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हाईकोर्ट NEWS: यूपी में RERA का शीघ्र होगा गठन, शासन ने हाईकोर्ट को दी जानकारी

इलाहाबाद. उत्तर प्रदेश में रीयल इस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (RERA) के गठन की शासन स्तर पर कवायद तेज हो गई है।

Danik Bhaskar | Dec 08, 2017, 10:57 PM IST
फाइल। फाइल।

इलाहाबाद. उत्तर प्रदेश में रीयल स्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (RERA) के गठन की शासन स्तर पर कवायद तेज हो गई है। प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि रेरा के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के लिए सर्च कमेटी ने नामों का एक पैनल तैयार कर लिया गया है। इस पैनल में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस बैंक के अधिकारियों का पैनल तैयार है और इनका चरित्र सत्यापन और विजलेंस जांच की कार्रवाई चल रही है। शासन की ओर से बताया गया कि शीघ्र ही सर्च कमेटी द्वारा चयनित नामों की सूची चयन कमेटी (मुख्य न्यायाधीश हाईकोर्ट) के पास भेज दी जाएगी। ताकि चयन समिति नामों का चयन कर नामों को रेरा के गठन के ल‍िए शासन को भेजे। आगे पढ़ि‍ए पूरा मामला...


-गाजियाबाद के जगन्नाथ की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और एमके गुप्ता की पीठ के समक्ष दी गई। याचिका में कहा गया था कि सरकार रेरा के गठन में विलम्ब कर रही है।

-इस पीठ ने सरकार से जवाब मांगा था। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानन्द पांडेय ने बताया कि फिलहाल एक्ट की धारा 20 के तहत अंतरिम अथॉरिटी के रूप में कार्य चल रहा है।

-स्थायी रेरा के गठन के लिए जनवरी के अंतिम सप्ताह तक नामों को मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष भेज दिया जाएगा।

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स‍िम्बोल‍िक। स‍िम्बोल‍िक।

मत्स्य पट्टा के लिए उसी गांव का निवासी होना जरूरी नहींः हाईकोर्ट

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि मछली पालन पट्टा देने के लिए संबंधित गांव का होना जरूरी नहीं है। 10 साल के लिए याची को दिया गया पट्टा इस आधार पर निरस्त करना कि वह संबंधित गांव का निवासी नहीं है, उसे कोर्ट ने सही नहीं माना। इसी के साथ आजमगढ़ के ग्राम अतरौलिया में मत्स्य पालन पट्टा निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश जस्टिस बी अमित स्थालेकर ने संतराम की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

 

 

-कोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के नियम 57 (5) डी में स्पष्ट है कि मत्स्य पालन पट्टा ब्लाक का कोई निवासी ले सकता है। याची ब्लॉक के दूसरे गांव खानपुर फतेह का निवासी है।

-कोर्ट ने एसडीएम को नियमानुसार इस मामले में पुनर्विचार कर नए सिरे से आदेश पारित करने की फिर से छूट दी है। ग्राम प्रधान की शिकायत याची का पट्टा मनमाने तौर पर बगैर उसे सुने निरस्त कर दिया गया था।

 

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स‍िम्बोल‍िक। स‍िम्बोल‍िक।

रैन बसेरा की स्थिति पर जवाब-तलब
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शहर के रैन बसेरा की स्थिति पर प्रदेश सरकार और नगर निगम इलाहाबाद से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि रैन बसेरे के रख-रखाव की क्या व्यवस्था है। इसके लिए कितना बजट सरकार से मिल रहा है। ह्यूमन राइट लाॅ नेटवर्क के प्रशिक्षु विधि छात्रों की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। छात्रों का कहना था कि अभी टीम ने शहर के दस रैन बसेरों का निरीक्षण किया। उनकी हालत खराब है और कोई सुविधा नहीं है। ठंड में बेघर लोगों को इससे काफी दिक्कत होगी। याचिका पर बीस दिसम्बर को सुनवाई होगी।