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कुम्भ से पहले गंगा न हुई स्वच्छ तो सरकार को भुगतना पड़ेगा खामियाजा: स्वामी रामसुभग

इलाहाबाद में गंगा व किसान की व्यथा और दशा पर प्रकाश डालने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

Danik Bhaskar | Jan 27, 2018, 06:08 PM IST
स्वामी रामसुभग देव ने कहा- पूर्व की सरकारों ने गंगा में बांध बनाकर उसके जल के प्रवाह को रोकने जैसा काम किया है, जिसकी वजह से गंगा का जल प्रवाह बाधित हुआ है। स्वामी रामसुभग देव ने कहा- पूर्व की सरकारों ने गंगा में बांध बनाकर उसके जल के प्रवाह को रोकने जैसा काम किया है, जिसकी वजह से गंगा का जल प्रवाह बाधित हुआ है।

इलाहाबाद(यूपी). यहां शनिवार को गंगा व किसान की व्यथा और दशा पर प्रकाश डालने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान संगोष्ठी के संरक्षक स्वामी रामसुभग देव ने कहा, ''पूर्व की सरकारों ने गंगा में बांध बनाकर उसके जल के प्रवाह को रोकने जैसा काम किया है, जिसकी वजह से गंगा का जल प्रवाह बाधित हुआ है। कुम्भ से पहले गंगा को स्वच्छ व निर्मल करने का समय सरकार और प्रशासन को हमारी ओर से दिया जा रहा है। अगर यह काम नहीं हुआ तो उन्हें अपनी गलती का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।'' राम मंदिर निर्माण पर कहीं ये बातें...

- मुख्य अथिति महामंडलेश्वर संतोष दास ने कहा, ''संत किसी एक का नहीं होता है, वो सारे जगत का होता है। चाहे किसी की भी सरकार रही हो, सनातन धर्म सभी की बात करता है।

- राम मन्दिर के निर्माण के लिए जो भी दावे किए गए, उसे अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसलिए यह भी एक चिन्तन का विषय है, सनातन धर्म में हिटलरशाही नहीं चलेगी। इस बात को सरकार को ध्यान में रखना चाहिए।''

किसान का आत्महत्या करना: सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है

- एनडीएफ नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुन्ना यादव ने कहा, ''देश में कोई भी सरकार हो, लेकिन गंगा की सफाई और किसान की भलाई के बारे में अब तक कोई ठोस योजना सरकार नहीं बना पाई हैं।''

- ''इसकी वजह से एक ओर गंगा की सफाई नहीं होने से वो लुप्त होने कगार पर पहुंच गई हैं। वहीं, दूसरी ओर किसानों को उपज का सही मूल्य न मिलने की वजह से वो आत्महत्या करने को मजबूर है।''

- ''सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है, जिसकी वजह से गंगा प्रदूषण के भंवर में फंसी हुई हैं। साथ ही किसान अपनी बदहाली को लेकर व्यथित है।''

गंगा व किसान की व्यथा और दशा पर प्रकाश डालने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। गंगा व किसान की व्यथा और दशा पर प्रकाश डालने के लिए राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।