--Advertisement--

शहीद के पेट मे प्लांट कर दिया था 10 Kg का बम, इस हाल में थी Wife

आर्मी डे के मौके पर DainikBhaskar.com से बातचीत में शहीद की पत्नी का छलका दर्द।

Danik Bhaskar | Jan 14, 2018, 09:00 PM IST
पत्नी ने बताया- शहादत से 15 दिन प पत्नी ने बताया- शहादत से 15 दिन प

इलाहाबाद(यूपी). 15 जनवरी को आर्मी डे है। इलाहाबाद के शहीद सीआरपीएफ जवान बाबूलाल पटेल की फैमिली से DainikBhaskar.com ने बात की। शहीद की पत्नी ने बताया, ''शहादत से 15 दिन पहले ही पति को प्रेग्नेंसी के बारे में बताया था। तब वो बहुत खुश थे। उनका सपना था- उन्हें संतान पापा कहकर बुलाए, लेकिन वो अधूरा ही रह गया।'' फोन कर कहा- आ रहा हूं घर, लेकिन आया पार्थिव शरीर...

- गंगापार के नावबंगज थानाक्षेत्र स्थित मलाक बलऊ गांव के सीआरपीएफ जवान बाबूलाल पटेल की शहादत के 5 साल हो गए।
- शहीद मां जगपती देवी और पिता मुन्नीलाल पटेल की इकलौती संतान था। 2006 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ।
- पिता का कहना है, ''नक्सल प्रभावित इलाके में उसकी पोस्टिंग हुई। लगभग 6 साल तक वीरता के साथ देश सेवा की।''
- ''7 जनवरी 2013 को झारखंड के लातेहार में नक्सलियों ने हमला कर दिया। इससे पहले बेटे का एक कॉल आया था। बोल रहा था कि जल्द ही घर आने वाला हूं, लेकिन उसकी शहीद होने की खबर मिली।''

- ''इकलौते बेटे के पार्थिव शरीर देखते ही उसकी मां टूट गई। ऐसा लगा कि हाथ से जीवन ही फिसल गया हो।''

लोग बुलाते हैं शहीद की मां
- बेटे की यादों में खोई मां का कहना है, ''वो बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल आता था। हाईस्कूल पास करते ही फौज की नौकरी के बारे में बात करता था।''
- ''सेना में जाने की तैयारी करने में लगा रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बाद भी, सीआरपीएफ में भर्ती होने का सपना पूरा किया।''
- ''उसे बचपन से ही शहीदों की कहानी सुनना पसंद था। लोग अब शहीद की मां के नाम से बुलाते हैं। यह सुनकर आंखों में आंसू आ जाते हैं।''

- ''क्या पता था कि वो एक दिन ऐसे ही छोड़कर चला जाएगा। हमारा एक मात्र सहारा था और वो भी चला गया। देश की सलामती बेटे के शहीद होने से अगर है तो हम हर तकलीफ सहने को तैयार हैं।''


प्रेग्नेंट Wife को मिली थी पति की मौत की खबर

- साल 2008 में रेखा से शहीद की शादी हुई थी। पति की शहादत के 6 महीने बाद 2 जुलाई 2013 को बेटे अंश को दिया, जो अब साढ़े 4 साल का हो गया है।

- पत्नी ने बताया, ''शहादत से 15 दिन पहले ही पति को प्रेग्नेंसी के बारे में बताया था। तब वो बहुत खुश हुए थे।''
- ''सास-ससुर और बेटे की जिम्मेदारी में खुद को ढाले हुए हूं। पति की यादों के सहारे जिंदगी बिता रही हूं।''

शहीद के पेट मे प्लांट कर दिया था 10 Kg का बम
- मलाक बलऊ गांववालों के लिए 28 दिसंबर 2016 की सुबह दशहत भरी थी। झारखंड के लातेहार के कटिया जंगल में नक्सलियों ने हमला किया।
- 13 जवान शहीद हुए, जिसमें बाबूलाल पटेल भी शामिल थे। नक्सलियों ने बाबूलाल की हत्या के बाद उनके पेट में 10kg बम प्लांट किया था।
- उनका प्लान था कि पोस्टमॉर्टम के दौरान भारी विस्फोट कर कई लोगों को मौत के घाट उतार सके। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे नाकाम कर दिया।

क्यों मनाते हैं आर्मी डे?
- आर्मी डे, हर साल 15 जनवरी को लेफ्टिनेंट जनरल (बाद में फील्ड मार्शल) के. एम. करियप्पा के भारतीय थल सेना के मुख्य कमांडर का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- उन्होंने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश राज के समय के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर (कमांडर इन चीफ, भारत) जनरल रॉय बुचर से ये पदभार ग्रहण किया था।
- इस दिन उन सभी बहादुर सेनानियों को सलामी भी दी जाती है, जिन्होंने कभी ना कभी अपने देश और लोगों की सलामती के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर कर दिया।