--Advertisement--

15 लाख की JOB छोड़ ये बने थे IPS, पापा की जॉब से है लालू का कनेक्शन

सुकीर्ति ने लाखों का पैकेज छोड़कर मां-बाप के सपनों को साकार करने के लिए IPS बनने की ठानी।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 09:00 PM IST
Special News of IPS Sukirti madhav mishra

इलाहाबाद. यूपी के इलाहाबाद में 1 जनवरी 2018 को सीओ सिटी थर्ड के रूप में आईपीएस अफसर सुकीर्ति माधव मिश्रा की पहली पोस्टिंग हुई। सुकीर्ति ने लाखों का पैकेज छोड़कर मां-बाप के सपनों को साकार करने के लिए IPS बनने की ठानी। अपने फर्स्ट अटेंप्ट में ही देश के सबसे बड़े एग्जाम को पास आउट कर लिया था, लेकिन 2014 में मिली सफलता में उन्हें आईआरएस मिला था। जबकि उन्हें IPS बनना था, इसलिए 2015 में उन्होंने दोबारा एग्जाम दिया और सिलेक्ट हो गए। DainikBhaskar.com में IPS सुकीर्ति माधव से बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश ये हैं।

पिता हैं टीचर और मां हैं हाउसवाइफ
- मूल रूप से बिहार प्रांत के जमुई डिस्ट्रिक्ट के अंतर्गत मलयपुर गांव के रहने वाले सुकीर्ति माधव का निक नेम चंदन है। उनके पिता कृष्ण कांत मिश्रा जूनियर हाईस्कूल में टीचर हैं। उनकी मां कविता मिश्रा हाउस वाइफ हैं।
- उनसे बड़ी उनकी एक बहन है रिचा मिश्रा। जिनकी शादी हो चुकी है, उनके बहनोई विकास मिश्रा नौसेना में हैं।

सरकारी विद्यालय से की पढ़ाई, करने के बाद मिल गई थी नौकरी
- सुकीर्ति माधव मिश्रा की प्रारंभिक पढ़ाई अपने गांव के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल में हुई है। ग्रेजुएशन उन्होंने भुवनेश्वर यूनिवर्सिटी से किया है।
- 2010 में उन्होंने एमएनआईटी दुर्गापुर से MBA की डिग्री हासिल की। उसी साल उन्हें कोल इंडिया में मैनेजर पद की नौकरी मिल गई और वो नौकरी करने चले गए।

रिजेक्ट होने पर परेशान हो गए थे सुकीर्ति माधव
- 1 मार्च 1988 को जन्मे सुकीर्ति माधव के लिए सबसे कठिन पल वो था जब वो MBA कर रहे थे और कैंपस सिलेक्शन में आईडीबीआई बैंक के लोगों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया था।
- जिससे वह काफी फ्रेस्टेट हुए थे, लेकिन बाद में घरवालों ने और टीचर्स ने उन्हें समझाया। उसके बाद ही उन्हें कोल इंडिया में नौकरी मिल गई।

2010 में पिता-पुत्र को एक साथ मिली थी नौकरी, लालू यादव थे रिजन
- सुकीर्ति माधव बताते हैं- ''वर्ष 2010 हमारे पूरे परिवार के लिए बहुत खुशियों वाला था क्योंकि इस वर्ष में मुझे और मेरे पिताजी को एक साथ नौकरी मिली।''
- ''मेरे पिताजी की जो भर्ती थी, उस पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही 1987-88 में पूर्व CM लालू यादव की पहल पर निरस्त कर दिया गया था। इससे हजारों शिक्षक बेरोजगार हो गए थे, उनका मुद्दा कोर्ट में लंबित था।
- करीब 22 साल की लंबी लड़ाई के बाद 2010 में पिताजी को न्याय मिला और उन्हें दोबारा नियुक्ति मिली और पीछे का पूरा पेमेंट भी दिया गया।

बड़ी बहन की हो चुकी है शादी, बहनोई है नौसेना में
- ''इन 22 सालों में हमारे माता-पिता ने बहुत से अभाव देखे, लेकिन कभी हम भाई-बहन को उसका आभास नहीं होने दिया। खेती किसानी के बूते ही उन्होंने मेरी दीदी ऋचा मिश्रा को MA और B.ed कराया, मुझे MBA कराया।''
- ''जब 2010 में दोनों लोगों को साथ में नौकरी मिली तो उसके बाद सबसे पहला काम हम लोगों ने दीदी की शादी 2011 में की।''

पिता ने कहा- IPS बनो, छोड़ी 15 लाख पैकेज की JOB
- ''तब तक मेरे जेहन में सिविल सर्विसेज को लेकर कोई हरकत नहीं थी, मैं कोल इंडिया के मैनेजर पर से संतुष्ट था। क्योंकि वहां कंपनी अच्छी थी और पैसे भी बढ़िया मिल रहे थे। मुझे साल के 15 लाख रुपए मिलते थे।''
- ''दीदी की शादी के बाद मम्मी-पापा ने 1 दिन बुला कर कहा कि अगर चाहो तो सिविल सर्विसेस ट्राई कर सकते हो। आम आदमी से जुड़ने का मौका मिलेगा, उनकी सेवा करने का मौका मिलेगा। जो पैसे से कहीं ज्यादा अच्छा होगा।''

2012 में शुरू की तैयारी- सुबह नौकरी और रात में करते थे पढ़ाई
- ''तब तक मेरी नौकरी के करीब 2 साल हो चुके थे। पिता जी के कहने के बाद मैंने सिविल सर्विसेस के बारे में जानना शुरू किया और फिर नौकरी करते-करते ही तैयारी शुरू कर दी।''
- ''कोल इंडिया में जहां मेरी पोस्टिंग थी, वहां भी दो-चार लड़के सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे उनका भी प्रभाव पड़ा। 2012 से मैंने तैयारी शुरू कर दी, जो काफी कठिन थी लेकिन लक्ष्य तय था इसलिए दिक्कत नहीं हुई।''
- ''सुबह 9:00 बजे से शाम को 6:00 बजे तक ऑफिस का काम निपटाता था। पढ़ाई कभी घंटे में बांधकर तो नहीं की लेकिन 9-10 बजे से बजे से लेकर रात में 1:00 से 2:00 बजे तक जरूर पढ़ता था।''
- ''2 साल की कड़ी तैयारी के बाद वर्ष 2014 में मैंने सिविल सर्विसेज का पहला एग्जाम दिया और पहले ही अटेंप्ट में मेरा सिलेक्शन हो गया। लेकिन मुझे आईआरएस मिला जिसे मैंने छोड़ दिया उसके बाद दूसरे अटेंड में वर्ष 2015-16 में मुझे आईपीएस कैडर मिल गया।''

मेरठ में ट्रेनिंग के दौरान घटी थी ये इंटरेस्टिंग घटना
- ''मेरी सारी ट्रेनिंग मेरठ में हुई। उसके बाद बतौर पोस्टिंग इलाहाबाद में आया हूं। ट्रेनिंग के दौरान मेरठ में मैं थानेदारी कर रहा था, वहां मुझे दो चोर मिले, जो नाबालिग थे।''
- ''उनको पकड़ कर थाने लाया गया, पूछताछ में वज्ञै कभी अपना पता यूपी बताते, कभी उत्तराखंड बताते। सब लोग परेशान थे, उनका एड्रेस क्लियर नहीं हो पा रहा था।''
- ''उसी दौरान मैंने उनसे पूछा कि यै बताओ तुमने चोरियां कितनी की हैं, तो उनमें से एक ने कहा साहब 'दू ठो'। ये 'दु ठो' शब्द सुनते ही मैं जान गया कि ये बिहार से है।''
- ''मैंने पूछा अच्छा ये बताओ तुम बिहार में कहां के रहने वाले हो। ये सुनकर वो पहले तो चौंके, लेकिन फिर बताया कि मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं।''

इंटरव्यू में आई क्यू लेवल पर पूछा गया था ये क्वेश्चन

- इंटरव्यू के दौरान आई क्यू लेवल के क्वेश्चन पूछे जाने पर उनका कहना था कि एक सवाल मुझसे पूछा गया था कि एक पुलिस लीडर की क्या भूमिका होनी चाहिए?
- उसमें मेरा जवाब था कि पुलिस लीडर अपने मातहतों के मनोभावों को समझकर परिस्थितिजन्य स्थितियों के मुताबिक निर्णय लें उनकी अगुवाई करें खुद फील्ड में रहे ताकि उनकी हौसला अफजाई हो और वह भी काम करने के प्रति प्रेरित हो।

कविताएं-शॉर्ट स्टोरी और अपना संस्मरण लिखने के शौकीन सुकीर्ति माधव फोटोग्राफी और घूमने का भी शौक रखते हैं। कविताएं-शॉर्ट स्टोरी और अपना संस्मरण लिखने के शौकीन सुकीर्ति माधव फोटोग्राफी और घूमने का भी शौक रखते हैं।
क्रिकेट खेलना उनको पसंद है, लेकिन गांव के खेतों में घूमना पतंग उड़ाना, बैडमिंटन खेलना भी उनकी हॉबी में शामिल है। क्रिकेट खेलना उनको पसंद है, लेकिन गांव के खेतों में घूमना पतंग उड़ाना, बैडमिंटन खेलना भी उनकी हॉबी में शामिल है।
स्वास्थ्य के लिए वो चाय नहीं पीते हैं। (ये उनकी दादी की फोटो है) स्वास्थ्य के लिए वो चाय नहीं पीते हैं। (ये उनकी दादी की फोटो है)
पुलिस की टफ नौकरी के बावजूद वो टाइम निकाल कर प्रतिदिन कम से कम 5 किलो मीटर की रनिंग जरूर करते हैं। पुलिस की टफ नौकरी के बावजूद वो टाइम निकाल कर प्रतिदिन कम से कम 5 किलो मीटर की रनिंग जरूर करते हैं।
अभी तक के जीवन में किसी लड़की के एंट्री को सिरे से खारिज करने वाले सुकीर्ति माधव अभी बैचलर हैं। अभी तक के जीवन में किसी लड़की के एंट्री को सिरे से खारिज करने वाले सुकीर्ति माधव अभी बैचलर हैं।
दाल-चावल, रोटी और लिट्टी-चोखा के शौकीन सुकीर्ति माधव को मां के हाथ का खाना बेहद पसंद है। दाल-चावल, रोटी और लिट्टी-चोखा के शौकीन सुकीर्ति माधव को मां के हाथ का खाना बेहद पसंद है।
वो कहते हैं- माता-पिता की रजामंदी से ही शादी करना चाहते हैं। जीवन में इतना उथल-पुथल ताकि कभी इश्क प्यार और मोहब्बत के लिए समय ही नहीं मिला। वो कहते हैं- माता-पिता की रजामंदी से ही शादी करना चाहते हैं। जीवन में इतना उथल-पुथल ताकि कभी इश्क प्यार और मोहब्बत के लिए समय ही नहीं मिला।
पिताजी के अभी डेढ़ साल नौकरी के बचे हुए, इसके बाद वो रिटायर हो जाएंगे। पिताजी के अभी डेढ़ साल नौकरी के बचे हुए, इसके बाद वो रिटायर हो जाएंगे।
X
Special News of IPS Sukirti madhav mishra
कविताएं-शॉर्ट स्टोरी और अपना संस्मरण लिखने के शौकीन सुकीर्ति माधव फोटोग्राफी और घूमने का भी शौक रखते हैं।कविताएं-शॉर्ट स्टोरी और अपना संस्मरण लिखने के शौकीन सुकीर्ति माधव फोटोग्राफी और घूमने का भी शौक रखते हैं।
क्रिकेट खेलना उनको पसंद है, लेकिन गांव के खेतों में घूमना पतंग उड़ाना, बैडमिंटन खेलना भी उनकी हॉबी में शामिल है।क्रिकेट खेलना उनको पसंद है, लेकिन गांव के खेतों में घूमना पतंग उड़ाना, बैडमिंटन खेलना भी उनकी हॉबी में शामिल है।
स्वास्थ्य के लिए वो चाय नहीं पीते हैं। (ये उनकी दादी की फोटो है)स्वास्थ्य के लिए वो चाय नहीं पीते हैं। (ये उनकी दादी की फोटो है)
पुलिस की टफ नौकरी के बावजूद वो टाइम निकाल कर प्रतिदिन कम से कम 5 किलो मीटर की रनिंग जरूर करते हैं।पुलिस की टफ नौकरी के बावजूद वो टाइम निकाल कर प्रतिदिन कम से कम 5 किलो मीटर की रनिंग जरूर करते हैं।
अभी तक के जीवन में किसी लड़की के एंट्री को सिरे से खारिज करने वाले सुकीर्ति माधव अभी बैचलर हैं।अभी तक के जीवन में किसी लड़की के एंट्री को सिरे से खारिज करने वाले सुकीर्ति माधव अभी बैचलर हैं।
दाल-चावल, रोटी और लिट्टी-चोखा के शौकीन सुकीर्ति माधव को मां के हाथ का खाना बेहद पसंद है।दाल-चावल, रोटी और लिट्टी-चोखा के शौकीन सुकीर्ति माधव को मां के हाथ का खाना बेहद पसंद है।
वो कहते हैं- माता-पिता की रजामंदी से ही शादी करना चाहते हैं। जीवन में इतना उथल-पुथल ताकि कभी इश्क प्यार और मोहब्बत के लिए समय ही नहीं मिला।वो कहते हैं- माता-पिता की रजामंदी से ही शादी करना चाहते हैं। जीवन में इतना उथल-पुथल ताकि कभी इश्क प्यार और मोहब्बत के लिए समय ही नहीं मिला।
पिताजी के अभी डेढ़ साल नौकरी के बचे हुए, इसके बाद वो रिटायर हो जाएंगे।पिताजी के अभी डेढ़ साल नौकरी के बचे हुए, इसके बाद वो रिटायर हो जाएंगे।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..