता है।

      - वहीं, मकर संक्रांति से कुंभ संक्रांति तक शौर्य मास का कल्पवास होता है। जो कल्पवासी पौष पूर्णिमा पर आ जाते है, वो माघी पूर्णिमा पर आखिरी स्नान करके वापस लौटते हैं।

      - दूसरी तरफ, जो कल्पवासी मकर संक्रांति पर संगम क्षेत्र में आते हैं, जो महाशिवरात्रि के दिन आखिरी स्नान करके वापस लौटते हैं। इसे शौर्य मास का कल्पवास कहते हैं।

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      5 लाख कल्पवासी मेला क्षेत्र में एक महीने रहेंगे।
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      12 डिग्री सेल्सियस की कड़ाके की ठंड में भी 32 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
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      कल्पवासियों से लेकर साधू-संत सभी डुबकी लगाने संगम तट पर डेरा जमा हुए हैं।
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      कल्पवासी सिर्फ एक समय भोजन और दिन में तीन बार स्नान करते हैं।
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