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जब अखिलेश बने थे CM, उनकी जगह भरने उतरी थीं डिंपल-ऐसा था रिजल्ट

इस बार उपचुनावों की कैंपेनिंग के दौरान गायब रहीं डिंपल यादव।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 12:47 PM IST

इलाहाबाद. लोकसभा उपचुनाव में फूलपुर सीट से समाजवादी पार्टी रूलिंग बीजेपी को मात दे दी। सपा चीफ अखिलेश यादव ने इस बार चुनाव में अकेले ही कैंपेन करने का फैसला किया और इसका इम्पैक्ट दिख रहा है। 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनावों में उनकी वाइफ डिंपल यादव भी कैंपेनिंग में उतरी थीं, लेकिन इस साल के बायइलेक्शन्स में वो पूरी तरह गायब दिखीं। यही नहीं, अखिलेश डिंपल के गढ़ कन्नौज में भी अकेले ही जन सभाएं करते नजर आए। DainikBhaskar.com यूपी के पूर्व सीएम की वाइफ डिंपल के बारे में अपने रीडर्स को बता रहा है।

2012 में अखिलेश की जगह भरने के लिए की पॉलिटिक्स में एंट्री

- डिंपल ने चार साल की डेटिंग के बाद अखिलेश से साल 1999 में शादी की। तब डिंपल की छवि एक शर्मीली बहू की थी जो घर से बाहर नहीं निकलती।
- 2012 में जब अखिलेश को सीएम बनने के लिए लोकसभा सीट से इस्तीफा देना पड़ा, तो उन्होंने खाली हुई कन्नौज सीट से डिंपल को उम्मीदवार बनाया। डिंपल ने निर्विरोध जीत दर्ज की और पहली बार सांसद बनीं।

MP बनते ही बनाए थे रिकॉर्ड्स


- डिंपल निर्विरोध सांसद बनने वाली देश की 44वीं पॉलिटिशियन बनी थीं। बीजेपी, कांग्रेस की तरफ से किसी कैंडिडेट का नॉमिनेशन नहीं आया था।
- यूपी की पॉलिटिक्स में यह कारनामा करने वाली वो पहली महिला और चौथी नेत्री थीं।
- डिंपल देश की एकमात्र ऐसी MP थीं, जिनके पति सीएम थे।
- यही नहीं, वो एकमात्र ऐसी एमपी भी रहीं जिनके ससुर उसी सदन में सांसद हों।


उड़ा था मजाक


- डिंपल ने जब संसद में पहली बार स्पीच दी, तो उनकी लड़खड़ाती भाषा का जमकर मजाक उड़ा। इंटरनेट पर उनकी स्पीच को मजाकिया अंदाज में परोसा गया। तब से डिंपल की छवि एक सीधी-सी नेता की बन गई।

2017 में दिखा नया रंग

- इस साल के यूपी विधान सभा चुनाव में डिंपल का अलग रूप देखने को मिला। उन्होंने फैमिली विवाद को बेहतरीन ढंग से हैंडल किया। वो सपा की स्टार कैंपेनर साबित हुईं। उन्होंने मोदी से लेकर बीजेपी के हर बड़े नेता के बयानों पर पलटवार करते हुए बेहतरीन नेत्री होने का सबूत दिया।

जया के साथ आईं नजर

- हाल ही में जया बच्चन के राज्यसभा नॉमिनेशन्स के टाइम पर वो उनके साथ मौजूद रहीं।
- वहां सहाराश्री सुब्रत रॉय भी आए थे। डिंपल ने पार्टी की रिस्पॉन्सिबिलिटी संभालते हुए तुरंत उनके लिए कुर्सी छोड़ दी और दूसरी सीट पर शिफ्ट हो गईं, जिससे सुब्रत रॉय आगे आकर बैठ सकें।

डिंपल 21 साल की उम्र में अखिलेश यादव की जीवनसंगिनी बनी थीं। दोनों 24 नवंबर 1999 को परिणय सूत्र में बंधे। डिंपल 21 साल की उम्र में अखिलेश यादव की जीवनसंगिनी बनी थीं। दोनों 24 नवंबर 1999 को परिणय सूत्र में बंधे।


 

 

 

 

2011 तक डिंपल हाउस वाइफ थीं। भाषण देना तो दूर, वो ज्यादा घर से बाहर तक नहीं जाती थीं। 2011 तक डिंपल हाउस वाइफ थीं। भाषण देना तो दूर, वो ज्यादा घर से बाहर तक नहीं जाती थीं।
2012 में जब अखिलेश यादव को सीएम बनाया गया, तो उन्होंने अपनी कन्नौज लोकसभा सीट से डिंपल को उतारा। 2012 में जब अखिलेश यादव को सीएम बनाया गया, तो उन्होंने अपनी कन्नौज लोकसभा सीट से डिंपल को उतारा।
2012 के बाई-इलेक्शन में विनर बनने के बाद डिंपल ने 2014 का लोकसभा चुनाव भी जीता। 2012 के बाई-इलेक्शन में विनर बनने के बाद डिंपल ने 2014 का लोकसभा चुनाव भी जीता।