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कंकालों के ऊपर बना है ये किला, 3 नदियों के बीच इसे बनाने में लगे थे 45 साल

इलाहाबाद में अकबर ने संगम तट पर किला बनवाया था। जिसमें 20 हजार मजदूरों ने काम किया था।

सूर्य प्रकाश त्रिपाठी | Last Modified - Jan 10, 2018, 09:35 AM IST

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    इलाहाबाद में अकबर ने नक्काशी के पत्थर से किला बनवाया था। (फाइल)

    इलाहाबाद.प्रयाग नगरी में माघ मेला के दौरान संगम तट पर जमकर श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। उसी संगम तट पर मुगल शासक अकबर ने भव्य किले का निमार्ण कराया था। बताया जाता है कि चीनी यात्री ह्वेनसांग ने यहां तालाब में कंकाल देखा था। जिसके बारे में उन्होंने अकबर को बताया था। इसके बाद मुगल बादशाह ने उसी स्थान पर ये किला बना दिया।DainikBhaskar.com अपने पाठकों को इस किले के बारे में बताने जा रहा है।

    नक्काशीदार पत्थरों से बना है ये किला...

    - बताया जाता है कि 644 ईसा पूर्व में चीनी यात्री ह्वेनसांग यहां आया था। तब कामकूप तालाब मैं इंसानी नरकंकाल देखकर दुखी हो गया था। उसने अपनी किताब में भी इसका जिक्र किया था। उसके जाने के बाद ही मुगल सम्राट अकबर ने यहां किला बनवाया।

    - इस किले में स्थापत्य कला के साथ ही अपने गर्भ में जहांगीर, अक्षयवट, अशोक स्तंभ व अंग्रेजों की गतिविधियों की तमाम अबूझ कहानियों को भी समेटे हुए है। जिसे जानने की जिज्ञासा इतिहासकारों को भी हमेशा से रही है।
    - ये किला अपनी विशिष्ट बनावट, निर्माण और शिल्पकारिता के लिए जाना जाता है। नक्काशीदार पत्थरों की विशायलकाय दीवार से यमुना की लहरे टकराती है। इसके अंदर पातालपुरी में कुल 44 देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जहां लोग आज भी पूजा पाठ करते हैं।

    20 हजार मजदूर ने मिलकर बनाया ये किला
    - समकालीन इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा है कि इसकी नींव 1583 में रखी गई। उस समय करीब 45 साल 05 महीने 10 दिनों तक इसका निर्माण कार्य चला था।
    - इसे बनाने में करीब 20 हजार मजदूरों ने काम किया था। किले का कुल क्षेत्रफल 30 हजार वर्ग फुट है। इसके निर्माण में कुल लागत 6 करोड़, 17 लाख, 20 हजार 214 रुपए आई थी।
    - कुछ इतिहासकारों का दावा है कि किले में निर्माण कार्य 1574 से पहले शुरू हो गया था। अकबर की इच्छा थी कि इलाहाबाद के पास ही एक शहर और सैन्य छावनी बनाई जाए। वह इस किले को अपने बेस के रूप में इस्तेमाल करना चाहता था।

    अनियमित नक्शे से हुआ था निर्माण
    - नदी की कटान से यहां की भौगोलिक स्थिति स्थिर नहीं थी। जिसकी वजह से इसका नक्शा अनियमित ढंग से तैयार किया गया था। अबुल फजल ने लिखते हैं, ''अनियमित नक्शे पर किले का निर्माण कराना ही इसकी विशेषता है।''
    - ''1583 में अकबर ने एक बार इस किले का निरीक्षण किया था, इसलिए उसे ही किले का निर्माण काल मान लिया जाता है। अकबर इसी स्थान पर 4 किलों के एक समूह का निर्माण करना चाहता था। लेकिन एक ही किले के निर्माण में इतने वर्ष लग गए, तब तक अकबर की मौत हो गई थी।''
    - ''अकबर के साथ आए लोगों ने किले से थोड़ा दूर भवन बनवाया, जिससे एक नए शहर को बसाने में असानी हुई। इस किले को 4 भागों में बांटा गया है।''
    - ''पहला भाग खूबसूरत आवास है, जो फैले हुए उद्यानों के बीच में है। यह भाग बादशाह का आवासीय हिस्सा माना जाता है। दूसरे और तीसरे भाग में अकबर का शाही हरम था और नौकर चाकर की रहने की व्यवस्था थी।''
    - ''चौथे भाग में सैनिकों के लिए आवास बनाए गए थे। इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण राजा टोडरमल, सईद खान, मुखलिस खान, राय भरतदीन, प्रयागदास मुंशी की देख-रेख में हुआ था।''

    किला में टिकी है आर्मी
    - 1773 में इस किले पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया। इससे पहले 1765 में बंगाल के नवाब शुजाउद्दौला के हाथ 50 लाख रुपए में बेच दिया। 1798 में नवाब शाजत अली और अंग्रेजों में एक संधि कर ली।
    - उसके बाद किला फिर अंग्रेजों के कब्जे में आ गया। आजादी के बाद सरकार ने किले पर अधिकार किया। किले में पारसी भाषा में एक शिलालेख भी है। जिसमें किले की नींव पड़ने का 1583 दिया है।
    - किले में एक जनानी महल है, जिसे जहांगीर महल भी कहते हैं। अंग्रेजों ने भी इसे अपने माकूल बनाने के लिए काफी तोड़फोड़ की। इससे किले को काफी क्षति पहुंची थी।
    - संगम के निकट स्थित इस किले का कुछ ही भाग पर्यटकों के लिए खुला रहता है। बाकी हिस्से का प्रयोग भारतीय सेना करती है। इस किले में 3 बड़ी गैलरी हैं, जहां पर ऊंची मीनारें हैं।
    - सैलानियों को अशोक स्तंभ, सरस्वती कूप और जोधाबाई महल देखने की इजाजत है। यहां अक्षय वट के नाम से मशहूर बरगद का एक पुराना पेड़ और पातालपुरी मंदिर भी है।
    - इसी किले के अंदर एक टकसाल भी था, जिसमें चांदी और तांबे के सिक्के ढाले जाते थे। इस किले में उस समय पानी के जहाज और नाव बनाई जाती थी। जो यमुना नदी से समुद्र तक ले जाई जाती थी।

    सलीम ने बनवाया था काले पत्थरों का सिंहासन
    - किले में जब सलीम ने यहां के सूबेदार के रूप में रहना शुरू किया तो उसने अपने लिए काले पत्थरों से एक सिंहासन का निर्माण कराया था। जिसे 1611 में आगरा भेज दिया गया था।
    - जहांगीर ने किले में मौर्यकालीन एक अशोक स्तंभ को पड़ा पाया था। उसे दोबारा स्थापित कर दिया, 35 फीट लंबे उस स्तंभ पर उसने अपनी संपूर्ण वंशावली खुदवा दी थी।
    - यह अशोक स्तंभ 273 ईसा पूर्व का है। जिस पर चक्रवर्ती राजा समुद्रगुप्त ने अपनी कीर्ति अंकित कराई थी। इस पर सम्राट अशोक की राजाज्ञाओं व समुद्रगुप्त और जहांगीर की प्रशस्ति भी खुदी हुई है। 1600 से 1603 तक जहांगीर इसी किले में रहा।

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    इस किले को संगम तट पर बनाया गया।
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    किले को बनाने में 45 साल का समय लगा।
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    इस किले को बनाने के लिए 20 हजार मजदूूूर ने काम किया।
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    किले के अंदर 44 देवी-देवताओं की मूर्ति है।
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    किले की दीवारों से यमुना की लहरे टकराती है।
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Web Title: Special Mughal Fort Story In Allahabad
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