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मकर संक्रांति पर्व के पीछे ऐसी हैं Myth, दान कर कमाएंगे पुण्य लाभ

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 13, 2018, 01:18 PM IST

इलाहाबाद में मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
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    माघ मेले का पहला 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से अच्छे दिनों की शुरुआत हो रही है, जो शिवरात्रि के आखिरी स्नान तक चलता है।(फाइल)

    इलाहाबाद(यूपी).माघ मेले के प्रमुख स्नान पर्व 14 जनवरी मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां के हर स्नान पर्व की अलग-अलग खास मान्यताएं है। ज्योतिषीय गणना क्रम के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है। साथ ही धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। मकर राशि में सूर्य के इस संक्रमण को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इसे लोग खिचड़ी के नाम से भी जानते हैं। संगम क्षेत्र में खिचड़ी दान का बहुत महत्व है। माघ मास के पहले स्नान पर्व है शुरू होंगे शुभ कार्य...

    - 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक का समय खर मास के नाम से जाना जाता है। इस एक महीने मे किसी भी शुभ कार्य को नहीं किया जाता।
    - माघ मेले का पहला 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से अच्छे दिनों की शुरुआत हो रही है, जो शिवरात्रि के आखिरी स्नान तक चलता है।
    - इस दिन स्नान के बाद दान देने की भी परंपरा है। सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक वातावरण में अधिक मात्रा में चैतन्य होता है।
    - साधना करने वाले जीव को इसका सर्वाधिक लाभ होता है। इस चैतन्य के कारण जीव में विद्यमान तेज तत्व के बढ़ने में सहायता मिलती है।
    - इस दिन रज-तम की अपेक्षा सात्विकता बढ़ाने और उसका लाभ उठाने का प्रत्येक जीव प्रयास करे। यह दिन साधना के लिए अनुकूल है।
    - इसलिए इस काल में ज्यादा से ज्यादा साधना कर ईश्वर और गुरु से चैतन्य प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए।


    मकर संक्रांति को लेकर यह है पौराणिक मान्यताएं

    - भारतीय विद्या भवन के प्राचार्य डॉ. त्रिवेणी प्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक, ''माना जाता है कि इस दिन सूर्य भगवान अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं। इसलिए इस दिन को मकर सक्रांति के नाम से जाना जाता है।''

    - ''इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी और सभी असुरों का सिर मंदार पर्वत में दबा दिया था।''

    - ''वहीं, मान्यता यह भी है कि गंगा जी भागीरथ के पीछे- पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में उनसे जा मिली थी। गंगा को धरती पर लाने वाले भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। जिसे स्वीकार कर गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी।''

    - '' सर सैय्या पर लेटे हुए भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था।''

    - ''इसी दिन यशोदा ने कृष्ण जन्म के लिए व्रत किया था, जिसके बाद मकर संक्रांति के व्रत का प्रचलन हुआ।''

    रूठे हुए अपनो को मनाने की है परम्परा
    - इस दिन विवाहित महिलाएं अपने सास-ससुर, जेठ-जेठानी यानि रिश्ते में बड़ों को वस्त्र भेंट करते हैं। उनका आशीर्वाद भी लिया जाता है।
    - परिजनों में जिसके साथ भी गिला-शिकवा है, इस दिन सभी गिले-शिकवे दूर कर रुठों को मनाया जाता है।

    मकर संक्रांति स्नान के बाद ये करे दान
    - पुण्य काल मे संगम स्नान करके सूर्य देवता की पूजा करें। इस दिन गंगा स्नान को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है।
    - गुड़, तिल, चावल, उड़द दाल आदि ब्राह्मण या किसी गरीब व्यक्ति को दान करें।

    मकर संक्रांति का महत्व
    - ग्रहों की शांति, पितृ दोष व मोक्ष प्राप्ति के लिए मकर संक्रांति को बहुत ही लाभकारी माना जाता है।
    - चूंकि सूर्य देवता दक्षिणायन से उत्तरायण में गतिशील होते हैं। इसके साथ ही खरमास की समाप्ति होती है व शुभकाल शुरु होता है। इसलिए मकर संक्रांति का बहुत महत्व है।


    ​शुभ मुहूर्त का समय
    - मकर संक्रांति 14 जनवरी को दोपहर बाद 2 बजे से होगी। भारतीय ज्योतिष के अनुसार, यह बहुत ही शुभ समय माना जाता है।

    - समस्त शुभ कार्यों की शुरुआत इस संक्रांति के पश्चात ही होती है। मकर संक्रांति का स्नान 15 जनवरी को होगा।
    - दरअसल, मकर संक्रांति 2 बजे के बाद से हो रही है, जिस कारण ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि 15 जनवरी को सूर्योदय के समय तीर्थ स्थलों पर स्नान करना शुभ रहेगा।

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    मकर संक्रांति 14 जनवरी को दोपहर बाद 2 बजे से होगी। (फाइल)
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Web Title: Special Story On Makar Sankranti
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