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13 की उम्र में इस किन्न्रर ने छोड़ा था घर, खूबसूरती बनीं थी दुश्मन

3 वर्ष पहले
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इलाहाबाद. किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर मां भवानी नाथ वाल्मीकि 2 साल पहले तक शबनम बेगम के नाम से चर्चित थीं। बोल्ड अंदाज में बात करने वाली मां भवानी की सुंदरता ही बचपन में उनके लिए अभिशाप बन गई। 2010 में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म कबूल करने वाली भवानी नाथ वाल्मीकि 2012 में हज यात्रा भी कर चुकी हैं। DainikBhaskar.com ने 16 जनवरी को संगम में स्नान करने आई भवानी नाथ से बातचीत की। 2017 में बनीं महामंडलेश्वर...

 

- 2015 में हिंदू धर्म में वापसी करने वाली भवानी नाथ 2016 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के किन्नर अखाड़े में धर्मगुरु बनी। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने पिछले साल 2017 में उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी।

- किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर भवानी नाथ वाल्मीकि का वाल्मीकि धाम शिप्रा तट तिलकेश्वर मार्ग उज्जैन में आश्रम है और वो ज्यादातर वहीं रहती हैं। उनका एक आश्रम जैतपुर बदरपुर, न्यू दिल्ली में भी है।
- 11 साल की उम्र में ये सेक्शुअल हैरसमेंट का शिकार हुई थी।

 

गरीबी में 2 जून की रोटी थी मुश्किल
- महामंडलेश्वर ने बताया, ''पिता चंद्रपाल और मां राजवंती यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले थे। मेरे जन्म के पहले से दिल्ली में आकर रहने लगे थे। वो डिफेंस मिनिस्ट्री में फोर्थ क्लास एंप्लाइ थे।''
- ''हम 8 भाई-बहन हैं, जिनमें 5 बहन और तीन भाई हैं। मेरा जन्म चांदिकापुरी, दिल्ली में हुआ है। इस समय मैं 45 साल की हूं।''
- ''मैं बेहद गरीब परिवार से हूं, पिता की माली हालत इतनी नहीं थी कि पूरे परिवार का भरण-पोषण हो सके।''

 

10 साल में पता चला कि मैं किन्नर हूं, 11 में हुआ यौन शोषण
- ''मैं अपने भाई-बहनों में सबसे सुंदर थी, बचपन में तो चीजें पता नहीं थीं। लेकिन जैसे-जैसे बड़े होते गई लोगों द्वारा मिलने वाले ताने कौतूहल पैदा करने लगे।''
- ''जब मैं 10-11 साल की थी, तब उन्हें पता चला कि वो किन्नर हैं। उस वक्त किन्नर और सामान्य स्त्री-पुरुष के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन समाज के लोग मेरे साथ अन्य बच्चों जैसा व्यवहार नहीं करते थे। ये बात कहीं न कहीं दिमाग में खटकती थी।''
- ''किन्नर होने की वजह से और दिक्कत आती थी, लोग शोषण करते थे। जब मैं 11 साल की थी, तभी किसी खास ने मेरायौन शोषण किया था।''
- ''जिस समाज के लोग हमें अपने परिवार के साथ रखना नहीं चाहते, उसी समाज के लोग हमें अपने उपभोग की वस्तु समझते हैं।''

 

जब सुंदरता बनी अभिशाप तो 13 साल की उम्र में छोड़ा घर
- ''मेरी सुंदरता ही मेरे लिए अभिशाप बन गई थी। इसी वजह से छठवीं क्लास तक पढ़ने के बाद मैंने पढ़ाई छोड़ दी। घर के आसपास के लोग और स्कूल आते-जाते समय रास्ते में मिलने वाले लोग गलत निगाह से देखते थे।''
- ''लोगों की बोलचाल और टच करने का तरीका गलत होता था, जो अंदर तक परेशान करता था।''
- ''13 साल की उम्र में मुझे किन्नर समाज के पास जाना पड़ा, जहां उनकी पहली गुरु नूरी बनी। वहां पहुंचकर लगा कि वो अब अपने समाज में आ गई हैं।''
- ''जब मैं घर से किन्नर समाज में जाने के लिए निकली थी तो पिता ने बहुत रोकने की कोशिश की। लेकिन मैं नहीं मानी। आज पिताजी तो इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन मैं मां राजवंती देवी को अपने साथ प्रयाग स्नान के लिए लेकर आई हूं।''
- ''छुआछूत से लेकर तमाम तरह की समस्याओं से जूझते हुए आज मैं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर हूं। 2014 में मैंने सुप्रीम कोर्ट में जाकर स्त्री-पुरुष के अलावा थर्ड जेंडर का नाम जुड़वाया।''

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