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हाईकोर्ट NEWS: लोक सेवा आयोग के परीक्षाओं की CBI करेगी जांच

कोर्ट ने आयोग के अधिवक्ता को इस जवाब का प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। अगली सुनवाई 6 फरवरी को होगी।

Danik Bhaskar | Jan 18, 2018, 07:46 PM IST

इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश लोक सेवा आयोग की प‍िछले 5 साल की भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई से जांच कराने को लेकर गुरुवार को स्पष्ट किया है कि सीबीआई अपना काम करेगी। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई केवल वर्तमान अध्यक्ष व सदस्यों से फिलहाल पूछताछ नहीं करेगी। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में आज प्रदेश सरकार और सीबीआई की तरफ से जवाब दाखिल किया गया। कोर्ट ने आयोग के अधिवक्ता को इस जवाब का प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। याचिका पर कोर्ट अगली सुनवाई 6 फरवरी को करेगी। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...


-यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले व न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की तरफ से दाखिल याचिका पर दिया है।

-राज्य सरकार ने जवाबी हलफनामे में उन परिस्थितियों का ब्यौरा दिया है जिनके चलते 2012 से 2017 तक की लोक सेवा आयोग के परीक्षाओं की जांच सीबीआई से कराने का निर्णय लिया गया है।

-केन्द्र सरकार व सीबीआई की तरफ से कहा गया कि सेवा से हटाने के अलावा अन्य कार्रवाई करने का आदेश जारी करने का सरकार को अधिकार है।

-केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार द्वारा भर्तियों में व्यापक अनियमितता की जांच कराने की भेजी गई संस्तुति पर सीबीआई जांच का आदेश दिया है, जो नियमानुसार व विधि सम्मत है।

-कोर्ट ने जानना चाहा था कि किन तथ्यों के आधार पर जांच कराने का निर्णय लिया गया। इसके क्या आधार हैं? जबकि याची का कहना था कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसकी जांच नहीं कराई जा सकती। इसमें संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। याचिका की सुनवाई 6 फरवरी को होगी।

2. प्राइमरी टीचर्स के प्रशिक्षण में ढिलाई पर कोर्ट सख्त, मांगा जानकारी

इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों के अप्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षित करने के मामले में सरकारी उदासीनता पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है और कहा है कि याचिका पर सितंबर 2017 में जवाब मांगा गया था, लेक‍िन सरकार अभी तक अपना रूख स्पष्ट नहीं कर सकी है। कोर्ट ने अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता से कल शुक्रवार को 10 बजे सरकार द्वारा गैर प्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षित करने के लिए उठाये गये कदमों की जानकारी पेश करने को कहा। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...


-यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी.भोसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने यूपी बेसिक शिक्षक संघ की याचिका पर दिया है।

-याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एन सिंह भारत सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी व प्रदेश सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानन्द पाण्डेय ने पक्ष रखा।

-मालूम हो कि केन्द्र सरकार ने आदेश जारी कर राज्य सरकारों को 31 मार्च 2019 तक प्राइमरी स्कूल के अप्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षित करा लेने का निर्देश देते हुए कहा है कि एक अप्रैल 2019 से सभी गैर प्रशिक्षित अध्यापकों को सेवा से हटा दिया जाएगा।

-याची का कहना है कि गौतमबुद्ध नगर में एन.आई.ओ.एस से प्रशिक्षण दिया जा सकता है और राज्य सरकार ने अभी तक प्रशिक्षण देने के आदेश जारी नहीं किए हैं।

-सरकार की ढिलाई के चलते याची संघ के सदस्यों की सेवा प्रभावित हो सकती है। याचिका में गैर प्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षण दिलाये जाने की मांग की गई है।

-कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल न करने व ठोस जानकारी न देने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रमुख सचिव हाजिर होकर बताए कि सरकार क्यों कदम नहीं उठा रही।

-सरकारी अधिवक्ता ने उठाये गए कदमों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समय मांगा। सुनवाई 19 जनवरी को भी होगी।