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अमृत काल से शुरु हुआ गंगा में आस्था की डुबकी, लाखों लोग कर चुके स्नान

ठंड कम होने से बढ़ी श्रद्धालुओ की संख्या, एक करोड़ से ज्यादा लोगों के स्नान कराने की तैयारी में प्रशासन।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 10:09 AM IST

इलाहाबाद(यूपी). माघ मेले के सबसे प्रमुख और बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या(16 जनवरी) पर करीब 2 करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए आंकड़े के मुताबिक, इस बार पिछले 6 साल का रिकॉर्ड टूटा है। दरअसल, मान्यता यह है कि इस दिन पवित्र नदी और मां का दर्जा रखने वाली गंगा मैया का जल अमृत बन जाता है। बताया जाता है कि इस दिन व्रती को मौन धारण करते हुए दिन भर मुनियों सा आचरण करना पड़ता है, इसलिए इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। मकर संक्रांति का भी टूटा रिकॉर्ड ...

- माघमेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिन भर कमिश्नर आशीष गोयल, डीएम सुहास एलवाई, एसएसपी आकाश कुलहरि, एसपी अतुल सिंह, माघमेला प्रभारी एडीएम राजीव कुमार राय समेत अन्य अफसर मानीटरिंग करते रहे।

- इस दौरान माघ मेला क्षेत्र में अपनों से बिछड़े सात हजार चार सौ 25 महिला एवं पुरुष तथा 19 बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया गया।

- माघ मेला प्रभारी एडीएम राजीव कुमार राय ने बताया, ''शासन का जो अंदाजा था उसके मुताबिक डेढ़ करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद थी। लेकिन यह बढ़कर दो करोड़ के पार हो गया।''

- मकर संक्रांति में भी मात्र 75 लाख की ही उम्मीद थी, जो कि एक करोड़ 55 लाख पहुंच गया। मौसम अच्छा होने के साथ-साथ मेले की व्यवस्था इतनी बढ़िया थी।''

मौनी अमावस्या पर पिछले​ 6 साल का रिकॉर्ड टूटा

साल आकड़ा
2013 एक करोड़ 70 लाख
2014 एक करोड़
2015 90 लाख
2016 1 करोड़ 10 लाख
2017 1 करोड़ 25 लाख
2018 2 करोड़

मौनी अमावस्या का होता है ये है महत्व

- गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती के तट पर मंगलवार सुबह 5 बजे से ही स्नान शुरू हो गया है। जिला प्रशासन के मुताबिक, दोपहर एक बजे तक 65 लाख लोगों ने गंगा स्नान कर लिया है।

- माघ मास का ये दूसरा सबसे बड़ा स्नान है जबकि कल्पवास करने वालो के लिए तीसरा स्नान है। ये आंकड़ा शाम तक एक करोड़ के पार हो जाने का अनुमान जताया जा रहा है।
- महानिर्वाणी कहने के सन्त स्वामी नित्यानन्द गिरी ने कहा, ''साधु, संत, ऋषि, महात्मा सभी प्राचीन समय से प्रवचन सुनाते रहे हैं कि मन पर नियंत्रण रखना चाहिए।''
- ''मौनी अमावस्या का भी यही संदेश है कि इस दिन मौन व्रत धारण कर मन को संयमित किया जाए। मन ही मन ईश्वर के नाम का स्मरण किया जाए, उनका जाप किया जाए। यह एक प्रकार से मन को साधने की यौगिक क्रिया भी है।''
- ''मान्यता यह भी है कि यदि किसी के लिये मौन रहना संभव न हो तो वह अपने विचारों में किसी भी प्रकार की मलिनता न आने देने, किसी के प्रति कोई कटुवचन न निकले तो भी मौनी अमावस्या का व्रत उसके लिए सफल होता है।''
- ''शास्त्रों में इस दिन दान-पुण्य करने के महत्व को बहुत ही अधिक फलदाई बताया है।''
- ''तीर्थराज प्रयाग में स्नान करने से पहले मन में गंगा मैया का ध्यान करे, स्वच्छ जल में गंगाजल के कुछ छींटे देकर फिर स्नान करें। एक मान्यता के अनुसार इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है, जिसके कारण इस दिन को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है।''

मौनी अमावस्या में कैसे करे व्रत पूजा
- ''व्रत उपवास के लिए सबसे पहली और अहम जरूरत होती है। तन मन का स्वच्छ होना, अपने तन मन की बाह्य और आंतरिक स्वच्छता, निर्मलता के लिए ही इस दिन मौन व्रत रखा जाता है।''
- ''दिन भर प्रभु का नाम मन ही मन सुमिरन किया जाता है। साथ ही प्रात:काल पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान किया जाता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल, आंवला, वस्त्रादि किसी गरीब ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान दिया जाता है।''

मौनी अमावस्या का मुहूर्त
- अमावस्या तिथि - मंगलवार, 16 जनवरी 2018
- अमावस्या तिथि आरंभ - 05:11 बजे से (16 जनवरी 2018)
- अमावस्या तिथि समाप्त - 07:47 बजे (17 जनवरी 2018)