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गंगा तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मकर संक्रांति पर 85 लाख लोगों ने लगाई डुबकी

रविवार को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश किया। इसी के साथ मकर संक्रांति का पर्व शुरू हो गया।

Danik Bhaskar | Jan 15, 2018, 08:40 AM IST
मकर संक्रांति स्नान रविवार को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर गया। इसी के साथ पर्व शुरू हो गया, जो सोमवार तक चला। मकर संक्रांति स्नान रविवार को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर गया। इसी के साथ पर्व शुरू हो गया, जो सोमवार तक चला।

इलाहाबाद(यूपी). माघ मेले के दूसरे मुख्य स्नान पर्व मकर संक्रांति पर 1.55 करोड़ श्रद्धालुओं आस्था की डुबकी लगाई। इस बार यह स्नान दो दिन तक हुआ। रविवार को 75 लाख और सोमवार को 80 लाख लोगों ने एक साथ संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर स्नान किया। मेला प्रभारी राजीव राय के मुताबिक, इस बार पिछले 6 साल का रिकॉर्ड टूटा है। दो दिन तक चला मकर संक्रांति पर्व का स्नान...

- 14 जनवरी को सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर गया। इसी के साथ मकर संक्रांति का पर्व शुरू हो गया, जो सोमवार तक चला। सुबह 3 बजे से ही लोग स्नान करने पहुंचते रहे।

- पर्व मनाने के लिए घरों-मठों में तैयारियां की गई। लोग पुण्य की डुबकी लगाने के बाद तिल के लड्डू, खिचड़ी आदि का दान किया गया। इस दौरान पतंगबाजी भी जमकर देखने को मिली।

- श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चाकचौबंद व्यवस्था गई थी। कमांडो आरएएफ के जवान मुस्तैदी से चप्पे-चप्पे पर तैनात थे।

- पुलिस, प्रशासन के अतिरिक्त नागरिक सुरक्षा कोर के स्वयंसेवक भी सहयोग के लिए स्नानघाटों सहित पूरे मेला क्षेत्र में डटे हैं।

मकर संक्रांति पर पिछले​ 6 साल का रिकॉर्ड टूटा

साल आकड़ा
2013 90 लाख
2014 70 लाख
2015 73 लाख
2016 70 से 75 लाख
2017 75 लाख
2018 1.55 करोड़


क्या है विशेष महत्व ?

- 'प्रयागे माघमासे तु त्र्यहं स्नानरूप यद्धवेत। दशाश्वघसहस्त्रेण तत्फलम् लभते भुवि।।' अर्थात प्रयाग में माघ मास के अन्दर तीन बार स्नान करने से जो फल मिलता है, वो पृथ्वी में 10 हजार अश्वमेध यज्ञ करने से भी प्राप्त नहीं होता है। प्रयाग का धार्मिक, पौराणिक, अलौकिक और आध्यात्मिक महत्व आज के भौतिकवादी युग में भी कम नहीं हुआ है। मन में बैठा पाप का डर और पुण्य, मोक्ष, संकटों से मुक्ति की कामना लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ स्वमेव संगम की ओर खिंची चली आती है। इनमें लाखों श्रद्धालु ऐसे हैं, जो पूरे माघ मास संगम तट पर रह कर स्नान, दान, पूजा, पाठ के साथ धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं को कल्पवासी कहा जाता है।

- डॉ. त्रिवेणी प्रसाद त्रिपाठी, प्राचार्य भारतीय विद्या भवन, ज्योतिष संकाय, इलाहाबाद के अनुसार- ब्रह्मा, विष्णु, महेश, रुद्र, आदित्य तथा मरुद गण माघ मास में प्रयागराज के लिए गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम पर गमन करते हैं। तीर्थ राज प्रयाग में स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ करने जैसा फल प्राप्त होता है और मनुष्य सर्वथा पवित्र हो जाता है।

क्या हैं कल्पवास के नियम ?

- कल्पवास के अपने नियम हैं, जिसमें हमारे जीवन के नियम बनते हैं। वृंदावन से आए स्वामी नित्यानंद गिरी बताते हैं कि हमें क्या खाना चाहिए, कब और क्या करना चाहिए, हमें लोगों के लिए कैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए, संत के सान्निध्य में कैसे बैठना चाहिए, धार्मिक आयोजनों, कथाओं और यज्ञों में कैसे भागीदार बनना चाहिए, यह सहज ज्ञान कल्पवासी को ही हो पाता है।

क्या कहना है प्रशासन का ?

- माघ मेला एसपी नीरज पांडेय के मुताबिक, सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है, श्रद्धालुओं के स्नान का क्रम सुबह से ही जारी हो गया था।

उदयातिथि होने के चलते स्नानघाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। उदयातिथि होने के चलते स्नानघाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा घाट पर डुबकी लगाने पहुंचे। लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा घाट पर डुबकी लगाने पहुंचे।
स्नान के बाद घाट पर ही पूजा पाठ कर तिल व खिचड़ी का दान भी किया। स्नान के बाद घाट पर ही पूजा पाठ कर तिल व खिचड़ी का दान भी किया।
संगम तट। संगम तट।