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कुंभ / मोक्ष की कामना के लिए प्रयागराज पहुंचे कल्पवासी, एक माह तक बिताएंगे संयमित व अनुशासित जीवन

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 12:43 PM IST


संगम में संन्यासी। संगम में संन्यासी।
भगवान कृष्ण की वेशभूषा में बालक। भगवान कृष्ण की वेशभूषा में बालक।
कुंभ में जगह-जगह भंडारे चल रहे हैं। कुंभ में जगह-जगह भंडारे चल रहे हैं।
कुंभ में कलाकारों ने झांकी निकालीं। कुंभ में कलाकारों ने झांकी निकालीं।
कुंभ् में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। कुंभ् में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
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संगम में संन्यासी।संगम में संन्यासी।
भगवान कृष्ण की वेशभूषा में बालक।भगवान कृष्ण की वेशभूषा में बालक।
कुंभ में जगह-जगह भंडारे चल रहे हैं।कुंभ में जगह-जगह भंडारे चल रहे हैं।
कुंभ में कलाकारों ने झांकी निकालीं।कुंभ में कलाकारों ने झांकी निकालीं।
कुंभ् में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।कुंभ् में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

  • मकर संक्रांति पर्व पर स्नान, दान के लिए संगम पहुंचने लगे श्रद्धालु
  • एक माह तक कल्पवास करेंगे श्रद्धालु
  • एक समय भोजन व भूमि पर शयन कर करेंगे जप तप

प्रयागराज (इलाहाबाद). आस्था-विश्वास के अनूठे संगम और विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक पर्व कुंभ में संगम के तट पर रहकर पूजा-पाठ व दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है, इसे कल्पवास कहते हैं। कल्पवास के लिए देश के कई हिस्सों से श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचने लगे हैं। एक माह रहकर यहां कल्पवासी जप, तप, संयमित और अनुशासित ढंग से एक समय भोजन व भूमि शयन करेंगे। 

 

कुछ श्रद्धालु मकर संक्रांति से तो कुछ पौष पूर्णिमा से कल्पवास का व्रत प्रारम्भ करते हैं। कुम्भ के दौरान संगम की रेती पर पौष पूर्णिमा से पूरे माघ मास पर्यन्त कल्पवास करने का विधान है। इस दौरान दिन में एक ही बार भोजन किया जाता है व मानसिक रूप से धैर्य, अहिंसा और भक्तिभाव का पालन किया जाता है।

 

यहां कुटिया में रहने वाले कल्पवासी सुबह की शुरूआत गंगा स्नान से करते हैं। उसके बाद दिन में सत्संग किया जाता है और देर रात तक भजन, कीर्तन चलता है। इस प्रकार यह लगभग दो महीने से ज्यादा का समय सांसारिक भागदौड़ से दूर तन और मन को नई स्फूर्ति से भर देने वाला होता है।

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