--Advertisement--

HC से BSNL के CGM को झटका, 3 महीने में भरना पड़ेगा 10 लाख का हर्जाना

हाईकोर्ट ने बीएसएनएल के चीफ जनरल मैनेजर पर लगाया मृतक आश्रित को 10 लाख रुपए दने का हर्जाना।

Danik Bhaskar | Dec 31, 2017, 10:55 AM IST

इलाहाबाद(यूपी). हाईकोर्ट ने भारत संचार निगम लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक (लखनऊ) को आदेश दिया है कि मृतक आश्रित को 10 लाख रुपए का भुगतान 3 महीने में करे। कोर्ट ने यह आदेश नियुक्ति देने में देरी के चलते आश्रित की आयु 50 साल पार हो जाने की वजह से दिया है। विभाग का कहना था, ''50 साल की आयु के बाद नियुक्ति नहीं की जा सकती। जिसके बाद यह आदेश जस्टिस रणविजय सिंह और जस्टिस नीरज तिवारी की खंडपीठ ने बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।'' 3 महीने में देने होंगे 10 लाख, नहीं तो विभाग से वसूला जाए 6 फीसदी ब्याज...


- सीजीएम ने केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण इलाहाबाद के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें विपक्षी विद्या प्रसाद को मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने का आदेश दिया गया था। लेकिन कोर्ट ने उस आदेश पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।

- कोर्ट का कहना था, ''विभाग ने नियुक्ति पर विचार करने में 2 साल की देरी की और नए नियम के आधार पर निरस्त कर दिया। जबकि कर्मचारी की मृत्यु के समय के नियम के तहत विचार करना चाहिए था।''

- ''आश्रित की उम्र 50 साल से ज्यादा हो गई है। अगर उसे खाली हाथ लौट जाने दिया गया तो इस लम्बी कानूनी लड़ाई का कोई मतलब नहीं रह जाएगा और न्यायपालिका के प्रति लोगों का विश्वास कम होगा।''

- ''यदि आश्रित को 3 महीने में 10 लाख नहीं मिलते तो विभाग से 6 फीसदी ब्याज के साथ धन राशि वसूल की जाय।''

क्या था पूरा मामला...

- विद्या प्रसाद के पिता लाइनमैन के पद पर कार्यरत थे। 7 फरवरी 2003 को सेवा काल में ही इनकी मौत हो गई।

- आश्रित ने नियुक्ति की मांग में अर्जी दाखिल की। जिसकी खामियों को दुरुस्त करने के बाद अर्जी निरस्त करने में विभाग ने 2 साल बिता दिए।

- यही नहीं नए नियम के आधार पर नियुक्ति करने से इंकार कर दिया गया। जिसे कैट इलाहाबाद में चुनौती दी गई।

- कैट ने आश्रित कोटे में नियुक्ति का निर्देश दिया। फिर इस आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कैट के आदेश को सही माना, लेकिन विपक्षी की उम्र 50 साल से ज्यादा हो गई थी, इसलिए विभाग को आदेश दिया कि वह आश्रित को 10 लाख रुपए का भुगतान करे।

- वहीं, विभाग की तरफ से कहा गया था, ''50 साल से ज्यादा की उम्र पर नियुक्ति करने का नियम नहीं है। ऐसे में कोर्ट ऐसा आदेश नहीं दे सकता। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।