राजनीति / पचास साल पहले हुई पं. दीनदयाल उपाध्याय की मौत की हो सकती है सीबीआई जांच



पं. दीनदयाल उपाध्याय पं. दीनदयाल उपाध्याय
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पं. दीनदयाल उपाध्यायपं. दीनदयाल उपाध्याय

  • फरवरी 1968 में मुगलसराय में संदिग्ध परिस्थिति में मिला था शव
  • अम्बेडकरनगर के भाजपा कार्यकर्ता ने 6 नवंबर 2017 को गृह मंत्रालय को लिखा था पत्र
  • गृह मंत्रालय ने मांगी उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट

Dainik Bhaskar

Sep 20, 2018, 12:39 PM IST

इलाहाबाद. पचास साल पहले मुगलसराय में हुई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत की जांच सीबीआई से कराई जा सकती है। अंबेडकरनगर जिले के एक भाजपा कार्यकर्ता के पत्र पर केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार से मांगी गई रिपोर्ट के बाद इसकी संभावनाएं तेज हो गईं हैं। जनसंघ के संस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या फरवरी 1968 में हुई थी।

 

क्या है रिपोर्ट में: बुधवार को एसपी रेलवे ने आईजी रेलवे को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। एक दो दिनों में इसे शासन के पास भेजा जाएगा।सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में बताया गया है कि हत्या से जुड़ी एफआईआर और केस डायरी गुम है। एक दस्तावेज के मुताबिक इस मामले में तीन आरोपी उस समय गिरफ्तार किए गए थे। इनमें से एक को 4 साल की सजा हुई थी। 

 

कौन थे आरोपित: रिपोर्ट के मुताबिक 11 फरवरी 1968 को घटना की रिपोर्ट मुगलसराय थाने में अपराध संख्या 67/1968 पर आईपीसी 302 के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई थी। पुलिस ने वाराणसी के रहने वाले रामअवध, लालता और भरतराम को गिरफ्तार किया था, जिसमें भरतराम को धारा 379/411 के तहत 4 साल की सजा सुनाई गई थी, जबकि दो को बरी कर दिया गया था। बताया गया है कि पुलिस इस मामले की जांच के लिए ऐसे पुलिस कर्मी को तलाश रही है, जो उस वक्त वहां थाने में तैनात रहा हो।

 

ऐसे हुई जांच शुरू: अम्बेडकरनगर जिले के भाजपा कार्यकर्ता राकेश गुप्ता ने 6 नवम्बर 2017 को गृहमंत्रालय को पत्र लिखकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय की मौत को साजिश बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी। उन्होंने हत्या के तार कई राज्यों से जुड़े होने की बात कही है। उन्होंने लिखा है कि हत्या के बाद शव का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया था औार ही कानूनी कार्यवाही का पालन किया गया था।

 

 


 

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