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मां की लाश लिए 8 घंटे तक की मिन्नतें, फिर भी नहीं पूरी हुई आखरी इच्छा

कौशांबी(यूपी). यहां एक परिवार मृत मां की इच्छा लिए 13 घंटे तक जेल के गेट पर ही बिलखते रहे।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 03:08 PM IST
जेल के गेट के सामने 8 घंटे तक मां का शव लिए बिलखते रहे। जेल के गेट के सामने 8 घंटे तक मां का शव लिए बिलखते रहे।

कौशांबी(यूपी). यहां एक परिवार मृत मां की इच्छा पूरी करने के लिए 8 घंटे तक जेलर की मिन्नतें करता रहा। मां के शव को लिए जेल के गेट पर बिलखते रहे, लेकिन किसी ने एक न सुनी। महिला की आखिरी इच्छा थी कि मरने से पहले उसका छोटा बेटा उसका चेहरा जरूर देखे। कानूनी पेंचेदगियों के फेर में फंसकर वो नहीं देख सका। नियमों का हवाला देकर किया इनकार...

- मामला कौशाम्बी जिले का है। यहां 15 नवंबर 2017 को 2 युवकों को चार किलो गांजा के साथ गिरफ्तार किया था।
- उनकी पहचान कानपुर के न्यू आजाद नगर निवासी धर्मेंद्र पुत्र रमेश साहनी व अमित के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों का चालान कर दिया। कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
- महीने भर पहले आरोपी धर्मेंद्र की मां सरस्वती सड़क हादसे में घायल हो गई। परिवार वालों ने लखनऊ स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया था।
- इलाज के दौरान 5 जनवरी को उनकी मौत हो गई। परिजन महिला की लाश लेकर 6 जनवरी सुबह 10 बजे लेकर जेल पहुंचे।
- गुजारिश की कि धर्मेद्र को उसकी मां के अंतिम दर्शन की इजाजत दे दी जाए, लेकिन जेल प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया।
- जिला जेल के प्रभारी अधीक्षक ने परिवार वालों को समझाया कि जेल के भीतर शव नहीं ले जा सकते। ऐसा न तो अदालत का आदेश है और न ही उच्चाधिकारियों का।
- परिवार वालों के मुताबिक '' शाम 6 बजे तक मिन्नतें की कि कम से कम बंदी रक्षकों के पहरे में ही एक बार धर्मेंद्र को मां का चेहरा दिखवा दिया जाए, पर कानूनी दिक्कत बता दी गई।''

खिड़की से भी आखिरी झलक देखना बेकार
- एसडीएम मंझनपुर विवेक चतुर्वेदी ने भी डीएम व एसपी से बात की, लेकिन बात नहीं बनी। यहां तक कि जेल गेट की खिड़की से ही मां की आखिरी झलक दिखाने की गुजारिश भी बेकार गई।
- जेल अधीक्षक बीएस मुकुंद ने बताया, ''मानवता के नाते धर्मेंद्र के परिवार वालों को सलाह दी थी कि वह डीएम से मिल लें। लेकिन परिवार वाले वहां नहीं गए।''
- उधर, डीएम मनीष कुमार वर्मा का कहना है, ''मामला संज्ञान में आया है। इसके लिए प्रार्थना पत्र नहीं मिला।''

5 जनवरी को शख्स की मां को मौत हो गई। परिजन महिला की लाश लेकर 6 जनवरी सुबह 10 बजे लेकर जिला जेल पहुंचे। 5 जनवरी को शख्स की मां को मौत हो गई। परिजन महिला की लाश लेकर 6 जनवरी सुबह 10 बजे लेकर जिला जेल पहुंचे।
परिवार वालों के मुताबिक- शाम 6 बजे तक धर्मेद्र को उसकी मां के अंतिम दर्शन कराने की मिन्नतें की, लेकिन नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया। परिवार वालों के मुताबिक- शाम 6 बजे तक धर्मेद्र को उसकी मां के अंतिम दर्शन कराने की मिन्नतें की, लेकिन नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया।
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जेल के गेट के सामने 8 घंटे तक मां का शव लिए बिलखते रहे।जेल के गेट के सामने 8 घंटे तक मां का शव लिए बिलखते रहे।
5 जनवरी को शख्स की मां को मौत हो गई। परिजन महिला की लाश लेकर 6 जनवरी सुबह 10 बजे लेकर जिला जेल पहुंचे।5 जनवरी को शख्स की मां को मौत हो गई। परिजन महिला की लाश लेकर 6 जनवरी सुबह 10 बजे लेकर जिला जेल पहुंचे।
परिवार वालों के मुताबिक- शाम 6 बजे तक धर्मेद्र को उसकी मां के अंतिम दर्शन कराने की मिन्नतें की, लेकिन नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया।परिवार वालों के मुताबिक- शाम 6 बजे तक धर्मेद्र को उसकी मां के अंतिम दर्शन कराने की मिन्नतें की, लेकिन नियमों का हवाला देकर इनकार कर दिया।
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