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इलाबाद HC: पतंजलि कंपनी और यमुना एक्सप्रेस वे अथारिटी ने कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा

पतंजलि कंपनी ने हलफना में बताया कि कंपनी को 113.20 एकड़ जमीन सेक्टर 24 व 24 ए में आवंटित की गई है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 10:34 PM IST

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    पतंजलि कंपनी की तरफ से कहा गया कि याची ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया जिससे स्पष्ट हो कि विपक्षी कंपनी ने पेड़ काटे हैं।
    इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद व पतंजलि फूड एवं हर्बल पार्क नोएडा तथा यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी ने हलफनामा दाखिल कर दिया। पतंजलि कंपनी ने हलफना में बताया कि कंपनी को 113.20 एकड़ जमीन सेक्टर 24 व 24 ए में आवंटित की गई है। जिसमें याची की जमीन शामिल नहीं है। याची की जमीन पर खड़े 6 हजार पेड़ों को किसने काटा, के बाबत कोई दोनों ने जानकारी नहीं दी। याचिका की अगली सुनवाई 29 नवम्बर को होगी। याची ने नहीं दिया है कोई साक्ष्य...
    - पतंजलि कंपनी की तरफ से कहा गया कि याची ने ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दिया जिससे स्पष्ट हो कि विपक्षी कंपनी ने पेड़ काटे हैं। कोर्ट ने याची को अथारिटी और कंपनी के जवाबी हलफनामे का जवाब दाखिल करने का समय दिया है।
    - यह आदेश न्यायमूर्ति तरूण अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति अजय भनोट की खण्डपीठ ने औसाफ की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता प्रेम कुमार चौरसिया ने बहस की।
    - पतंजलि कंपनी की तरफ से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि आवंटित जमीन पर एक हजार करोड़ खर्च होने हैं। 25 नवम्बर 2016 को 430 एकड़ जमीन कंपनी को दी गई। जिसमें से 130 एकड़ पतंजलि आयुर्वेद को तथा 300 एकड़ जमीन पतंजलि फूड एण्ड हर्बल पार्क नोएडा के नाम आवंटित की गयी है।
    - याचीगण को प्लाट संख्या 828(क) पट्टे पर दी है। 6 हेक्टेयर इस जमीन पर याची ने पेड़ लगाया था, जिसे बुल्डोजर लगाकर उखाड़ दिया गया।
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    # सेवानिवृत्त इंजीनियर के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई पर प्रमुख सचिव गृह का हलफनामा तलब
    इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार के मामले में 10 साल पुराने एफआईआर को लेकर लोक निर्माण विभाग के रिटायर सहायक अभियंता के खिलाफ की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर प्रमुख सचिव गृह से उनका व्यक्गित हलफनामा मांगा है।
    - कोर्ट ने पूछा है कि अक्टूबर 2007 में दर्ज प्राथमिकी को लेकर दस वर्ष बाद अचानक किस वजह से कार्रवाई की जा रही है।
    - यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति वी के सिंह की खंडपीठ ने रिटायर सहायक अभियंता आर के राम गुप्ता की याचिका पर दिया है।
    - याची के खिलाफ 11 अक्टूबर 2007 को आईपीसी की कई धाराओं समेत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत थाना कोतवाली चन्दौली में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। याची वहां 2000 से 2003 तक तैनात था। 30 नवम्बर 14 को वह रिटायर हो गया।
    - सड़क एवं पुलिया निर्माण में अनियमितता को लेकर याची के खिलाफ विभागीय जांच भी हुई, जिसमें वह बरी हो गया। याचिका में अभियोजन स्वीकृति एवं प्राथमिकी को चुनौती दी गयी है। अगली सुनवाई 21 नवम्बर को होगी।
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    #संविदा स्वास्थ्य सेवकों की नियमित नियुक्ति का रास्ता साफ
    इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 141 स्वास्थ्य सेवकों को भी 2016 की सीधी भर्ती में प्रशिक्षण बैच वार वरिष्ठता क्रम से नियुक्ति करने का राज्य सरकार को निर्देश दिया है।
    - कोर्ट ने कहा है कि प्रशिक्षण के समय अर्हता पर ही नियुक्ति में शामिल किया जाय। बाद में शैक्षिक योग्यता के आधार पर कार्यवाही न की जाय।
    - यह आदेश न्यायमूर्ति एस.आर मौर्या ने पिंकी सरकार और 140 अन्य स्वास्थ्य सेवकों की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता संतोष कुमार सिंह पालीवाल ने बहस की।
    - सरकार ने पहले ही आयु सीमा में छूट दे रखी है। कोर्ट के आदेश से वर्षों से संविदा पर कार्यरत सेवक सेविकाओं को नियमित नियुक्ति पाने का रास्ता साफ हो गया है।
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