49 दिन चलेगा कुंभ; दुनिया के सबसे बड़े अस्थाई शहर में 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद, खर्च: 4300 करोड़ रु. / 49 दिन चलेगा कुंभ; दुनिया के सबसे बड़े अस्थाई शहर में 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद, खर्च: 4300 करोड़ रु.

 प्रयागराज न्यूज: 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेज कुंभ में आने का निमंत्रण दिया गया है

Bhaskar News

Jan 14, 2019, 05:20 PM IST
kumbh mela 2019 kumbhl will run for 49 days

प्रयागराज (यूपी)। दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक मेला प्रयागराज कुंभ मंगलवार को मकर संक्रांति के साथ शुरू हो रहा है। यह 15 जनवरी से 4 मार्च तक कुल 49 दिन चलेगा। इस बार इसमें करीब 13 से 15 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद है। इसमें करीब 10 लाख विदेशी नागरिक शामिल होंगे। यूपी सरकार कुंभ 2019 को अब तक का सबसे दिव्य और भव्य कुंभ बता रही है।


सरकार के मुताबिक पहली बार मेला क्षेत्र करीब 45 वर्ग किमी के दायरे में फैला है। पहले यह सिर्फ 20 वर्ग किमी इलाके में ही हाेता था। मेले में 50 करोड़ की लागत से 4 टेंट सिटी बसाई गई हैं, जिनके नाम कल्प वृक्ष, कुंभ कैनवास, वैदिक टेंट सिटी, इन्द्रप्रस्थम सिटी हैं। कुंभ के दौरान प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा अस्थायी शहर बस जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुंभ के आयोजन पर 4300 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हंै। इस बार कुंभ की थीम- स्वच्छ कुंभ और सुरक्षित कुंभ है। सरकार ने 10 करोड़ लोगों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें कुंभ में आने का निमंत्रण भी दिया है।


आस्था: कुंभ में 6 मुख्य स्नान पर्व, जिनमें तीन शाही स्नान ः शाही स्नान - 15, 21 जनवरी, 4, 10, 19 फरवरी, 4 मार्च


भारत में 4 जगहों पर कुंभ होता है। इनके नाम- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक हैं। इनमें से हर स्थान पर 12वें साल कुंभ होता है। प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच 6 साल के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। प्रयागराज में पिछला कुंभ 2013 में हुआ था। 2019 में यह अर्द्धकुंभ है। हालांकि यूपी सरकार इसे कुंभ बता रही है। प्रयागराज में पूर्ण कुंभ 2025 में होगा।


कब आता है कुंभ: प्रयागराज कुंभ मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू होता है, जब सूर्य और चंद्रमा वृश्चिक राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं।


मान्यता: कुंभ का मतलब कलश होता है। इसका संबंध समुद्र मंथन के दौरान अंत में निकले अमृत कलश से है। मान्यता है कि देवता-असुर जब अमृत कलश को एक दूसरे से छीन रहे थे, तब उसकी कुछ बूंदें धरती की तीन नदियों में गिरी थीं। जहां ये बूंदें गिरीं, वहीं पर कुंभ होता है। इन नदियों के नाम- गंगा, गोदावरी और क्षिप्रा हैं।

इतिहास: हर्षवर्धन ने अपना सबकुछ दान कर दिया था


प्रयाग कुंभ का लिखित इतिहास में जिक्र गुप्तकाल में (चौथी से छठी सदी) मिलता है।


चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किताब में कुंभ का जिक्र किया। वह 617 से 647 ईसवीं तक भारत मेें रहे थे। लिखा है कि प्रयाग में राजा हर्षवर्धन ने अपना सबकुछ दान कर राजधानी लौट जाते हैं।

सुविधा: 690 किमी लंबी पानी की पाइपलाइन बिछाई गई


- मेले के आयोजन में राज्य सरकार की 20 और केंद्र सरकार की 6 संस्थाएं और विभाग लगे हैं। मेला क्षेत्र में पीने के पानी के लिए 690 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। साथ ही 800 किमी लंबाई में बिजली की सप्लाई पहुंचाई गई है।


- 25 हजार स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। 7 हजार स्वच्छता कर्मी और 20 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। 4 पुलिस लाइन समेत 40 पुलिस थाना, 3 महिला थाना, 62 पुलिस पोस्ट बनाई गई हैं।


- पहली बार कुंभ में 2 इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड एंड सेंटर बनाए गए हैं। यह मेला क्षेत्र में आने वाली भीड़ और ट्रैफिक को नियंत्रित करने और सुरक्षित बनाने का काम करेगा। एक सेंटर पर करीब 116 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है।


- पहली बार में ऑर्टीफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल हो रहा है, यह भीड़ का मैनेजमेंट करेगी। श्रद्धालुआें के लिए वर्चुअल रियलिटी(वीआर) सेवा उपलब्ध कराने के लिए 10 स्टाल बनाए गए हैं।


- मेले में 4 टेंट सिटी, इसमें एक लाख कॉटेज हैं।

कुंभ की खास बातें...

- 45 वर्ग किमी में कुंभ मेला।
- 600 रसोईघर।
- 48 मिल्क बूथ।
- 200 एटीएम।
- 4 हजार हॉट स्पॉट लगे हैं।
- 1.20 लाख बॉयो टॉयलेट।
- 800 स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं।
- 300 किमी रोड मेले में बनी।
- 40 हजार एलईडी लगीं।
- 5 लाख व्हीकल के लिए पार्किंग एरिया बनाया गया।

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