कुंभ / सनातन धर्म के रक्षा की जिम्मेदारी 13 अखाड़ों पर, सबसे बड़े अखाड़े जूना में 4 लाख से ज्यादा साधु



kumbh mela 2019 and history of akhara in prayag raj
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  • आदिशंकराचार्य ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए चार पीठ की स्थापना की थी
  • इनकी रक्षा के लिए 13 अखाड़ों का गठन किया गया, इन्हें भी आदिशंकराचार्य ने बनाया

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 05:02 AM IST

प्रयागराज (इलाहाबाद).  15 जनवरी को मकर संक्रांति स्नान के साथ प्रयागराज में कुंभ का आगाज हो जाएगा। कुंभ का जिक्र आते ही यहां आने वाले साधु-संतों और अखाड़ों का जिक्र जरूर आता है। देश में कुल तेरह के अखाड़े हैं। इन अखाड़ों का अपना रोचक इतिहास है। दैनिक भास्कर मोबाइल ऐप ने इन अखाड़ों, इनके इतिहास और इनसे जुड़ी परंपराओं की पड़ताल की...


सनातन धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए आदिशंकराचार्य ने चार पीठ- दक्षिण के शृंगेरी शंकराचार्यपीठ, पूर्व (ओडिशा) जगन्नाथपुरी में गोवर्धनपीठ, पश्चिम द्वारिका में शारदामठ और बद्रिकाश्रम में ज्योतिर्पीठ की स्थापना की थी। इनकी रक्षा के लिए शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों को मिलाकर 13 अखाड़ों का गठन किया गया। इन अखाड़ों में से महानिर्वाणी, निरंजनी, जूना, अटल, आवाहन, अग्नि और आनंद की स्थापना खुद शंकराचार्य ने की थी।

 

मुगलकाल में चलन में आया अखाड़ा शब्द

 

  • पहले आश्रमों के अखाड़ों को बेड़ा अर्थात साधुओं का जत्था कहा जाता था। अखाड़ा शब्द का चलन नहीं था। साधुओं के जत्थे में पीर और तद्वीर होते थे। अखाड़ा शब्द का चलन मुगलकाल से शुरू हुआ।
  • अखाड़ा, साधुओं का वह दल है- जो शस्त्र विद्या में भी पारंगत रहता है। कुछ विद्वानों का मानना है कि अलख शब्द से ही अखाड़ा शब्द बना है। कुछ मानते हैं कि अखाड़ा शब्द की उत्पत्ति अक्खड़ से या आश्रम से हुई है। 

 

तीन शाही स्नान करेंगे अखाड़े

 

  • कुंभ मेले के दौरान सभी 13 अखाड़े तीन शाही स्नानों में हिस्सा लेंगे। ये स्नान 15 जनवरी को मकर संक्रान्ति, 4 फरवरी को मौनी अमावस्या और 10 फरवरी को बसंत पंचमी पर होंगे।
  • शाही स्नान के लिए संगम के पास घाट बनाया गया है। प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए 45 मिनट का वक्त दिया जाएगा। 

 

कुंभ पर्व और शाही स्नान की तिथियां

 

मकर संक्रांति 15 जनवरी 
पौष पूर्णिमा 21 जनवरी 
मौनी अमावस्या 4 फरवरी
बसंत पंचमी 10 फरवरी 
माघी पूर्णिमा 19 फरवरी 
महाशिवरात्रि 4 मार्च

 

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