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जेल में देसी अंडे खाती थीं मायावती, इस वजह से साड़ी छोड़ पहहने लगीं सूट

DainikBhaskar.com ने सरवर हुसैन के जिंदा रहते उनसे बातचीत की थी।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 01:31 PM IST

इलाहाबाद. 15 जनवरी को मायावती 62 साल की हो गईं। इलाहाबाद में नैनी थाना क्षेत्र के बीड़ी वाली गली में एक ऐसा परिवार रहता है, जो मायावती के राजनीतिक शुरुआती दिनों में काफी करीब था। इस परिवार के एक सदस्य ने (जो अब इस दुनिया में नहीं हैं) स्व. सरवर हुसैन ने बसपा सुप्रीमो मायावती की एक दारोगा से जान भी बचाई थी, जो उनकी हत्या करना चाहता था। हालांकि पिछले 20 नवंबर 2017 को सरवर हुसैन ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। DainikBhaskar.com ने सरवर हुसैन के जिंदा रहते उनसे बातचीत की थी।

मायावती जा चुकी हैं जेल
- सरवर हुसैन के मुताबिक, "मायावती के जेल जाने की कहानी शायद ही किसी को पता हो, लेकिन दिसंबर 1991 में वह नैनी सेंट्रल जेल में बंद हो चुकी हैं।"
- ''मामला बुलंदशहर का था। वहां मायावती और एक डीएम के बीच मतपत्र देखने के लिए छीना-झपटी और हाथापाई हो गई थी। इस मामले में माया को बुलंदशहर से इलाहाबाद के नैनी सेंट्रल जेल लाया गया था।''

दारोगा करना चाहता था मायावती का एनकाउंटर, आर्मी वालों ने बचाया
- ''जेल जाने के दौरान लखनऊ हाईकोर्ट में दिसंबर 1991 में मायावती की पेशी हुई थी। लौटते वक्त हम लोग लखनऊ पैसेंजर से इलाहाबाद आ रहे थे। रास्ते में सुबह 4.30 बजे ट्रेन प्रयाग स्टेशन के पास खड़ी हो गई। साथ में चल रहे स्कॉट के दारोगा ने नीचे उतरकर पैदल चलने को कहा।''
- ''रेलवे लाइन क्रॉस करते समय दारोगा ने मायावती की हत्‍या करने के इरादे से अपनी रिवॉल्‍वर निकाल ली। इसके बाद मायावती ने मुझसे कहा- सामने मस्जिद है, लोग इकट्ठा हैं। आवाज लगा दो वरना ये हमें मार डालेगा।''
- ''ट्रेन के उसी कोच में सफर कर रहे आर्मी वालों ने दारोगा को खबरदार करते हुए कहा- गोली मत चलाना। (मायावती ने इस बात का जिक्र सरवर को लिखे खत में भी किया है)।''
- ''आर्मी वालों के कहने पर दारोगा डर गया। इसके बाद मायावती को रिक्शे पर बिठाकर पुलिसलाइन ले जाया गया। वहां मायावती ने दारोगा के खिलाफ शिकायत की। वे वहां से नैनी जेल आ गईं और यहां भी दारोगा के खिलाफ 18 दिसंबर 1991 को जेल सुपरिटेंडेंट को लिखित शिकायत दी थी।'

जब सूट पहनने लगीं मायावती
- ''नैनी जेल से छूटने के बाद मायावती और बसपा के सांसद रहे हरभजन सिंह लाखा हमारे घर आकर एक दिन रहे। घर जाने के बाद 28 जनवरी 1992 को हमें उन्‍होंने एक खत लिखा, जिसमें हमारे काम की तारीफ की।''
- 'उन्‍होंने लिखा- आपके रिश्तेदार का दिया सूट पहना है। अब से हमेशा सूट ही पहनूंगी।''

भाषण देते समय तबीयत हुई खराब
- ''मायावती से हमारी 1985 में मुलाकात हुई थी, जब वो कांशीराम जी के साथ इलाहाबाद आई थीं। उन्होंने ही मुझे मायावती से मिलवाया था। हमारा कांशीराम जी से 'वामशेफ' (एनजीओ) में जुड़ाव हुआ, जहां जंग बहादुर पटेल, भंतु, रघुनाथ, इस्माइल और मैंने साथ में काम करना शुरू किया।''
- ''जब भी मायावती दिल्ली से इलाहाबाद के बड़े स्टेशन आती थीं, मैं ही उन्‍हें रिसीव करने जाता था। मैं अपने पैसे से चाय-पानी कराता था। बसपा ऑफिस ले जाता था। फिर वहां से हम अपने काम पर जाते थे।''
- ''जब 1988-1989 में कांशीराम इलाहाबाद संसदीय क्षेत्र से बीपी सिंह के सामने चुनाव लड़े थे, तब मायावती और कांशीराम तावसी होटल में रुकते थे। मैं उनके लिए घर से भी खाना लेकर जाता था और वो जब भी यहां आती थीं, मैं उनके साथ लगा रहता था।''
- ''एक समय ऐसा भी आया कि मंच पर भाषण देते समय सहसों में बहन जी की तबीयत खराब हो गई। इसके बाद उन्‍होंने मुझसे भाषण देने के लिए कहा। मैंने नौकरी में रहते हुए भाषण दिया, जिस वजह से हमें सस्‍पेंड कर दिया गया था।''

CM बनने के बाद हमें भूल गईं मायावती
- सरवर हुसैन के बेटे अहमद हुसैन बताते हैं- ''मायावती जब पहली बार मुख्यमंत्री बनीं तो लगा कि उन्‍हें हमारी याद आएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद हम लखनऊ गए। उनके ऑफिस में मुलाकात भी करनी चाही तो मिलने नहीं दिया गया।''
- ''कई बार वहां जाता रहा, एक दो बार मुलाकात भी हुई लेकिन केवल आश्वासन ही मिला। मेरे पिता सरवर हुसैन अपने परिवार से ज्‍यादा पार्टी के लिए समर्पित रहे, लेकिन आज तक किसी भी स्तर पर कोई कामयाबी नहीं मिली।''

- ''बीच में जो लोग पार्टी में आए और जिन्‍होंने कुछ भी नहीं किया, वो आज पार्टी के लिए सब कुछ हो गए हैं। हम जैसे समर्पित लोगों को मिलने नहीं दिया जाता है। हमारी बात बहन जी तक पहुंचाई नहीं जा रही है।''
- ''मैं आज बहुत दुखी हूं और सदमें में रहता हूं। हम चाहते हैं कि पैसे लेकर टिकट न दिया जाए और पार्टी के लिए समर्पित लोगों पर ध्यान दिया जाए।''

जेल के रहे 47 दिनों में अब्बा ही रखते थे ध्यान
- ''अब्बा, मायावती को खुदा के बराबर मानते थे। मायावती जब जेल में बंद थी उस 47 दिनों के दौरान, पिताजी उन्हें घर का खाना लेकर जाया करते थे। जेल से बहनजी फरमाइश किया करती थीं, कभी उन्हें देशी अंडे चाहिए होते थे, तो कभी बाजरे की ख‍िचड़ी। पिता जी ये सामान उन्हें रोजाना पहुंचाया करते थे।''
- ''कई बार अब्बा जब किसी काम में बिजी रहते थे, तो मैं खाना लेकर नैनी जेल जाया करता था।''