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गोरखपुर दंगा मामला: CM योगी और आठ अन्य आरोप‍ियों के व‍िरुद्ध दाखिल याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोरखपुर के आदेश 28 जनवरी 2017 के विरूद्ध दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 09:40 PM IST
योगी आद‍ित्यनाथ। फाइल योगी आद‍ित्यनाथ। फाइल

इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोरखपुर के आदेश 28 जनवरी 2017 के विरूद्ध दाखिल याचिका को खारिज कर दिया। जिसके तहत उन्होंने निचली अदालत द्वारा गोरखपुर दंगा मामले में संज्ञान लेने के आदेश को रद्द करते हुए नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया था। बता दें, इस मामले में योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ आठ अन्य अभियुक्तों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति बीके नारायन ने वादी राशिद खान की याचिका पर दिया है। वादी की तरफ से अधिवक्ता एसएफए नकवी और राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राघवेन्द्र प्रताप सिंह, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, विनोदकांत और अपर शासकीय अधिवक्ता एके संड ने तर्क रखे। आगे पढ़‍िए पूरा मामला...

-जानकारी के अनुसार, याची राशिद खान ने गोरखपुर जिले के कोतवाली थाने में आईपीसी की धारा 147, 153 ए, 435, 295 506, 379 के तहत 27 जनवरी 2017 को योगी आदित्यनाथ और आठ अन्य लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपियों द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण से गोरखपुर जिले में अराजकता व्याप्त हो गई थी।

-जांच के के बाद दो जून 2009 को सभी आरोपियों के विरूद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया। लेकिन धारा 153ए के तहत अभियोजन स्वीकृत‍ि न होने की दशा में आरोप पत्र नहीं दाखिल किया गया। निचली अदालत द्वारा दोनों आरोप पत्र पर 13 अक्टूबर व 28 नवम्बर 2009 को संज्ञान लिया गया था।
-इन दोनों संज्ञान लेने के आदेश के विरूद्ध एक अभियुक्त महेश खेमका ने आपराधिक पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की थी। जिस पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश, गोरखपुर ने 28 जनवरी 2017 को अभियोजन स्वीकृत‍ि सक्षम अधिकारी द्वारा न दिए जाने के आधार पर संज्ञान लेने के आदेश को निरस्त करते हुए नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था।

-अपर जिला सत्र न्यायाधीश गोरखपुर के इस आदेश को वादी द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी जिसे हाईकोर्ट ने आज खारिज कर दिया।

आगे की स्लाइड्स में पढ़‍िए अप्रशिक्षित टीचरों को प्रशिक्षण देने की मांग वाली याचिका खारिज...

फाइल। फाइल।

2. अप्रशिक्षित टीचरों को प्रशिक्षण देने की मांग वाली याचिका खारिज
इलाहाबाद. हाईकोर्ट ने अप्रशिक्षित अध्यापकों को प्रशिक्षण देने की मांग में दाखिल यूपी बेसिक शिक्षक संघ की जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अध्यापक छूट गया है तो वह व्यक्तिगत कोर्ट में आकर केस कर सकता है। नेशनल इंस्टीटयूट आफ ओपेन स्कूलिंग (एनआईओएस) द्वारा एक लाख 72 हजार से अधिक अध्यापकों को प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत कर लिया है। ऐसे में कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

 


-यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने यूपी बेसिक शिक्षक संघ की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता एचएन सिंह राज्य सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पाण्डेय व भारत सरकार के अधिवक्ता राजेश त्रिपाठी ने पक्ष रखा।

-याची का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन राज्य सरकार ने नहीं किया है। राज्य सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण देने की सूचना नहीं दी जिससे हजारों अध्यापक एनआईओएस में पंजीकरण कराने से वंचित रह गए हैं।

-सरकार का कहना था कि एक लाख 82 हजार अध्यापकों में से एक लाख 72 हजार अध्यापकों से अधिक ने प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण करा लिया है। 9 हजार अध्यापकों ने पंजीकरण नहीं कराया है। दूरस्थ शिक्षा योजना के तहत अध्यापकों को 18 महीने में प्रशिक्षण दिया जाना है। अब पंजीकरण कराने का समय नहीं बचा है। केंद्र सरकार ने कहा है कि 31मार्च 2019 तक जो अध्यापक प्रशिक्षित नहीं होंगे उन्हें एक अप्रैल से हटा दिया जाएगा।