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अगर चाहते हैं मोक्ष, तो यहां इन दिनों में जरूर करें ये 7 स्नान

माघ महीने के इन 7 स्नानों से मोक्ष की प्राप्ति होती है, जो DainikBhaskar.com आपको बता रहा है।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 09:00 PM IST
फाइल। फाइल।

इलाहाबाद(यूपी). संगम नगरी में एक महीने तक चलने वाला माघ मेला सबसे बड़ा पर्व है। यह हिन्दुओं का सर्वाधिक प्रिय धार्मिक एवं सांस्कृतिक मेला है।इसकी शुरुआत मकर सक्रांति के पहले स्नान से होती है। इस दिन स्नान कर त‌िल के दान और खिचड़ी खाने की परंपरा यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखनाथ मंदिर से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि माघ महीने के इन 7 दिनों में यहां स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, जो DainikBhaskar.com आपको बता रहा है।

गोरखनाथ मंदिर से शुरू हुआ था खिचड़ी का मेला
- डॉ. नागेश दत्त देवेद्य द्विवेदी बताते हैं कि मकर संक्रांत‌ि पर ख‌िचड़ी दान-खान की परंपरा भगवान श‌िव के अवतार बाबा गोरखनाथ की कहानी से जुड़ी है।
- मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को खिलजी से संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था।
- इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते थे। इसपर बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पकाने की सलाह दी।
- यह व्यंजन काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट निकला। साथ ही उनके शरीर में तुरंत ऊर्जा का संचार हुआ।
- नाथ योगियों को यह व्यंजन काफी पसंद आया। बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा।
- गोरखपुर स्थित बाबा गोरखनाथ के मंदिर के पास मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी मेला आरंभ होता है।
- कई दिनों तक चलने वाले इस मेले में बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाया जाता है और इसे भी प्रसाद रूप में वितरित किया जाता है।


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# पहला स्नान : मकर संक्रांति (14/15 जनवरी)
- डॉ. नागेश दत्त देवेद्य द्विवेदी बताते हैं कि इस दिन संगम में स्नान करके तिल, गुड़, ऊनी कपड़े दान करने की परंपरा है। भगवान सूर्य की पूजन-अर्चन कर तिलों के जल से स्नान किया जाता है।

- तिल का ही उबटन लगाया जाता है। तिल से ही हवन होता है और उसे मिले जल का पान, तिल का भोजन एवं तिल का दान किया जाता है।
- माना जाता है कि संगम तट पर स्नान करने से पापों का नाश होता है। काले तिल व काली गाय के दान का भी बहुत महत्व होता है।

# दूसरा स्नान : कृष्ण पक्ष की मौनी अमावस्या (16 जनवरी)
- इस दिन मौन रहकर या मुनियों जैसा आचरण करते हुए त्रिवेणी या गंगा तट पर स्नान-दान की भी मान्यता है।
- इससे सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। धर्माचार्य बताते हैं कि संगम और गंगा का जल अमृत हो जाता है। स्नान के बाद तिल के लड्डू, तिल का तेल आंवला वस्त्रादि का दान करते हैं, इससे मोक्ष मिलता है।

# तीसरा स्नान : बसंत पंचमी (22 जनवरी)
- इस दिन विद्या, बुद्धि, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी को पूजा जाता है।
- ब्रह्म वैवर्त पुराण में इन देवियों का जन्म भगवान श्रीकृष्ण के कंठ से होना बताया गया है।

# चौथा स्नान : अचला सप्तमी (24 जनवरी)
- माघ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी का व्रत रखा जाता है। इसका महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था।
- इस दिन स्नान-दान, पितरों के तर्पण व सूर्य पूजा एवं वस्त्रादि दान करने से व्यक्ति बैकुंठ में जाता है।
- माना जाता है कि इस दिन के व्रत रखने से साल भर रविवार के दिन रखे व्रतों के समान पुण्य और मोक्ष मिलता है।
- रविवार के दिन पडऩे वाली सप्तमी को अचला भानू सप्तमी भी कहा जाता है और इसे बहुत शुभ माना जाता है।

# पांचवा स्नान : भीमाष्टमी (25 जनवरी)
- शुक्ल पक्ष की ही अष्टमी को भीमाष्टमी कहते हैं। माना जाता है कि इस दिन भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर प्राण त्याग किया था।
- मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान व माधव पूजा से मनुष्य मात्र के सब पाप कट जाते हैं।

# छठवां स्नान : माघ पूर्णिमा (31 जनवरी)
- माघी पूर्णिमा का महत्व सर्वाधिक माना गया है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होकर अमृत की वर्षा करते हैं।
- इसके अंश वृक्षोंए नदियोंए जलाशयों और वनस्पतियों में होते हैं। इसलिए इनमें सारे रोगों से मुक्ति दिलाने वाले गुण उत्पन्न होते हैं।
- मान्यता यह भी है कि माघ पूर्णिमा में स्नान और दान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है।


# सातवां स्नान : महाशिवरात्रि (13 फरवरी)
- इस दिन संगम के आखिरी स्नान के बाद अक्षयवट का पूजन-अर्जन करके बचे हुए कल्पवासी एवं अन्य लोग अपने-अपने घर की ओर प्रस्थान करते हैं।