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बसंत पंचमी : गंगा घाट में श्रद्धालुओं की भीड़, आस्था की डुबकी लगा रहे लोग

रविवार दोपहर के बाद से ही बसंत पंचमी तिथि लगने से भक्त देर रात से ही स्नान करने के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 22, 2018, 08:04 AM IST

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    गंगा घाट में सुबह से ही स्नान करने के लिए भक्त पहुंच रहे हैं। फाइल

    इलाहाबाद.बसंत पंचमी के मौके पर संगम क्षेत्र के कई घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी है। हालांकि घने कोहरे ने माघ मेला क्षेत्र को ढक रखा है। इसके बाद भी माघ मेले के चौथे प्रमुख स्नान पर्व लोगों के आने का सिलसिला जारी है। रविवार दोपहर के बाद से ही बसंत पंचमी तिथि लगने से भक्त देर रात से ही स्नान करने के लिए घाटों पर पहुंच रहे हैं। सोमवार पूरे दिन बसंत पंचमी का महत्व रहेगा। प्रशासन का मानना है कि बसंत पंचमी पर लगभग 50 लाख श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाएंगे।

    बसंत पंचमी का ये है महत्त्व


    -भारतीय संस्कृति में अलग-अलग ऋतुओं का अपना महत्व होता है। ऐसे ही बसंत ऋतु में बसंत पंचमी का भी अपना महत्व है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की आराधना होती है, तो संगम में लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं।
    -हिन्दू धर्म की मान्यता है कि ब्रह्माजी ने इस सृष्टि की रचना की, लेकिन जीवों मुख्यतः मनुष्य योनि की रचना से वह संतुष्ट नहीं थे। संसार की रचना के बाद भी यहां फैला मौन उन्हें द्रवित कर रहा था। ऐसे में ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की सहमती से अपने कमंडल से जल छिड़का।
    -ब्रह्मा जी के जल छिड़काव के साथ ही एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। देवी अपने हाथ में वीणा लिए हुई थी। उनके दोनों हाथों में पुस्तक और माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। वीणा से मधुर ध्वनि निकली और इस ध्वनि के साथ ही संसार का मौन समाप्त हो गया।
    -पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव-जंतुओं को वाणी मिल गई। नदियों की जलधारा और पवन चलने से मधुर ध्वनि पैदा हुई। ब्रह्मा जी ने इस देवी को वाणी की देवी सरस्वती का नाम दिया।

    शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है बसंत पंचमी

    -हिन्दू तिथि के अनुसार बसंत पंचमी का अर्थ है शुक्ल पक्ष का वह पांचवां दिन जो माघ के महीने में मनाया जाता है। बसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु भी माना गया है। इस समय पंचतत्व अपना प्रकोप छोड़कर सुहावने रूप में प्रकट होते हैं। पंचतत्व में शामिल जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि सभी अपना मोहक रूप दिखाते हैं।

    इलाहाबाद में जुटी श्रद्धालुओं की भीड़

    -एक महीने तक चलने वाले माघ मेले के विशेष स्नान पर्व बसंत पंचमी के लिए प्रशासन ने व्यापक बंदोबस्त किए हैं। इलाहाबाद रेलवे जंक्शन पर भीड़ को जमा होने से रोकने के लिए सिविल लाइंस से स्टेशन की तरफ जाने वाले सभी रास्ते सोमवार से ही तीन दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं।
    -मेला अधिकारी ने बताया कि इस स्नान पर्व पर लगभग 50 लाख लोगों के स्नान करने की उम्मीद है। आसपास के जिलों जैसे प्रतापगढ़, रीवा, जौनपुर, भदोही, बनारस कौशाम्बी आदि से स्नानार्थियों के आने का सिलसिला शनिवार से ही शुरू हो गया है।
    -जिला प्रशासन ने मेले में बाहर से आने वाले स्नानार्थियों के वाहनों की पार्किंग के लिए शहर के कई जगहों को एंट्री पॉइंट बना रखा है। यहां वाहन खड़ा करके ही मेले में प्रवेश किया जा सकता है।

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Web Title: Worship Goddess Saraswati On Basant Panchami
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